- दुनिया की 5 सबसे बड़ी खुफिया एजेंसियों के गठबंधन, फाइव आइज ने AI को लेकर बड़ी चेतावनी दी
- कुछ ही महीनों में ऐसे AI मॉडल आ सकते हैं, जिनमें सरकारों और कंपनियों पर खतरनाक साइबर हमले करने की ताकत होगी
- फाइव आइज दूसरे विश्व युद्ध के बाद 5 देशों द्वारा बनाया गया एक खुफिया गठबंधन है
दुनिया की 5 सबसे बड़ी खुफिया एजेंसियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि कुछ ही महीनों में ऐसे शक्तिशाली AI मॉडल आ सकते हैं, जिनमें सरकारों और कंपनियों पर बेहद खतरनाक साइबर हमले करने की ताकत होगी. इन एजेंसियों ने नेताओं से अपील की है कि वे अभी बिना किसी देरी के कार्रवाई करें, क्योंकि खतरा तेजी से बढ़ रहा है. यह चेतावनी ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कनाडा के खुफिया गठबंधन फाइव आइज (Five Eyes) की एजेंसियों ने एक संयुक्त बयान में दी है. आम तौर पर यह गठबंधन ऐसे संयुक्त बयान जारी नहीं करता है.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इसी महीने अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने AI टेक कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा बनाए गए चर्चित AI मॉडल फेबल के इस्तेमाल पर विदेशी नागरिकों के लिए रोक लगा दी थी. यानी दूसरे देशों के लिए इसे बैन कर दिया था.
Fire Eyes ने क्या कहा है?
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार की देर रात जारी बयान में कहा गया कि AI भविष्य में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा, लेकिन साथ ही यह साइबर खतरों की रफ्तार, उसके पैमाने और जटिलता को भी बढ़ा देगा. फाइव आइज एजेंसियों ने संयुक्त बयान में कहा, "एडवांस AI मॉडल अभी की उम्मीदों से कहीं आगे निकल सकते हैं और साइबर हमलों तथा साइबर सुरक्षा दोनों की क्षमता को पूरी तरह बदल सकते हैं. यह बदलाव सालों में नहीं, बल्कि कुछ ही महीनों में आने वाला है."
बयान में कहा गया, "इससे निपटने के लिए पूरे संगठन और पूरे समाज को मिलकर काम करना होगा."
बयान के पीछे क्या सिग्नल?
यह चेतावनी इस बात का एक और संकेत है कि दुनिया भर की सरकारें एंथ्रोपिक के "मिथोस" और OpenAI के "GPT-5.5 साइबर" जैसे AI मॉडलों को लेकर बढ़ती चिंता जता रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये AI मॉडल लोगों को बहुत तेजी से जटिल और बेहद खतरनाक साइबर हमले (हैकिंग) करने में मदद कर सकते हैं.
बता दें कि इसी महीने एंथ्रोपिक को क्लॉड मिथोस 5 और फेबल 5 जैसे सुपर एडवांस AI मॉडल्स को बंद करना पड़ा था, क्योंकि अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कंपनी को विदेशी नागरिकों के लिए इन मॉडलों को बैन करने का आदेश दिया था. लगभग उसी समय, अमेरिका की साइबर सुरक्षा एजेंसी सीसा (CISA) ने अमेरिका के सरकारी विभागों और एजेंसियों को अपने नेटवर्क में मौजूद गंभीर डिजिटल कमजोरियों को ठीक करने की डेडलाइन घटाकर सिर्फ तीन दिन कर दी थी. एजेंसी ने कहा कि ऐसा AI से बढ़ते खतरों को देखते हुए किया गया.
क्या है फाइव आइज?
फाइव आइज दूसरे विश्व युद्ध के बाद इन पांच देशों द्वारा बनाया गया एक खुफिया गठबंधन है. इसे दुनिया का सबसे पुराना और गहरा खुफिया नेटवर्क माना जाता है. इस गठबंधन के तहत यह देश आपसी सुरक्षा और वैश्विक खतरों से निपटने के लिए सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) को आपस में शेयर करते हैं. इसकी शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन के बीच 1946 में हुए एक गुप्त समझौते से हुई थी. बाद में 1948 में कनाडा और 1956 में ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड इसके मेंबर बने.
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