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IIM लखनऊ की स्टडी में बड़ा खुलासा, एआई ऐप्स कर सकते हैं आपकी जिंदगी तबाह

Psychological Side Effects of AI Apps : IIM Lucknow की एक स्टडी में पाया गया कि कई यूजर्स इन ऐप्स पर इमोशनली बहुत ज्यादा निर्भर हो रहे हैं. इससे उनकी मेंटल हेल्थ और वास्तविक जीवन के रिश्तों पर खराब असर पड़ सकता है.

IIM लखनऊ की स्टडी में बड़ा खुलासा, एआई ऐप्स कर सकते हैं आपकी जिंदगी तबाह
स्टडी में कहा गया है कि AI ऐप्स को सामान्य AI टूल्स से अलग कैटेगरी में देखा जाना चाहिए.

Psychological Side Effects of AI Apps : मौजूदा दौर में AI ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसी बीच इसके गंभीर नुकसान भी सामने आने लगे हैं. हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM Lucknow) की एक नई स्टडी ने AI ऐप्स को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. स्टडी में पाया गया कि कई यूजर्स इन ऐप्स पर इमोशनली बहुत ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, जिससे मेंटल हेल्थ और वास्तविक जीवन के रिश्तों पर खराब असर पड़ सकता है. यह स्टडी “Are AI Companions Real Companions? A BERT-Based Study of Replika Reviews” नाम से पब्लिश हुई है, जिसे प्रो. प्रदीप कुमार और रिसर्चर चित्रा गौतम ने तैयार किया है.

सामने आईं कई गंभीर बातें 

इस स्टडी में रिसर्चर्स ने 1.57 लाख से ज्यादा यूजर रिव्यूज को एनालाइज किया है. इसमें कई तरह की समस्याएं सामने आईं, जिनमें शामिल हैं - 

  • टेक्निकल ग्लिच और ऐप की समस्याएं
  • सब्सक्रिप्शन और पेवॉल से जुड़ी फाइनेंशियल परेशानी
  • AI का अनुचित या परेशान करने वाला व्यवहार
  • प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़े जोखिम
  • वास्तविक रिश्तों पर असर और सामाजिक दूरी
  • मानसिक और व्यवहारिक समस्याएं, जैसे लत और इमोशनल निर्भरता
टेक्नोलॉजी पैराडॉक्स

स्टडी में एक दिलचस्प पैटर्न भी सामने आया, जिसे “टेक्नोलॉजी पैराडॉक्स” कहा गया है. कई यूजर्स ने ऐप को हानिकारक बताते हुए भी उसे अच्छी रेटिंग दी है. प्रो. प्रदीप कुमार के अनुसार, कई लोग AI चैटबॉट्स पर इमोशनली निर्भर होने लगे हैं, जिससे उनका रियल दुनिया से संपर्क कम हो रहा है.

मेंटल हेल्थ पर असर 

रिसर्चर्स ने कहा कि कुछ यूजर्स AI ऐप्स को इमोशनल बैलेंस के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आगे चलकर मेंटल हेल्थ के लिए दिक्कतें पैदा कर सकता है. चित्रा गौतम ने सुझाव दिया कि इन प्लेटफॉर्म्स में ऐसे सुरक्षा उपाय होने चाहिए, जो इमोशनल निर्भरता को बढ़ने से रोकें.

स्टडी में कहा गया है कि AI ऐप्स को सामान्य AI टूल्स से अलग कैटेगरी में देखा जाना चाहिए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो, यह सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर डाल सकता है.

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