- ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त ने कहा कि चीन की आक्रामकता चिंता का विषय है
- चीन के साथ व्यापार में ऑस्ट्रेलिया ने बड़े नुकसान का सामना किया था
- चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत और से दुनिया भर के देशों में चिंता दिखाई दे रही है
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में दुनिया के कई दिग्गज जुटे. भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने इस अवसर पर एक बड़ी बात की. उन्होंने कहा कि चीन दूसरे विश्वयुद्ध जैसी तैयारी कर रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि चीन के इस आक्रामक तेवरों के कारण सिर्फ पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि उसे कोसो दूर के देश भी चिंतित हैं.
चीन से किन बातों पर डर
फिलिप ग्रीन ने सबसे पहले चीन-आस्ट्रेलिया व्यापार संबंधों पर कहा, "चीन के साथ हमारा एक ऐसा दौर आया था जब इकोनॉमिक डेडलॉक की स्थिति बन गई थी. एक ही हफ्ते में ऑस्ट्रेलिया का 20 अरब डॉलर का व्यापार ठप हो गया था. हम चीन को जो सामान बेचते थे, उनमें से बहुत कुछ अब उपलब्ध नहीं था. यह हमारे लिए मुश्किल तो था, लेकिन नामुमकिन नहीं. उस व्यापार का लगभग 96% हिस्सा दूसरे बाजारों में चला गया. और एक तरह से, इसके चलते हम और ज्यादा मजबूत और दृढ़ हो गए."
भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त ने आगे कहा, चीन के साथ हमारे मतभेद हैं. हमें चीन की सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिशों पर चिंता है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले चीन सबसे तेजी से अपनी सेना को मजबूत कर रहा है. हमें चीन की नौसेना की गतिविधियों पर भी चिंता है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच 'तस्मान सागर' में बिना किसी उचित चेतावनी के उनके द्वारा की जाने वाली 'लाइव फ़ायरिंग' (असली हथियारों से अभ्यास) शामिल है. और जब हम देखते हैं कि चीन 'इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों' का परीक्षण करता है, जो दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देशों के पास जाकर गिरती हैं, तो हमारे मन में कई सवाल उठते हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है."
फिलिप ग्रीन की ये बातें सिर्फ आस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं हैं. दुनिया के ज्यादातर देश ऐसा ही सोचते हैं. फिर चाहे वो अमेरिका हो, रूस हो, भारत हो या यूरोप. सब चीन के व्यापार के तरीकों और उसकी लगातार हो रही सेना से चिंतित हैं. मगर, सवाल ये है कि क्या इनमें कुछ सच्चाई भी है. या सिर्फ ये काल्पनिक डर है.
व्यापार पर चीन के आंकड़ों को देखें-
- वर्ष 2025 में अमेरिका का चीन के साथ द्विपक्षीय वस्तु व्यापार घाटा लगभग $202.1 बिलियन (202.1 अरब डॉलर) था.
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड $99.2 बिलियन (99.2 अरब डॉलर) तक पहुंच गया.
- यही हाल रूस, यूरोप से लेकर अफ्रीका तक का चीन के साथ व्यापार में देखने को मिलता है.
- इसका कारण ये है कि चीन अपने देश के उद्योगों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वो सस्ते में माल दूसरे देश में डंप कर देते हैं.
- इसके बाद उस देश का लोकल उद्योग धीरे-धीरे बंद हो जाता है और फिर चीनी कंपनियां वहां माल आराम से खपाने लगती हैं.
- साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार के कारण भी चीन से हर देश ज्यादा से ज्यादा माल सप्लाई करता है.
- वहीं चीन आज की डेट में लगभग हर चीज खुद बना रहा है, ऐसे में उसे किसी दूसरे देश से कुछ खरीदने की जरूरत भी कम पड़ती है.
डिफेंस के क्षेत्र में चीन की ताकत समझिए
- चीन का आधिकारिक रक्षा बजट अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है.
- वर्ष 2024-2025 के लिए चीन का आधिकारिक सैन्य बजट लगभग $231.4 बिलियन (लगभग ₹19.3 लाख करोड़) था.
- कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का वास्तविक सैन्य खर्च उसके आधिकारिक बजट से बहुत अधिक (लगभग $300-350 बिलियन) है.
- चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी सक्रिय थल सेना है, जिसमें लगभग 20 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक हैं.
- नेवी भी उसकी काफी मजबूत है. जहाजों की कुल संख्या के मामले में चीनी नौसेना ने अमेरिकी नौसेना को भी पीछे छोड़ दिया है.
- चीन के पास 370 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं.
- चीन ने अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का रडार से बचने वाला स्टील्थ फाइटर जेट J-20 विकसित कर लिया है, जिसे वह तेजी से अपनी वायु सेना में शामिल कर रहा है.
- इसके अलावा J-31/J-35 स्टील्थ फाइटर पर भी काम चल रहा है.चीन के पास J-16, J-11 और J-10C जैसे 3000 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान भी हैं.
इतना ही नहीं चीन अंतरिक्ष से लेकर एआई के क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है. वो लगातार कई देशों के इलाकों पर अपना दावा करता रहता है. यहां तक की उसका रूस से भी सीमा विवाद है. चीन की बढ़ती ताकत को देखकर अब रूस भी चीन को लेकर सतर्क रहता है. हालांकि, यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और चीन के संबंधों में गहराई भी काफी आई है, मगर सीमा विवाद अपनी जगह कायम है.
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