Haridwar Borewell Accident: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है. श्यामपुर थाना क्षेत्र के कांगड़ी गांव में बोरोवेल की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से 55 वर्षीय व्यक्ति मनोहर उसके अंदर दब गया. घटना के बाद मौके पर पहुंचे प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड के साथ NDRF और SDRF की टीमों ने करीब 10 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. मिट्टी के बार‑बार खिसकने और तकनीकी दिक्कतों के चलते बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. आखिरकार मनोहर को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
कांगड़ी गांव में हुआ हादसा
यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे हरिद्वार के श्यामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कांगड़ी गांव के गली नंबर‑6 में हुआ. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पानी के कुएं के लिए बोरोवेल की खुदाई की जा रही थी. खुदाई के दौरान अचानक ऊपर की कच्ची मिट्टी भरभरा कर गिर गई, जिससे 55 वर्षीय मनोहर उसमें दबते हुए बोरोवेल के भीतर फंस गया.
वाइब्रेशन बना हादसे की वजह
सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि बोरोवेल में पानी आने से ठीक पहले पाइप को ठोकने का काम चल रहा था. इसी दौरान तेज वाइब्रेशन (कंपन) हुआ, जिससे मिट्टी का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया. हादसे के वक्त दो लोग मौके पर मौजूद थे, जिनमें से एक सुरक्षित बाहर निकल आया, जबकि मनोहर मिट्टी के साथ अंदर ही फंस गया.

Haridwar Borewell Accident: हरिद्वार बोरोवेल हादसा
10 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पहले SDRF और बाद में NDRF की टीम को भी बुलाया गया. फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीमें भी रेस्क्यू में जुट गईं. लगातार ढीली मिट्टी गिरने के कारण ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आईं. जेसीबी मशीन से जब भी मिट्टी निकाली जाती, ऊपर से फिर मिट्टी गिर जाती, जिससे किसी बड़ी अनहोनी का खतरा बना रहा.

Haridwar Borewell Tragedy: रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीर
जेसीबी का तेल खत्म, हाथों से निकाली गई मिट्टी
रेस्क्यू के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब जेसीबी मशीन का तेल खत्म हो गया और बचाव कार्य कुछ समय के लिए बाधित हो गया. इसके बाद टीम ने हाथों से मिट्टी हटाने का प्रयास शुरू किया. बाद में स्थिति को देखते हुए पोकलैंड मशीन भी मंगवाई गई, ताकि मिट्टी को सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके.
लोगों का गुस्सा, हाईवे जाम
रेस्क्यू में लगातार देरी और मनोहर के बाहर न निकल पाने से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. गुस्साए लोगों ने कुछ देर के लिए हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया. मौके पर मौजूद पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया.
अस्पताल में मृत घोषित
करीब 10 घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने मनोहर को बाहर निकाल लिया. उसे बेसुध हालत में तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक मिट्टी दबने और ऑक्सीजन की कमी से उसकी मौत हो चुकी थी.
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
एसडीएम ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से रेस्क्यू अभियान पूरा किया गया. उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों और लापरवाही से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी. अनुमति और नियमों के उल्लंघन को लेकर भी जांच की जाएगी.
क्षेत्र में शोक का माहौल
इस दर्दनाक घटना के बाद कांगड़ी गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर है. लोग अब भी यह सवाल कर रहे हैं कि क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था और क्या इस हादसे को टाला जा सकता था. प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है.
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