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iPhone, बाज का पंख, व्हेल की हड्डी... अमेरिका के 'टाइम कैप्सूल' में क्या-क्या है, जो 250 साल के लिए हो गया दफन

अमेरिका ने आजादी के 250 साल पूरे होने पर एक 'टाइम कैप्सूल' दफन कर दिया गया है, जिसे अब 250 साल बाद यानी 2276 में निकाला जाएगा.

iPhone, बाज का पंख, व्हेल की हड्डी... अमेरिका के 'टाइम कैप्सूल' में क्या-क्या है, जो 250 साल के लिए हो गया दफन
250वें स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिका ने टाइम कैप्सूल जमीन में दबा दिया.

अमेरिका ने 4 जुलाई को अपना 250वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. इस मौके पर एक 'टाइम कैप्सूल' को दफनाया गया है, जिसे अब 250 साल बाद यानी 4 जुलाई 2276 को निकाला जाएगा. ये तारीख इसलिए चुनी गई है, क्योंकि तब अमेरिका की आजादी को 500 साल हो जाएंगे. 

इस 'टाइम कैप्सूल' को 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस हिस्टोरिकल पार्क में गहरे गड्ढे के अंदर दफनाया गया है.

इस कैप्सूल में अमेरिका के सभी 50 राज्यों और 6 केंद्र शासित से यादगार चीजों को इकट्ठा किया गया है. इस 'टाइम कैप्सूल' को इसलिए दफनाया गया है, ताकि आज से 250 साल बाद जब इसे निकाला जाए तो उस समय के लोगों को अमेरिकी इतिहास और आज के दौर की चीजों के बारे में पता चल सके. 

क्या-क्या है इस कैप्सूल में?

अमेरिका के इस टाइम कैप्सूल में कई सारी चीजों को रखा गया है. कई राज्यों ने अपना झंडा और सिक्के दिए हैं, जिन्हें कैप्सूल में रखा है.

इस कैप्सूल में लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस का एक मॉलिक्यूलर डेटा स्टोरेज डिवाइस, 2026 की रोज परेड के दौरान पकड़ा गया अमेरिका झंडा और तकनीकी इनोवेशन को दिखाने के लिए iPhone 17 Pro Max को रखा गया है. इसमें कोका-कोला की एक कांच की बोतल भी रखी गई है. कैप्सूल में Claude AI Prediction वाली प्रॉम्प्ट का एक आर्काइव पेपर भी है. इसे इसलिए रखा गया है कि 250 साल बाद पता चल सके कि 2026 में AI आ गया था.

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Photo Credit: america250.org

खास चीजों में एक छोटी शीशी भी है, जिसमें सिंथेटिक DNA है. इस DNA में लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस के ऐतिहासिक कलेक्शन की चीजों की डिजिटल कॉपी एनकोड की गई है. इनमें थॉमस जेफरसन का 'डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस' का रफ ड्राफ्ट, फ्रांसिस स्कॉट के हाथ से लिखे 'द स्टार-स्पैंगल्ड बैनर' के बोल, जॉन फिलिप सूसा के बैंड का 1898 का एंथम का ऑडियो रिकॉर्डिंग, पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के हाथ की 3D रेंडरिंग और कई दुर्लभ चीजें शामिल हैं.

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इस कैप्सूल में 'ओल्ड एबे' नाम की उस बाल्ड ईगल का एक पंख भी रखा गया है, जिसने विस्कॉन्सिन के गृह युद्ध के दौरान कई लड़ाइयां लड़ी थीं. उसने 30 से ज्यादा लड़ाइयों में हिस्सा लिया था और कई बार बाल-बाल बचा था. बाल्ड ईगल अमेरिका का राष्ट्रीय पक्षी भी है.

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इसके अलावा, इस कैप्सूल में व्हेल की हड्डी भी रखी गई है. यह वह व्हेल है, जो नॉर्थ अटलांटिक में पाई जाती है और जो इस समय सबसे ज्यादा खतरे में पड़ी प्रजातियों में से एक है. दुनिया में आज के समय सिर्फ 380 ही ऐसी व्हेल हैं.

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जमीन के अंदर खराब नहीं होगा?

नहीं. इस 'टाइम कैप्सूल' को इस तरह से बनाया गया है कि जमीन के अंदर रहने के बावजूद इस तक न तो पानी पहुंच सकेगा और न ही हवा.

इस कैप्सूल का वजन 408 किलो है. ये पूरी तरह से स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है. इस कैप्सूल के ऊपर इंडियम धातु से बनी सील लगी है, जो पानी और हवा को अंदर जाने से रोकती है. जमीन में गाड़ने के बाद इसे स्टील से बने लगभग 500 किलो के जार से ढक दिया गया है, ताकि 250 सालों तक अंदर रहने के बावजूद यह सूखा रहे.

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इसे बनाने वाले NIST के मैकेनिकल इंजीनियर जे नैनिंगा ने कहा, 'क्योंकि यह कैप्सूल जमीन के नीचे रहेगा, इसलिए इसे ऐसा होना चाहिए जिस पर जंग न लगे और जिससे गैस या पानी अंदर न जा सके.'

उन्होंने कहा कि 'दशकों तक चलने वाली सील बनाना एक बात है लेकिन 250 साल तक चलने वाली सील बनाना बिल्कुल अलग और मुश्किल काम है. हम सबसे अच्छे मटैरियल का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि जब 250 साल बाद इसे खोला जाए तो इसके अंदर की चीजें सूखी और सुरक्षित रहें.'

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भारत में भी हुआ था ऐसा प्रयोग

जिस तरह से आज अमेरिका अपना 'टाइम कैप्सूल' जमीन के अंदर रखवा रहा है, ठीक वैसा ही भारत में भी हो चुका है. लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण 4 साल में ही इसे निकाल लिया गया था.

1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आजादी की 25वीं सालगिरह के मौके पर दिल्ली के लाल किले में 'काल पत्र' नाम का एक कैप्सूल जमीन में दबाया था.

स्टेनलेस स्टील से बने इस कैप्सूल में विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और राजनीति के क्षेत्रों में भारत की तरक्की से जुड़े दस्तावेज और सरकार के संदेश और रिकॉर्ड थे. इनमें लगभग 10 हजार शब्दों का एक दस्तावेज भी शामिल था. इसे जमीन में 32 फीट की गहराई पर दबाया गया था. 

इस कैप्सूल को जब जमीन के अंदर डाला गया तो माना गया कि इसे 1 हजार साल बाद निकाला जाएगा. हालांकि, इस पर काफी विवाद हो गया. विपक्षी नेताओं ने इंदिरा सरकार पर इतिहास को अपने ढंग से पेश करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. आखिरकार 1977 में जनता पार्टी की सरकार के समय इसे जमीन से निकाल लिया गया. हालांकि, इस कैप्सूल में क्या-क्या था? इस बारे में आजतक कोई जानकारी नहीं मिली है.

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