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पत्नी को पीटो अगर बिस्तर पर बुलाने पर नहीं आए... ब्रिटेन के इमाम की सलाह पर उठे सवाल

इससे पहले बर्मिंघम के बोर्डस्ले ग्रीन इलाके में स्थित 'ग्रीन लेन मस्जिद' के इमाम अकील महमूद ने कुछ महीने पहले शादी से जुड़े इस्लामी कानूनों पर 47 मिनट का लेक्चर दिया और 'पति-पत्नी के कर्तव्यों' के बारे में बताया.

पत्नी को पीटो अगर बिस्तर पर बुलाने पर नहीं आए... ब्रिटेन के इमाम की सलाह पर उठे सवाल
यही हैं यासीन मुन्ये, जो पतियों को अपनी पत्नियों को पीटने की शिक्षा दे रहे हैं. (फोटो-डेली मेल)
  • ब्रिटेन के पूर्वी लंदन में इमाम यासीन मुन्ये ने धार्मिक व्याख्यान में पत्नियों को मारने की सलाह दी
  • मुन्ये सऊदी अरब में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और हैक्नी इस्लामिक कम्युनिटी सेंटर से जुड़े हैं
  • ब्रिटेन में कई मुस्लिम इमाम महिलाओं के प्रति हिंसक और दकियानूसी सोच को ऑनलाइन प्रचारित करते हैं

अपने बहुत सारे अनुयायियों के सामने बैठे, सफ़ेद कपड़े पहने एक इमाम पुरुषों से कहते हैं कि अगर उनकी पत्नियां ‘बिस्तर पर साथ आने' से मना करें, तो वे उन्हें मारें. इमाम हाथ जोड़कर, पतियों से गुज़ारिश करता है कि वे कभी भी पत्नियों की तरफ से उनकी बात न मानने को बर्दाश्त मत करें, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से अनुशासित करें... हल्का सा मारकर उन्हें दिखाएं कि घर में किसकी चलती है. यह इमाम पाकिस्तान, बांग्लादेश, अरब देशों या फिर भारत के नहीं बल्कि ब्रिटेन के हैं. वही ब्रिटेन जिसे कभी सभ्य लोगों का देश कहा जाता था.

कौन हैं ये इमाम

इस इमाम का नाम यासीन मुन्ये है और वो पूर्वी लंदन की एक धार्मिक चैरिटी, 'हैक्नी इस्लामिक कम्युनिटी सेंटर' से जुड़े हैं. धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए और यह बताते हुए कि उनके हिसाब से घरेलू हिंसा की वजहें क्या हैं, मुन्ये कहते हैं कि 'पति के बिस्तर पर बुलाने पर उसकी बात न मानना' भी एक वजह है. उनके इस वीडियो पर ब्रिटेन के मूल निवासियों सहित अन्य प्रवासी और यहां तक की टीवी और अखबार वाले भी चकित हैं. बहस चल रही है कि अगर कोई पादरी ऐसा उपदेश देता, तो उम्मीद की जाती कि पुलिस उसे हथकड़ी पहनाकर मंच से खींच ले जाती.

जब सऊदी अरब में ट्रेनिंग लेने वाले मुन्ये का भड़काऊ भाषण पिछले हफ्ते एक वीडियो में सामने आया और चैरिटी कमीशन से उनकी मस्जिद की शिकायत की गई, तो इस पर कोई प्रशासनिक या राजनीतिक विरोध की आवाज नहीं सुनाई दी. मेट पुलिस ने बस इतना कहा कि वह हैक्नी मस्जिद के खिलाफ मिली शिकायत की 'जांच' कर रही है.

फिर भी, 'द मेल ऑन संडे' को पता चला है कि मुन्ये का मामला कोई अकेला मामला नहीं है. देश भर में मुस्लिम पतियों को इसी तरह की बुरी और महिलाओं के प्रति नफरत भरी सलाह दी जाती है, अक्सर वीडियो लेक्चर के ज़रिए. आधुनिक ब्रिटेन में शरिया कानून के बढ़ते साये को लेकर चिंताएं जताई गई हैं. पिछले महीने, एसेक्स के रोमफोर्ड में एक एशियाई सुपरमार्केट का वीडियो सामने आया, जिसमें पुरुष और महिलाएं अलग-अलग लाइन में खड़े थे, और पिछले अक्टूबर में 'द मेल ऑन संडे' ने खुलासा किया कि लंदन की एक मस्जिद ने चैरिटी दौड़ आयोजित की थी, जिसमें महिलाओं के शामिल होने पर रोक थी.

ब्रिटेन में बढ़ रही चिंता

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक एकीकरण के विशेषज्ञ और 'बियॉन्ड ग्रीवेंस: व्हाट द लेफ्ट गेट्स रॉन्ग अबाउट एथनिक माइनॉरिटीज' के लेखक रकीब एहसान ने कहा, 'ब्रिटेन के बहु-सांस्कृतिक मॉडल ने इन अलग-थलग समुदायों की महिलाओं को निराश किया है. हल्की पुलिसिंग के कारण, सरकार ने हमारे शहरों के उन इलाकों की ओर आंखें मूंद ली हैं जो अपनी ही जाति या समुदाय तक सीमित हैं और जहां सोच पुरानी और दकियानूसी है. चूंकि सरकार ने इन समुदायों के साथ कोई जुड़ाव नहीं रखा है, इसलिए वहां के इमाम महिलाओं के प्रति हिंसक नफरत और ऐसी अन्य प्रथाओं का प्रचार करने का साहस जुटा लेते हैं, जो ब्रिटिश कानूनों और रीति-रिवाजों के खिलाफ हैं.'

घरेलू हिंसा के खिलाफ काम करने वाली संस्था 'जीना इंटरनेशनल' ने कहा कि मुन्ये की बातें कुछ एशियाई समुदायों में इस सोच को बढ़ावा देती हैं कि 'शादी के अंदर रेप नहीं हो सकता'. संस्था की फाउंडर रानी बिल्खु ने कहा, 'ये उपदेशक महिलाओं पर जबरदस्ती नियंत्रण रखने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं... और यौन हिंसा व घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस तरह की बातें मुस्लिम महिलाओं को रेप और घरेलू हिंसा की रिपोर्ट पुलिस में करने से रोक रही हैं, तो बिल्खु ने कहा, 'यह एक वजह है, साथ ही दूसरी दिक्कतें भी हैं, जैसे मुस्लिम महिलाओं का आगे आने में हिचकिचाना और भाषा की रुकावट. कभी-कभी, समाज भी इन मुद्दों से निपटने से बचता है, कहीं किसी गोरे पुरुष या महिला को रेसिस्ट न कह दिया जाए. यह सुरक्षा का मुद्दा है.'

मून्ये इकलौते इमाम नहीं और भी हैं

इस अखबार की जांच 2026 के ब्रिटेन की एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती है, जहां कई और इमाम ऑनलाइन पोस्ट किए गए अपने उपदेशों में अपनी पुरानी और दकियानूसी सोच को गर्व से दिखाते हैं. एक ने परफ्यूम लगाकर 'घर से बाहर निकलने वाली' महिलाओं को 'व्यभिचारी' कहा, जबकि एक दूसरे वीडियो में अबू साद मुहम्मद, जो मुन्ये वाली मस्जिद में ही उपदेश देते हैं, ने कहा कि 'इस देश की दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई' यह है कि पत्नियों को पतियों के खिलाफ कर दिया गया है, और पत्नियां 'जानती हैं कि अगर उन्हें एक थप्पड़ मारा जाए, तो वे पुलिस को बुला लेंगी'.

वहीं, बर्मिंघम में अन-नूर मस्जिद और कम्युनिटी सेंटर के मुहम्मद अब्दुर्रज़ाक सलाह देते हैं कि सेक्स से इनकार करने पर सबसे पहले पत्नी को 'समझाया-बुझाया' जाए. अगर इससे बात न बने, तो वे कहते हैं, 'तब उसे मारने की इजाज़त है, लेकिन ऐसी मार जिससे चोट का निशान न पड़े और हड्डियां न टूटें'.

बर्मिंघम के बोर्डस्ले ग्रीन इलाके में स्थित 'ग्रीन लेन मस्जिद' के इमाम अकील महमूद ने कुछ महीने पहले शादी से जुड़े इस्लामी कानूनों पर 47 मिनट का लेक्चर दिया और 'पति-पत्नी के कर्तव्यों' के बारे में बताया. इस भाषण के दौरान मौलवी ने जोर देकर कहा कि पति को 'बगावत की स्थिति में अपनी पत्नी को अनुशासित करने' का अधिकार है. ऑनलाइन पोस्ट किए गए वीडियो में उन्होंने कहा, 'पति की इजाजत के बिना पत्नी का घर से बाहर जाना जायज नहीं है', और आगे कहा: 'शारीरिक अनुशासन आखिरी उपाय है, बशर्ते इससे दर्द, चोट, डर और अपमान न हो.'

इसी मस्जिद में, एक साल पहले, अबू रयान नाम के एक और उपदेशक ने नमाज़ पढ़ने वालों से कहा था कि पत्नी को हर समय अपने पति के लिए शारीरिक रूप से उपलब्ध रहना चाहिए. मस्जिद के पूर्व इमामों में से एक, अबू उसामा अत-तहबी, 2023 में तब विवादों में घिर गए थे, जब उन्होंने कहा था कि 'समलैंगिकता जायज नहीं है', जिसके बाद सरकार ने 20 लाख पाउंड की ग्रांट रद्द कर दी थी. 

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