इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आगे चुनाव दिख रहा है. ऐसे में वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने बगावत करने से भी नहीं डर रहे हैं. गाजा युद्ध को लेकर एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है. अमेरिका की तरफ से तैयार की गई शांति योजना पर बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनका देश अभी इस योजना से सहमत नहीं है. वह यह बयान उस समय दे रहे हैं जब अमेरिका की तरफ से भरोसा दिया गया है कि इजरायली सेना तभी गाजा से पीछे हटे, जब हमास पूरी तरह अपने हथियार डाल देगा. इसी बीच, इजरायल की सेना ने भी ऐलान किया है कि वह गाजा में अपने अभियान जारी रखेगी और 7 अक्टूबर के हमले के जिम्मेदार लोगों का पीछा करती रहेगी.
दूसरी तरफ, फिलिस्तीनी इस्लामिक संगठन हमास ने पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की तरफ से जारी रोडमैप के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. इस योजना में हमास के हथियार सौंपने और इजरायली सेना के गाजा से हटने जैसी बातें शामिल हैं.
नेतन्याहू ने क्या कहा?
मंगलवार रात सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की टीम का मानना है कि वह हमास को हथियार छोड़ने और गाजा को सैन्य गतिविधियों से मुक्त कराने में सफल हो सकती है. नेतन्याहू ने कहा, "हम इसकी जांच कर रहे हैं. उन्होंने हमें एक मसौदा भेजा था. हमने उसे मंजूरी नहीं दी है. वह हमारा मसौदा नहीं है. हमने उस पर अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं."
इजरायल के आर्मी चीफ ने क्या कहा?
बुधवार को इजरायल के सेना प्रमुख ने कहा कि देश की सेना फिलिस्तीनी इलाके गाजा में सक्रिय तरीके से काम करती रहेगी. वह पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले के जिम्मेदार लोगों का पीछा जारी रहेगा. सेना के बयान के मुताबिक, गाजा में तैनात सैनिकों से मुलाकात के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने कहा, "गाजा पट्टी में हमने हमास पर बड़े हमले किए हैं, उसे काफी कमजोर किया है और सुरक्षा की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है."
बोर्ड ऑफ पीस की बात मानने को इजरायल अभी तैयार नहीं
शुरुआती रोडमैप पर इजरायल की आपत्तियों के बाद, सोमवार को 'बोर्ड ऑफ पीस' ने नेतन्याहू से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि इजरायली सेना को गाजा में अपनी मौजूदा जगहों से तभी हटना होगा, जब हमास पूरी तरह से हथियार डाल देगा. लेकिन नेतन्याहू की सरकार के दक्षिणपंथी सहयोगियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. सरकार के दो कट्टर दक्षिणपंथी मंत्रियों ने इस योजना को खारिज करने के लिए दोबारा मतदान कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह योजना कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई बातों से मेल नहीं खाती.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं