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उत्तराखंड: नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा करने वाले निहंग छत से उतरे, आपसी बातचीत से बनी बात

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में निहंग सिखों के हंगामे के बाद हालात अब सामान्य हो गए हैं. छत पर चढ़े निहंग बातचीत के बाद नीचे उतर आए. विवाद के दौरान मारपीट और तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन की समझाइश से मामला सुलझ गया.

उत्तराखंड: नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा करने वाले निहंग छत से उतरे, आपसी बातचीत से बनी बात

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में चार दिनों से चला हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया. छत पर डटे निहंग सिख बातचीत के बाद नीचे उतर आए और फिर बुलेट मोटरसाइकिलों पर सवार होकर हाथों में भाले लहराते हुए वहां से निकल गए. इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में कई दिनों तक तनाव का माहौल बनाए रखा, लेकिन अंत में संवाद के जरिए मामला सुलझ गया.

रोहित डिमरी की रिपोर्ट...

मंगलवार दोपहर बाद का नजारा लोगों के लिए चौंकाने वाला था. कई दिनों से गुरुद्वारे की छत पर डटे निहंग सिख अचानक नीचे उतरे. इसके बाद वे बुलेट मोटरसाइकिलों पर सवार होकर धार्मिक जयकारों के साथ भाले लहराते हुए परिसर से बाहर निकल गए. इस दौरान मौके पर मौजूद लोग पूरे घटनाक्रम को देखते रहे.

चार दिन तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम

नगरासू गुरुद्वारा पिछले चार दिनों से तनाव का केंद्र बना हुआ था. करीब 96 घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन के सामने स्थिति संभालना बड़ी चुनौती बन गई थी. हालांकि पूरे समय प्रशासन ने संयम बनाए रखा और हालात को बिगड़ने नहीं दिया.

प्रशासन की रणनीति और सतर्कता

गुरुद्वारे की छत पर निहंग सिखों के डटे रहने से स्थिति संवेदनशील हो गई थी. इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस लगातार निगरानी बनाए हुए थे. रविवार को एक निहंग ने आत्मसमर्पण किया, जबकि सोमवार को एक और व्यक्ति को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया.

वार्ता से टूटा गतिरोध

मंगलवार को पंजाब और पांवटा साहिब से आए प्रतिनिधिमंडल ने गुरुद्वारा प्रबंधन और निहंग सिखों से बातचीत की. कई दौर की चर्चा के बाद आखिरकार सहमति बनी और छत पर मौजूद सभी निहंग नीचे उतर आए. इससे पूरे मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकल पाया.

प्रशासन ने बताया- हालात सामान्य

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि सभी निहंग सिख सुरक्षित नीचे उतर चुके हैं और उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इलाके में पूरी तरह शांति है और आगे पूरे मामले की जांच की जाएगी. 

गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग बनी वजह

दरअसल, यह पूरा विवाद कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ा है. 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में विवाद के बाद चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था. इन्हें छोड़ने की मांग को लेकर अन्य निहंग नगरासू गुरुद्वारे पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे.

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे निहंगों के पास भाला, तलवार, कुल्हाड़ी और कृपाण जैसे पारंपरिक हथियार मौजूद थे. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था और हालात काबू में रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे.

क्या था कर्णप्रयाग विवाद?

कर्णप्रयाग बाजार में निहंग सिखों का वाहन खड़ा करने को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था. आरोप है कि विवाद के दौरान तलवार से हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया. इस मामले में पंजाब के मोहाली के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया, जिसके विरोध में यह पूरा घटनाक्रम सामने आया.

गुरुद्वारे में ठहरने को लेकर विवाद

गुरुद्वारे के प्रबंधक बेअंत सिंह के मुताबिक, पंजाब से आए निहंगों ने 50 से 60 कमरों की व्यवस्था करने की मांग की थी, ताकि प्रदर्शनकारियों को ठहराया जा सके. जब प्रबंधन ने असमर्थता जताई तो निहंगों ने हंगामा शुरू कर दिया और बाद में छत पर चढ़ गए.

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