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मुनीर को मौलाना फजलुर ने दिलाई 1971 के शर्मनाक सरेंडर की याद, कहा- कहीं नक्शा फिर न बदल जाए

पाकिस्तान के सीनियर नेता मौलाना फजलुर रहमान ने मुनीर की सेना के रवैये पर उठाया सवाल, कहा- 1971 में हथियार डालने से एक दिन पहले तक जनरल याह्या खान आखिरी दम तक लड़ने की बात की थी.

मुनीर को मौलाना फजलुर ने दिलाई 1971 के शर्मनाक सरेंडर की याद, कहा- कहीं नक्शा फिर न बदल जाए
मुनीर को मौलाना फजलुर ने दिलाई 1971 के शर्मनाक सरेंडर की याद

पाकिस्तान के सीनियर नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर पर निशाना साधा. उन्होंने पाकिस्तानी सेना को ही भारत के खिलाफ 1971 के युद्ध में मिली शर्मनाक हार और सरेंडर की याद दिलाई. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लगातार लोगों पर अत्याचार और खून-खराबा जारी रहा, तो पाकिस्तान के नक्शे में फिर से बदलाव हो सकता है.

पेशावर में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए रहमान ने सेना के बड़े-बड़े दावों और अपनी ताकत दिखाने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ देश की जनता बहुत ज्यादा परेशानियों से गुजर रही है. उन्होंने सेना के बड़े अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “हम इस देश की रक्षा करने वाले हैं. किसी के बाप में भी इतनी ताकत नहीं है कि वह इस देश को नुकसान पहुंचा सके. मैं मानता हूं कि आप बहुत ताकतवर हैं.”

रहमान ने असीम मुनीर के मौजूदा रवैये की तुलना 1971 में पाकिस्तानी सेना की हार से की. 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच 13 दिन तक युद्ध हुआ था. 16 दिसंबर को ढाका में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने सरेंडर किया था. इसके बाद पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा उससे अलग हो गया और बांग्लादेश आजाद हुआ. रहमान ने पाकिस्तानी सेना को याद दिलाया कि 1971 में सरेंडर करने से ठीक एक दिन पहले सेना ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि वह आखिरी दम तक लड़ेगी.

उन्होंने कहा, “मुझे याद है और शायद कुछ बुजुर्गों को भी याद होगा कि दिसंबर 1971 में हथियार डालने से एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने सेना को संबोधित किया था. उन्होंने कहा था कि हम सड़कों पर लड़ेंगे, रेगिस्तान में लड़ेंगे, खेतों में लड़ेंगे, कारखानों में लड़ेंगे, पहाड़ों में लड़ेंगे और उनके खिलाफ लड़ेंगे. हम लड़ेंगे. हमने उस समय ये बड़ी-बड़ी बातें सुनी थीं.”

इसके बाद रहमान ने सेना के पुराने खोखले दावों को आज की स्थिति से जोड़ते हुए सवाल किया कि जब जनता इतनी तकलीफ में है, तो उसे इतनी बड़ी परेशानियों में क्यों डाला जा रहा है और सेना जनता की तकलीफों के प्रति इतनी बेपरवाह क्यों है. उन्होंने कहा, “आप देश और जनता की परीक्षा क्यों ले रहे हैं? जब आपकी जनता परेशान है, तब आप मजे क्यों कर रहे हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “आज 2026 है. जब 1989 में अफगानिस्तान में क्रांति आई और युद्ध शुरू हुआ, अब आप मुझे बताइए, 45-46 साल हो गए हैं. लगभग आधी सदी से इसी इलाके में खून बह रहा है. जब इस तरह खून बहता रहता है, तो यह भौगोलिक बदलाव का संकेत होता है.” लगातार सरकारी अत्याचार और जारी संघर्ष से देश की एकता को खतरा बताते हुए रहमान ने कहा कि इससे इलाके के टूटने और सीमाओं में बदलाव की संभावना पैदा हो सकती है.

उन्होंने आगे कहा, “यह अत्याचार का संकेत है. कम से कम हमें अपने इरादों के बारे में बता दीजिए. हम इसे सह रहे हैं और आगे भी सहते रहेंगे. यह चलता रहेगा. मेरे प्यारे, कुछ और दिन, बस कुछ और दिन. हम अत्याचार की छाया में सांस लेने के लिए मजबूर हैं. अगर हम थोड़े समय और इस अत्याचार को सह लें, अगर हम तकलीफ सहें, अगर हम रोएं, तो यह हमारे पूर्वजों की विरासत है. हम मजबूर हैं.”

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