- पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु प्लांट के लिए यूरेनियम सप्लाई रोक दी है और एयरस्पेस अनुमति नहीं दी है
- यूरेनियम की खेप रूस से 24 सितंबर को आनी थी, लेकिन पाकिस्तान के एयरस्पेस रोक के कारण समय पर नहीं पहुंच सकी
- रूपपुर परमाणु प्लांट रूस की रोसाटॉम कंपनी की तकनीकी मदद से बन रहा है
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरी तो पाकिस्तान खुश हुआ. बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का उभार हुआ और माहौल वैसा ही बनने लगा जो पाकिस्तान चाहता था. बांग्लादेश के भी कई नेताओं, मौकापरस्त लोगों और कुछ लोगों को भी लगा कि जिस पाकिस्तान से हिंसक क्रांति के बाद आजादी पाई है, वही उनके काम आएगा. लेकिन पाकिस्तान ने फिर से अपना असली चेहरा दिखा दिया है. उसने साबित कर दिया है कि बांग्लादेश के लोगों की परवाह न 1971 में थी और न आज.
पाकिस्तान ने ऐसा क्या किया है?
बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा प्लांट के लिए यूरेनियम की सप्लाई रुक गई है. इसकी वजह पाकिस्तान है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश को एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं दी है. इस परमाणु प्लांट की यूनिट-2 के लिए परमाणु ईंधन रूस से 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचना था, लेकिन अभी तक नहीं पहुंच पाया है.
बांग्लादेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने न्यूज एजेंसी ANI को फोन पर बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि रूपपुर परमाणु प्लांट के लिए यूरेनियम लेकर एक कार्गो विमान 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचने वाला था. लेकिन इस विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं मिली. इसलिए यूरेनियम तय समय पर बांग्लादेश नहीं पहुंच सका. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने एयरस्पेस की मंजूरी क्यों नहीं दी, इसकी सही वजह अभी पता नहीं है.
उन्होंने बताया कि अब यूरेनियम पहुंचाने के लिए नई तारीख तय की गई है. रूस ने संकेत दिया है कि यूरेनियम अक्टूबर के पहले हफ्ते में बांग्लादेश पहुंच सकता है.
रूस की मदद से बन रहा है परमाणु प्लांट
यह परमाणु बिजली प्लांट रूस की रोसाटॉम की मदद से बनाया जा रहा है. इस मामले में स्थिति जानने के लिए एएनआई ने रोसाटॉम के एक प्रतिनिधि को ईमेल भी भेजा, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.
बता दें कि रूपपुर परमाणु ऊर्जा प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु बिजली प्लांट है. यह पाबना जिले के ईश्वरदी उपजिला में पद्मा नदी के किनारे पाकशी यूनियन के रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है. इसके निर्माण में रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम तकनीकी मदद दे रही है और बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा आयोग इसकी निगरानी कर रहा है. इस प्रोजेक्ट में तीसरी पीढ़ी के दो वीवीईआर-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं. दोनों रिएक्टर मिलकर कुल 2,400 मेगावाट बिजली पैदा करेंगे। यह लगातार बिजली देने वाली बेसलोड बिजली होगी.
पहली यूनिट के लिए यूरेनियम पहले ही पहुंच चुका है
बांग्लादेश ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आधिकारिक तौर पर कदम तब रखा, जब रूपपुर परमाणु बिजली प्लांट की पहली यूनिट के लिए कम संवर्धित यूरेनियम ईंधन की पहली खेप रूस से सुरक्षित तरीके से बांग्लादेश पहुंची थी. यह ईंधन रोसाटॉम के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में बनाया गया था. ईंधन की 164 नई असेंबली रूस से सीधे ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लाई गई थीं. इन्हें रूस के भारी मालवाहक विमान से कड़ी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत लाया गया था.
इसके बाद राजधानी ढाका से रेडिएशन से बचाने वाले विशेष कंटेनरों को बेहद कड़ी सुरक्षा वाले 'ग्रीन कॉरिडोर' से रूपपुर प्लांट तक ले जाया गया. इस रास्ते पर बांग्लादेश की सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा दी. यह खेप पाबना के ईश्वरदी स्थित प्लांट पहुंची, जहां अक्टूबर 2023 में आधिकारिक रूप से इसे सौंपने का कार्यक्रम हुआ था.
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