PM Modi UAE Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे. यहां पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और रक्षा से उर्जा तक, कई अहम समझौते किए. पीएम मोदी ने यहां द्विपक्षीय वार्ता से पहले अपना ओपनिंग रिमार्क दिया और कहा कि भारत UAE पर हुए हमलों की निंदा करता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़ा रहेगा. पीएम मोदी ने यहां होर्मुज को जल्द से जल्द खोले जाने पर जोर दिया और यह बात भी दोहराई की भारत शांति का पक्षधर है. खास बात थी कि UAE के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां के F-16 लड़ाकू विमानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान को एस्कॉर्ट भी किया. अबू धाबी पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
Sharing my remarks during meeting with my brother, His Highness Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan. @MohamedBinZayed https://t.co/j1hoGlPDib
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
भारत-UAE बैठक में बड़े फैसले, रक्षा से ऊर्जा तक कई अहम समझौते
- भारत और UAE के बीच स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप यानी रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर समझौता हुआ.
- भारत और UAE ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी रणनीतिक तेल भंडार को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए.
- लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ.
- गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया गया.
- भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की गई.
बता दें कि यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है और पिछले 25 वर्षों में कुल मिलाकर निवेश का सातवां सबसे बड़ा सोर्स है. इसके अलावा UAE में 45 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं. वे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं. वे भारत में बड़ी मात्रा में पैसा भी भेजते हैं. यह मानवीय रिश्ता दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाता है. UAE में स्थिरता का सीधा असर भारतीय परिवारों और भारत के विदेशी मुद्रा प्रवाह पर पड़ता है.
बता दें कि पीएम मोदी शुक्रवार को अपनी पांच देशों की यात्रा के लिए रवाना हुआ हैं. पहला पड़ाव UAE है. 15 से 20 मई तक चलने वाले इस दौरे में वह संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे. इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, नवाचार और हरित विकास जैसे क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है. साथ ही यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाना भी इसका मकसद है.
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