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गाजा में फोर्स भेजने को तैयार बांग्लादेश सरकार को झटका, फिलिस्तीन समर्थकों ने खोला मोर्चा

बांग्लादेश की पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी ने रविवार को अंतरिम सरकार की गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की दिलचस्पी की कड़ी निंदा की.

गाजा में फोर्स भेजने को तैयार बांग्लादेश सरकार को झटका, फिलिस्तीन समर्थकों ने खोला मोर्चा
गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होना चाहता है बांग्लादेश
  • बांग्लादेश की पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी ने सरकार को गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में भागीदारी से मना किया है
  • समिति ने कहा कि गाजा में सैन्य बल की उपस्थिति शांति के बजाय तनाव बढ़ा सकती है और मानवीय संकट गहरा सकती है
  • बांग्लादेश का ऐतिहासिक रुख फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में रहा है और सैन्य हस्तक्षेप पर आधारित नीति के खिलाफ है
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बांग्लादेश में फिलिस्तीन के समर्थन में सक्रिय समूह 'पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी' ने सरकार को स्पष्ट हिदायत दी है कि वह प्रस्तावित गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स (अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल) में किसी भी प्रकार की भागीदारी न करे. समिति का कहना है कि बांग्लादेश का ऐतिहासिक और नैतिक रुख हमेशा से फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में रहा है और ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय सैन्य या सुरक्षा ढांचे में शामिल होना इस परंपरागत नीति के विपरीत होगा. मीडिया आउटलेट 'द डेली स्टार' के अनुसार, 'पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी,' बांग्लादेश ने रविवार को अंतरिम सरकार की गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की दिलचस्पी की कड़ी निंदा की.

समिति ने रविवार को अपने बयान में कहा कि गाजा इस समय गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है, जहां आम नागरिक लगातार हिंसा, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं. ऐसे हालात में किसी “स्टेबिलाइजेशन फोर्स” का गठन, जो जमीनी सच्चाई में सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है, शांति के बजाय तनाव को और गहरा कर सकता है. समिति के अनुसार, फिलिस्तीन की समस्या का समाधान सैन्य हस्तक्षेप से नहीं बल्कि न्यायपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से ही संभव है.

कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी प्रोफेसर एमडी हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि स्टेबिलाइजेशन फोर्स की मुख्य जिम्मेदारी इजरायल की सुरक्षा पक्की करने के बहाने गाजा में आजादी के लिए लड़ने वालों से हथियार छीनना और बदले में फिलिस्तीनी लोगों के विरोध आंदोलन को पूरी तरह खत्म करना होगा.

इसमें कहा गया, “बदकिस्मती से, अंतरिम सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, खलीलुर रहमान, जो अभी अमेरिका के दौरे पर हैं, ने वाशिंगटन में अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अवर सचिव, एलिसन हुकर, और दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री, पॉल कपूर के साथ मीटिंग में गाजा के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में हिस्सा लेने में बांग्लादेश की दिलचस्पी दिखाई है.” यह बात मुख्य सलाहाकार मोहम्मद युनूस के प्रेस विंग की ओर से जारी एक बयान का जिक्र करते हुए कही गई.

दरअसल, पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश ने भी गाजा में अपनी सेना भेजने की इच्छा जताई है. बांग्लादेश सरकार ने गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयारी के संकेत दिए. ये बात बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) खलीलुर रहमान ने अमेरिकी मंत्री एलिसन हुकर से मुलाकात के दौरान कही थी. विरोध इसी का हो रहा है.

पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश का जन्म खुद संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन के बाद हुआ था, इसलिए देश की जनता स्वाभाविक रूप से उत्पीड़न और कब्जे के खिलाफ खड़े लोगों के दर्द को समझती है. 

फिलिस्तीन पर बांग्लादेश का क्या स्टैंड रहा है?

बांग्लादेश ने अतीत में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है और इजरायली कब्जे की आलोचना की है. समिति का मानना है कि गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होना इस नैतिक और कूटनीतिक रुख को कमजोर कर सकता है. फिलहाल बांग्लादेश सरकार की ओर से इस अपील पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब मध्य पूर्व की स्थिति वैश्विक राजनीति का केंद्र बनी हुई है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश भी गाजा भेजना चाहता है अपनी सेना

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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