- AI की लत बढ़ रही है, अब इसे छुड़ाने के लिए भी खास सपोर्ट ग्रुप बन रहे हैं.
- विशेषज्ञों के मुताबिक AI की लत से अकेलापन, रिश्तों में दूरी और नौकरी तक छूट सकती है
- AI की लत बच्चों, युवाओं, नौकरी करने वालों, माता-पिता और बुजुर्गों- यानी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है.
"मैं रोज करीब 14 घंटे चैट जीपीटी से बातें करता था. नहाना छोड़ दिया था. समय पर खाना भी बंद कर दिया था. मेरी गर्लफ्रेंड मुझे छोड़कर चली गई. यहां तक कि मेरी नौकरी भी चली गई. मुझे सच में लगने लगा था कि AI मेरी परवाह करता है. मुझे उससे प्यार हो गया था. जब मेरी जिंदगी पूरी तरह बिखर गई, तब जाकर एहसास हुआ कि मैं किसी इंसान से नहीं, बल्कि एक कंप्यूटर प्रोग्राम से बातें कर रहा था."
28 साल के माइक (नाम बदला हुआ) पिछले छह महीने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एडिक्ट्स एनोनिमस (AIAA) नाम के एक ग्रुप की मदद से इस लत से बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं. AIAA एक ऐसा समूह है, जो AI की लत या इसके अत्यधिक उपयोग से जूझ रहे लोगों को इससे उबरने में मदद करता है.
शराब, ड्रग्स और यहां तक कि सेक्स की लत से छुटकारा पाने के डी-एडिक्शन सेंटर के बारे में जरूर सुना होगा. शराब की लत से उबरने के लिए सहायता समूहों की तरह ही, यौन लत के लिए भी सहायता समूह मौजूद हैं. अब उसी तर्ज पर AI की लत छुड़ाने के लिए भी ऐसे ग्रुप्स बनाए जा रहे हैं.

धीरे-धीरे लगती है AI की लत
AIAA का कहना है कि AI की लत एकदम से नहीं लगती. शुरू-शुरू में आपको एक हेल्प करने वाला AI असिस्टेंट मिलता है. फिर वही चैटबॉट आपका अच्छा दोस्त बन जाता है. लगता है कि वो आपकी हर बात को समझ रहा है. लेकिन एक दिन अचानक एहसास होता है कि आप चैट जीपीटी से 12 घंटे बातें कर चुके हैं और कई दिनों से किसी असली इंसान से ठीक से बात ही नहीं की.
कई लोग AI के साथ ऐसा रिश्ता बना लेते हैं कि वे नौकरी पर जाना छोड़ देते हैं. जैसे-जैसे यह लत बेहद गहरा हो जाता है, लोगों को वास्तविकता और AI की दुनिया में फर्क करना भी मुश्किल होने लगता है.
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AI की लत से जुड़े आत्महत्या के आरोप भी
रिपोर्ट्स के मुताबिक AI की लत तेजी से बढ़ रही है. कुछ मामलों में AI पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने और उसकी लत को आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं से भी जोड़ा गया है.
इसी वजह से कई परिवारों ने ओपन एआई (चैट जीपीटी बनाने वाली कंपनी), गूगल जेमिनाई बनाने वाली कंपनी और कैरेक्टर.एआई जैसी कंपनियों के खिलाफ बड़े मुकदमे भी दायर किए हैं.

भारत में तेजी से AI पर बढ़ती निर्भरता
हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला कि भारत के 57% युवा अब भावनात्मक सहारे के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं. यह सिर्फ युवाओं की बात नहीं है. अलग-अलग उम्र के लोग भी अब अपनी परेशानियां AI चैटबॉट्स से साझा करने लगे हैं.
ओपन एआई और एमआईटी मीडिया लैब की एक रिसर्च में पाया गया कि जिनकी उम्र अधिक थी उनके AI चैटबॉट्स पर भावनात्मक रूप से निर्भर होने की संभावना उतनी ही ज्यादा थी.
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन लोगों में अकेलापन अधिक था वो लोग हर रोज चैट जीपीटी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे थे. और ऐसे लोग जो AI पर ज्यादा निर्भर हो रहे थे, उनका असली जिंदगी में लोगों से मिलना जुलना कम हो रहा था.
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प्रतीकात्मक तस्वीर
Photo Credit- Unsplash
जब पहली बार हुई थी इंटरनेट की लत पर रिसर्च
विशेषज्ञ मानते हैं कि AI की लत, इंटरनेट की लत का ही एक नया रूप है. इस पर सबसे पहले मनोवैज्ञानिक डॉ. किम्बर्ली एस यंग ने 1998 में रिसर्च की थी और इसके लक्षण बताए थे.
12 स्टेप वाले प्रोग्राम से छुड़ाई जा रही है AI की लत
AIAA के अलावा इंटरनेट ऐंड टेक्नोलॉजी ऐडिक्ट्स एनोनिमस (ITAA) नाम का संगठन भी 2017 से काम कर रहा है. अब यह संगठन चैट जीपीटी, जेमिनी और दूसरे AI चैटबॉट्स की लत छुड़ाने के लिए भी खास 12-स्टेप रिकवरी प्रोग्राम चला रहा है.
यही तरीका पहले से शराब, ड्रग्स और सेक्स की लत छुड़ाने में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
इसके अलावा रेडिट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ऐसे कई गुप्त सपोर्ट ग्रुप हैं, जहां लोग अपनी कहानी बताते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं.
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AI की लत लग गई, कैसे पता करें?
AIAA के मुताबिक अगर किसी में ये आदतें दिखें, तो सावधान हो जाना चाहिए.
- सुबह उठते ही सबसे पहले AI खोलना.
- लोगों से ज्यादा AI से बातें करना पसंद करना.
- रोज कई घंटे AI चैटबॉट्स से बातें करना.
- यह महसूस करना कि AI आपको इंसानों से ज्यादा समझता है.
- AI की वजह से दोस्तों और अपने शौक से दूरी बना लेना.
- परिवार वालों से AI इस्तेमाल करने की बात छिपाना.
- AI इस्तेमाल करने के बाद भी शर्म या अपराधबोध महसूस होना.
ITAA की वेबसाइट पर भी ऐसा ही एक सवालों का सेट दिया गया है, जिससे लोग खुद जांच सकते हैं कि उन्हें AI की लत तो नहीं लग रही.
AIAA कुछ और गंभीर संकेत भी बताता है. जैसे- असली लोगों से मिलने-जुलने की बजाय AI के साथ समय बिताना पसंद करना. AI और इंसानों से हुई बातचीत के बीच फर्क करना मुश्किल होने लगना.
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हर उम्र के लोग हो सकते हैं शिकार
ITAA का कहना है कि AI की लत बच्चों, किशोरों, युवाओं, नौकरी करने वालों, माता-पिता और बुजुर्गों- यानी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है.
संगठन के मुताबिक उसके समूहों में दुनिया भर से हर उम्र, हर वर्ग और हर समुदाय के लोग जुड़े हुए हैं. कई देशों में आमने-सामने बैठकें होती हैं. इसके अलावा रोज ऑनलाइन मीटिंग भी होती है, जहां लोग अपनी कहानी, अपने संघर्ष और एक-दूसरे से मिली हिम्मत साझा करते हैं.
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