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बांग्लादेश में जमात को हराने वाले मात्र 2 हिंदू उम्मीदवार कौन हैं? रिजल्ट में अल्पसंख्यकों के लिए छिपा मैसेज

Bangladesh Election Result 2026: 2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की संख्या 17 रही थी. 2018 के चुनाव में भी इतने ही हिंदू सांसद जीते थे, जिनमें से ज्यादातर आवामी लीग से थे. इसबार केवल 2 हिंदू सांसद रह गए हैं.

बांग्लादेश में जमात को हराने वाले मात्र 2 हिंदू उम्मीदवार कौन हैं? रिजल्ट में अल्पसंख्यकों के लिए छिपा मैसेज
Bangladesh Election Result 2026: जीतने वाले दो हिंदू उम्मीदवार गयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं
  • बांग्लादेश में बीएनपी की बड़ी जीत, चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय के केवल चार उम्मीदवार ही संसद में चुने गए हैं
  • दो हिंदू उम्मीदवार गयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी बीएनपी के टिकट पर जीत हासिल करने में सफल रहे हैं
  • 2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की संख्या 17 थी, जो इस बार कम होकर दो रह गई है
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बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) मंगलवार, 17 फरवरी को सरकार बनाने जा रही है. पड़ोसी देश में हुए 13वें आम चुनावों पर पूरी दुनिया की नजर थी. एक बड़ी वजह यह भी थी कि 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह पहला चुनाव है और यह उस माहौल में हो रहा था जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले तेज हो गए थे. सबकी जुबान पर यह सवाल भी था इस चुनाव में कितने हिंदू उम्मीदवारों को जीत मिलती है. अब जवाब हमारे सामने है. बांग्लादेश के इस आम चुनाव में अल्पसंख्यक समुदायों के कुल चार उम्मीदवार जीते हैं, जिनमें दो हिंदू शामिल हैं. ये सभी उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के हैं. खास बात यह है कि पिछले यानी 2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की संख्या 17 रही थी.

बांग्लादेश 2026 चुनाव में जीतने वाले अल्पसंख्यक उम्मीदवार

जीतने वाले दो हिंदू उम्मीदवारों में गयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी शामिल हैं. दोनों ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की है. गयेश्वर चंद्र रॉय ढाका की एक सीट से जीते, जबकि निताई रॉय चौधरी ने पश्चिमी मगुरा सीट से जीत दर्ज की. दोनों ने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को हराया और यह बड़ी बात है.

बता दें कि गयेश्वर चंद्र रॉय बीएनपी की पॉलिसी बनाने वाले सबसे उंची यूनिट, स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं. वहीं निताई रॉय चौधरी पार्टी के प्रमुख उपाध्यक्षों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ सलाहकार और रणनीतिकार भी हैं.

जीत हासिल करने वाले तीसरे अल्पसंख्यक उम्मीदवार साचिंग प्रू हैं. साचिंग बीएनपी के सीनियर नेता हैं और बौद्ध धर्म को मानते हैं. वे दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी जिले बंदरबन से सांसद चुने गए हैं और मारमा जातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. वहीं जीतने वाले चौथे अल्पसंख्यक उम्मीदवार दीपेन देवान हैं, जो बौद्ध बहुल चकमा जातीय अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. वे दक्षिण-पूर्वी रंगामाटी पहाड़ी जिले की एक सीट से जीते हैं. हालांकि, उनकी धार्मिक पहचान को लेकर स्थिति साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं.

किन पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवारों पर दिखाया भरोसा?

बांग्लादेश की कुल आबादी लगभग 17 करोड़ है और मुस्लिम बहुल इस देश में हिंदुओं की आबादी करीब आठ प्रतिशत है. चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार के आम चुनाव में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े 79 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं, जिनमें से ज्यादातर हिंदू थीं. इनमें से 67 उम्मीदवारों को 22 राजनीतिक दलों ने टिकट दिया था, जबकि 12 उम्मीदवार निर्दलीय थे.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ बांग्लादेश ने सबसे ज्यादा 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इसके बाद वामपंथी बांग्लादेश साम्यवादी दल ने 8, अपेक्षाकृत कम जानी-पहचानी बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी ने 8 और वामपंथी बांग्लादेश समाजतांत्रिक दल ने 7 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे. बीएनपी ने 6 उम्मीदवार उतारे, जबकि जातीय पार्टी ने चार उम्मीदवारों को टिकट दिया.

जमात-ए-इस्लामी ने अपने इतिहास में पहली बार एक अल्पसंख्यक हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया. देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी ने दक्षिण-पश्चिमी खुलना क्षेत्र से अनुभवी कारोबारी कृष्णा नंदी को मैदान में उतारा, हालांकि वे हार गए. फिर भी जमात के उम्मीदवार के रूप में उनकी भागीदारी पर काफी चर्चा हुई. वे खुलना-1 सीट पर बीएनपी उम्मीदवार से हारकर दूसरे स्थान पर रहे.

नतीजे क्या मैसेज दे रहे?

बांग्लादेश के नतीजे वहां के अल्पसंख्यकों के लिए एक गंभीर राजनीतिक संकेत देते हैं. यह दिखाते हैं कि सत्ता परिवर्तन के साथ अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ है. पहले जहां हिंदू सांसदों को आवामी लीग के दौर में अपेक्षाकृत ज्यादा टिकट और सुरक्षा मिलती थी, वहीं इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की बड़ी जीत के बावजूद अल्पसंख्यक चेहरे हाशिये पर दिखे. यह संदेश भी छिपा है कि अल्पसंख्यकों का वोट निर्णायक तो है, लेकिन सत्ता में उनकी भागीदारी सुनिश्चित नहीं मानी जा रही.

बांग्लादेश की राजनीति में हिंदुओं की भागीदारी

2024 के चुनाव में हिंदू सांसदों की संख्या 17 रही थी. 2018 के चुनाव में भी इतने ही हिंदू सांसद जीते थे, जिनमें से ज्यादातर आवामी लीग से थे.

इस बार तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी ने गुरुवार को हुए चुनाव में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल की है. पार्टी को 49.97 प्रतिशत वोट मिले और 209 सीटें मिलीं. चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए. वहीं जमात-ए-इस्लामी, जो 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी का विरोध करती थी, ने अब तक का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. पार्टी को 31.76 प्रतिशत वोट मिले और 68 सीटें हासिल हुईं. नेशनल सिटीजन पार्टी को तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, कुल छह सीटें, और उसे 3.05 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए.

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