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सेना के दम पर ईरान को झुकाना मुश्किल... यूएस से जारी तनाव के बीच अराघची का बड़ा बयान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि वे मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान में मदद के लिए चीन सहित किसी भी तरह के समर्थन के लिए तैयार हैं. हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे.

सेना के दम पर ईरान को झुकाना मुश्किल... यूएस से जारी तनाव के बीच अराघची का बड़ा बयान
ईरान के विदेश मंत्री ब्रिक्स की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए हुए हैं.
  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति जटिल है और ईरान सभी जहाजों की सुरक्षा में मदद के लिए तैयार है
  • ईरान ने स्पष्ट किया कि उसने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा व्यक्त नहीं की है

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्हें अमेरिका से संदेश मिला है. संदेश में बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है. अराघची ने भारतीय राजधानी में पत्रकारों से कहा, "कुछ दिन पहले जब ट्रंप ने ट्वीट किया था कि यह अस्वीकार्य है, तब यह कहा गया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव या अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अस्वीकार कर दिया है. लेकिन उसके बाद हमें अमेरिकियों से फिर से संदेश मिले हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे बातचीत जारी रखने और संवाद स्थापित करने के लिए तैयार हैं."

परमाणु हथियारों पर भी बता दी स्थिति

अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत के माध्यम से समाधान के अलावा कोई और रास्ता नहीं हो सकता. होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति इस समय बेहद जटिल है. हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए तैयार हैं. सिर्फ उन देशों के जहाजों को दिक्कत है, जो ईरान से युद्ध में हैं. ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहे हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में विश्वास की कमी आ रही है. ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा नहीं करने के सभी कारण हैं. अमेरिकियों के पास ईरान पर भरोसा करने के सभी कारण हैं. ईरान से संबंधित किसी भी समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि सेना के दम पर ईरान को झुकाना मुश्किल है. पाकिस्तान की मध्यस्थता अभी तक विफल नहीं हुई है.

चीन और भारत की भूमिका पर ये बोले 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि वे मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान में मदद के लिए चीन सहित किसी भी तरह के समर्थन के लिए तैयार हैं. उन्होंने भारत की राजधानी में पत्रकारों से कहा, जहां वे ब्रिक्स देशों के समूह की बैठक में शामिल हुए थे, “हम किसी भी ऐसे देश की सराहना करते हैं जो मदद करने में सक्षम हो, विशेषकर चीन की. चीन के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं, हम एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं, और हम जानते हैं कि चीन की मंशा अच्छी है, इसलिए कूटनीति में मदद के लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी प्रयास इस्लामी गणराज्य द्वारा स्वागत योग्य होगा.”हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे.

भारत से रिश्तों पर की बात

शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श किया, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और पारस्परिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया. यह विचार-विमर्श कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद हुआ, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के दौरान बहुपक्षीय स्थिरता को मजबूत करना था. अराघची ने बताया कि नई दिल्ली के साथ हुई चर्चा में गहरी रणनीतिक सहमति झलकती है, और उन्होंने कहा कि दोनों देशों के "विचार समान हैं", "चिंताएं एक जैसी हैं" और "हित एक जैसे हैं". उन्होंने कंफर्म किया कि जहाजों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए तेहरान भारतीय समकक्षों के साथ निकट समन्वय बनाए रखेगा, और इस साझा आशा को व्यक्त किया कि "आक्रामकता समाप्त होने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी".

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