दुनिया में आज ही के दिन 150 साल पहले पहली बार टेलीफोन की घंटी बजी थी. 10 मार्च 1876 की शाम को अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने अपने सहयोगी थॉमस वॉटसन को पहली फोन कॉल की थी. अमेरिकी शहर बोस्टन की एक बिल्डिंग के दो अलग-अलग कमरों में बेल और वॉटसन बैठे थे. दोनों लंबे समय से ऐसे यंत्र पर काम कर रहे थे, जिससे एक जगह से दूसरी जगह तारों के जरिये संवाद किया जा सके. बेल ने एक नया 'लिक्विड ट्रांसमीटर' (Liquid Transmitter) ईजाद किया.
एक गलती जो बनी अविष्कार की वजह
बेल एक कमरे में थे और वॉटसन दूसरे कमरे में रिसीवर के पास बैठे थे.संयोग से उस दौरान ग्राहम बेल के कपड़ों पर गलती से तेजाब गिर गया.दर्द और बेचैनी में बेल ने वॉटसन को आवाज लगाते हुए कहा, मिस्टर वॉटसन, यहां आइए, मुझे आपकी ज़रूरत है (Mr Watson, come here, I want to see you). वॉटसन दूसरे कमरे में थे, लेकिन उन्हें बेल की रिसीवर से ग्राहम बेल की आवाज साफ सुनाई पड़ी. वो तेजी से चिल्लाते हुए बेल के पास आए और बोला कि आपका एक-एक शब्द उन्हें साफ सुनाई पड़ा. थॉमस वॉटसन ने अपनी डायरी और आत्मकथा में कहा था कि बेल ने उन्हें मदद के लिए पुकारा था.
7 मार्च को टेलीफोन का पेटेंट हासिल किया
इससे साबित हुआ कि ध्वनि तरंगों (Waves) को एक से दूसरी जगह भेजा जा सकता है. इस कॉल से ठीक 3 दिन पहले 7 मार्च 1876 को बेल ने टेलीफोन के अविष्कार का पेटेंट हासिल कर लिया था. बेल ने ध्वनि की तरंगों को एक तरल (एसिड और पानी का मिश्रण) में कंपन पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. इस कंपन ने बिजली के प्रवाह (Electric Current) को बदला और तार के जरिये दूसरे छोर पर आवाज में बदल दिया. साउंड की फ्रीक्वेंसी और तरंग दैर्ध्य (frequency and wavelength of sound) का इलेक्ट्रिक सिग्नल के साथ तालमेल बिठाया गया था. यही एक वाक्य संचार की दुनिया में क्रांति बन गया. आज इस्तेमाल हो रहे मोबाइल फोन मिस्टर वॉटसन वाले कॉल से पड़ी थी.
ग्राहम बेल और एलीशा ग्रे के बीच पेटेंट विवाद
टेलीफोन जैसे उपकरण के अविष्कार में कई वैज्ञानिक जुटे थे. अलेक्जेंडर ग्राहम बेल और एलीशा ग्रे (Elisha Gray) के बीच यही विवाद था. 14 फरवरी 1876 को सुबह करीब 11:30 बजे बेल के वकील ने टेलीफोन का पेटेंट (Patent Application) दाखिल किया था. उसी दिन दोपहर करीब 1:30 या 2 बजे एलीशा ग्रे ने उसी दफ्तर में टेलीफोन के लिए कैविएट दाखिल किया. हालांकि महज 2 से 3 घंटे के इस अंतर से बेल ने बाजी जीत ली और उन्हें दुनिया में टेलीफोन का खोजकर्ता बना दिया.
लिक्विड ट्रांसमीटर का विवाद
बेल के टेलीफोन का शुरुआती डिजाइन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक था, जो ज्यादा अच्छा नहीं था. वहीं एलीशा ग्रे ने लिक्विड ट्रांसमीटर की बात अपने आवेदन में की थी. लेकिन 10 मार्च को ग्राहम बेल ने जिस सफल कॉल (वॉटसन वाली घटना) का जिक्र किया, उसमें बेल ने उसी लिक्विड ट्रांसमीटर वाली तकनीक इस्तेमाल की. आरोप लगा कि पेटेंट ऑफिस के किसी भ्रष्ट अफसर ने एलीशा ग्रे का डिजाइन बेल को दिखा दिया था.
पेटेंट विवाद क्या है
फिर कई दशकों तक बेल और उनकी कंपनी 'बेल टेलीफोन' पर सैकड़ों मुकदमे ठोके गए. ग्रे ने बेल पर आइडिया चोरी का आरोप लगाया. लेकिन पेटेंट ऑफिस ने कहा कि बेल का आवेदन पूर्ण पेटेंट के रूप में पहले जमा हुआ था, जबकि ग्रे का आवेदन केवल एक नोटिस भर था.एलीशा ग्रे ने टेलीफोन को शुरुआत में एक खिलौना समझकर गंभीरता से नहीं लिया. उन्हें लगा था कि टेलीग्राफ (तार भेजना) ही भविष्य की तकनीक है, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी चूक साबित हुई.
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