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This Article is From Aug 16, 2025

ट्रंप-पुतिन वार्ता के बाद जेलेंस्की ने रखीं शांति के लिए सख्त शर्तें, यूरोपीय नेता भी सपोर्ट में उतरे

जेलेंस्की ने साफ किया है कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्ध रोकने को राजी होंगे. क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे. उधर, यूरोपीय देशों ने भी यूक्रेन के सपोर्ट में सामने आकर अपनी शर्तें बताई हैं.

ट्रंप-पुतिन वार्ता के बाद जेलेंस्की ने रखीं शांति के लिए सख्त शर्तें, यूरोपीय नेता भी सपोर्ट में उतरे
  • ट्रंप-पुतिन की वार्ता बिना नतीजे के खत्म होने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का बयान सामने आया है.
  • जेलेंस्की ने ट्रंप से मुलाकात से पहले साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्ध रोकने को राजी होंगे.
  • यूरोपीय देशों ने भी साझा बयान जारी करके यूक्रेन का समर्थन जारी रखने का संकल्प दोहराया है.
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ट्रंप-पुतिन की बहुचर्चित वार्ता बिना ठोस नतीजे के खत्म होने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की पुष्टि करते हुए साफ कर दिया कि वह अपनी शर्तों पर ही युद्ध रोकने को राजी होंगे. उन्होंने अपनी शर्तें भी स्पष्ट कर दी हैं. कहा है कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा. इस बीच यूरोपीय देशों ने भी यूक्रेन के समर्थन में साझा बयान जारी करके अपनी शर्तें बताई हैं.

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ट्रंप-जेलेंस्की बैठक सोमवार को

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अलास्का वार्ता के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मेरी लंबी, सार्थक बातचीत हुई. ट्रंप ने समिट के बारे में बताया और यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी को लेकर बातचीत की. इसके बाद जेलेंस्की ने एक बयान में बताया कि ट्रंप से बातचीत के बाद उनकी यूरोपीय नेताओं से बातचीत हुई है. हमारी शर्त साफ है कि शांति स्थायी होनी चाहिए, जो लंबे समय तक चले. हमें रूसी हमले के बीच में अस्थायी विराम नहीं चाहिए. 

जेलेंस्की ने ये शर्तें सामने रखीं

  • दोनों तरफ से हत्याएं और हमले रुकने चाहिए. युद्ध के मैदान और हवाई हमले, खासकर बंदरगाहों पर हमले तत्काल बंद होने चाहिए. 
  • हजारों यूक्रेनी नागरिक रूस की कैद में हैं, जिन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. रूस ने जिन बच्चों को अगवा किया है, उनकी वापसी होनी चाहिए.
  • जेलेंस्की ने कहा कि रूस अगर आक्रामक हमला और जमीन कब्जाने का प्रयास जारी रखता है तो उसके ऊपर दबाव बनाए रखा जाना चाहिए. 
  • अगर त्रिपक्षीय बैठक नहीं होती या रूस ईमानदारी से युद्ध खत्म नहीं करता तो उस पर प्रतिबंधों को सख्त किया जाए. इनका फायदा मिल रहा है. 
  • यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा की विश्वसनीय गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए. अमेरिका के साथ यूरोप को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. 
  • यूक्रेन से संबंधित सभी मुद्दों, खासकर क्षेत्र संबंधी मामलों पर कोई भी फैसला बिना यूक्रेन की भागीदारी के नहीं लिया जाना चाहिए.
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यूरोपीय नेता सपोर्ट में उतरे

जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने हमारी स्थिति को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण बयान दिया है. उधर यूरोपीय नेताओं ने शनिवार को साझा बयान जारी करके यूक्रेन का समर्थन जारी रखने और युद्ध खत्म होने तक रूस पर दबाव बनाए रखने का संकल्प दोहराया. 

इन नेताओं का साझा बयान

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर आदि कई नेताओं ने साझा बयान में यूक्रेन युद्ध रोकने के ट्रंप के प्रयासों की सराहना की. इस बयान पर फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेग्जेंडर स्टब, पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क, यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय यूनियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भी दस्तखत हैं. 

'वार्ता में यूक्रेन को रखें, सुरक्षा दें'

साझा बयान में कहा गया है कि ट्रंप को अब जेलेंस्की से मुलाकात करके त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की संभावना पर काम करना चाहिए. नेताओं ने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की मजबूत गारंटी मिलनी चाहिए. अमेरिका और इच्छुक देशों का गठबंधन इसमें सहयोग करेगा. 

'रूस को वीटो से रोकें' 

उन्होंने ये भी कहा कि यूक्रेन की सेना पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए. उसे तीसरे देशों से सहयोग लेने से नहीं रोका जाना चाहिए. इसके अलावा यूक्रेन के यूरोपीय संघ और नाटो में शामिल होने पर रूस को वीटो का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए. 

'यूक्रेन को मिले फैसले का हक'

यूरोपीय नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को जोर-जबर्दस्ती से बदला नहीं जा सकता. ऐसे में यूक्रेन को अपने इलाकों के बारे में फैसला करने का अधिकार मिलना चाहिए. जब तक रूस यूक्रेन में हत्याएं रोककर शांति के लिए राजी नहीं होता, उस पर प्रतिबंध और आर्थिक दबाव बनाए रखा जाना चाहिए. 

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