- यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमला किया, जिससे पाकिस्तान अपने रक्षा समझौते के तहत चिंतित है
- पाकिस्तान ने सऊदी अरब में हजारों सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं और ईरान को चेतावनी दी है
- हूती विद्रोहियों के हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है और सऊदी-हूती संघर्ष फिर से शुरू होने की आशंका है
इस हफ्ते यमन के ईरान-समर्थक हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमला कर दिया. इससे पाकिस्तान चिंतित है. वजह ये है कि सऊदी अरब के साथ उसका डिफेंस पैक्ट है. इस पैक्ट के मुताबिक एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा. अब अगर पाकिस्तान हूती विद्रोहियों से भिड़ा तो इसका मतलब होगा कि वो सीधे ईरान से भिड़ रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान घबराया हुआ है.
सैनिक और लड़ाकू विमान भी तैनात
परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान ने पिछले महीने वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता कराने में मदद की थी. उसने पिछले साल सऊदी अरब के साथ आपसी रक्षा समझौता किया था और हजारों पाकिस्तानी सैनिकों के साथ-साथ लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन भी वहां तैनात किया है. पाकिस्तान ने इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब पर ईरान के हमलों पर भी नाराजगी जताई थी, लेकिन क्षेत्रीय जानकारों और अधिकारियों का कहना है कि इस हफ्ते हुए हमलों ने ईरान के प्रति इस्लामाबाद की नाराजगी को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इनसे सऊदी-हूती संघर्ष के नए सिरे से शुरू होने की आशंका पैदा हो गई है.
पाकिस्तान ने बताई रेड लाइन
सोमवार को सऊदी अरब की तरफ से अपने कब्जे वाले एयरपोर्ट पर बमबारी का आरोप लगाने के बाद, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागीं. सीमा पार से हुई इस गोलीबारी ने चार साल से चल रहे संघर्ष-विराम को तोड़ दिया है, लेकिन अभी तक यह मामला एक ही घटना तक सीमित रहा है. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "हमारे शीर्ष नागरिक और सैन्य नेताओं ने ईरान को सर्वोच्च स्तर पर यह संदेश दिया है कि सऊदी अरब पर हमले का मतलब पाकिस्तान पर हमला है. यह हमारी 'रेड लाइन' है."
लाल सागर पाकिस्तान के लिए भी जरूरी
पाकिस्तान के सुरक्षा विश्लेषक मुहम्मद आमिर राणा ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि तनाव इतनी अचानक बढ़ जाएगा. पाकिस्तान की चिंता की मुख्य वजह यह है कि उसे डर है कि इस टकराव में हूती गुट की भागीदारी उसे भी खींच सकती है, जैसा कि इस साल की शुरुआत में ईरान के मिसाइल हमलों के समय हुआ था. दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि यमन से लगी सऊदी सीमा के पास पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं, जिससे उनके सीधे तौर पर इस टकराव में फंसने का खतरा बढ़ गया है. इस्लामाबाद में इस बात की भी चिंता है कि हूती गुट की वजह से तनाव बढ़ने पर लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है. लाल सागर एक अहम व्यापारिक मार्ग है, जिस पर पाकिस्तान और कई अन्य देश निर्भर हैं. अगर वहां टकराव बढ़ता है, तो उसे रोकना मुश्किल हो सकता है और इससे सऊदी अरब के हितों पर ऐसे हमले हो सकते हैं जिनके कारण पाकिस्तान को अपने आपसी रक्षा समझौते के तहत सैन्य दखल देना पड़ सकता है.
ईरानी सेना पर पाकिस्तान जनरल के आरोप
पाकिस्तान के रिटायर्ड जनरल गुलाम मुस्तफा ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान के शीर्ष नेता सभी पक्षों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हूती गुट सऊदी अरब में अपने हमलों का दायरा बढ़ाता है, तो हालात बदल सकते हैं. पाकिस्तान सरकार के दो अधिकारियों ने कहा कि इस्लामाबाद में ईरानी नेतृत्व के भीतर बढ़ती फूट को चिंता की नजर से देखा जा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ शामिल के विचार और लक्ष्य 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से काफी अलग होते जा रहे हैं. पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषक मुहम्मद अली ने कहा, "ऐसा लगता है कि ईरान में फैसले लेने की प्रक्रिया पर सेना का दबदबा है." उन्होंने आगे कहा कि इस्लामाबाद में भी इस बात को अब ज्यादा महसूस किया जा रहा है.
बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है और उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए हमलों से मध्य पूर्व में पैदा हुए नए तनाव का बुरा असर देश की अर्थव्यवस्था पर फिर से पड़ सकता है.
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