Railway Transfer Policy: रेलवे में काम करने वाले रेलकर्मियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. अपने घर, होमटाउन, राज्य से दूर नौकरी कर रहे रेलकर्मी अब अपने घर के करीब नौकरी कर सकते हैं. उनका ट्रांसफर ऐसी जगह हो सकता है, जो उनके घर के पास हो. या फिर ऐसी जगह, जहां वो वर्षों से जाना चाहते थे, वहीं उन्हें पोस्टिंग मिल सकती है. जी हां, रेलकर्मियों के लिए रेलवे बोर्ड ने ऑन-रिक्वेस्ट ट्रांसफर पॉलिसी में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. इसको लेकर रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों (GM) को पत्र भेजकर जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं. नई व्यवस्था के तहत हर महीने HRMS पोर्टल पर ट्रांसफर की योग्यता रखनेवाले कर्मचारियों की प्राथमिकता सूची जारी की जाएगी.
पूर्व मध्य रेलवे में 23 साल से कार्यरत एक अनुभवी रेलकर्मी ने बताया कि देशभर में हजारों ऐसे रेल कर्मचारी हैं जो 20-22 साल या उससे ज्यादा भी, अपने घर से काफी दूर सेवा देने के बावजूद अपने घर के पास यानी गृह मंडल में ट्रांसफर का इंतजार करते रहते हैं और रिटायर भी हो जाते हैं. एक उम्र के बाद रेलकर्मियों को भी घर के पास पोस्टिंग की जरूरत होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर वो घर पर भी समय बिता पाएं. रेलवे की इस पॉलिसी में बदलाव का उद्देश्य ऐसे कर्मियों को राहत देना है.
किन रेलकर्मियों को मिलेगा मनचाहा ट्रांसफर?
रेलवे ने दूर-दराज क्षेत्रों में वर्षों से काम कर रहे वैसे रेलकर्मियों के लिए ऑनरिक्वेस्ट ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया है जो 20 साल या उससे ज्यादा सेवा पूरी कर चुके हैं. यानी कम से कम 20 साल सर्विस कर चुके अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया है.
रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य लंबे समय से अपने गृह मंडल या घर-परिवार के पास ट्रांसफर का इंतजार कर रहे रेल कर्मचारियों को राहत देना है. रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर संजय कुमार ने सभी जोन के GMs को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश दिए हैं.

ट्रांसफर के लिए HRMS पोर्टल पर जारी होगी लिस्ट!
नई व्यवस्था के तहत HRMS पोर्टल यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम वेबसाइट पर हर महीने, 20 वर्ष+ सेवा दे चुके कर्मचारियों की अलग प्राथमिकता सूची जारी की जाएगी. इस लिस्ट में सबसे ज्यादा सर्विस कर चुके रेलकर्मी को सबसे पहले ट्रांसफर का मौका दिया जाएगा.
नए सिस्टम की खासियत ये भी है कि ट्रांसफर स्वीकृत (Accept) होने के बाद किसी तरह के NOC यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी. HRMS के माध्यम से ही ऑटोमैटिकली ट्रांसफर का आदेश जारी हो जाएगा.
ट्रांसफर ऑर्डर जारी होते ही 15 दिन में रिलीविंग
पॉलिसी में बदलाव को लेकर बताया जा रहा है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर संबंधित रेलकर्मी की रिलीविंग यानी उन्हें कार्यमुक्त करना जरूरी होगा.
बहुत जरूरी हुआ तो भी विशेष परिस्थिति में कर्मचारी को एक महीने से ज्यादा समय तक नहीं रोका जा सकेगा और उन्हें रोकने के लिए भी संबंधित DRM यानी मंडल के रेल प्रबंधक की स्वीकृति चाहिए होगी.
रेलवे कर्मचारी संगठनों ने बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है. बताया गया कि ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव की अधिसूचना, जारी होने के 2 महीने बाद से HRMS पोर्टल पर प्रभावी होगी.
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