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केदारनाथ में हार्ट अटैक से बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत, हेलीकॉप्टर के लिए 5 घंटे तक इंतजार

केदारनाथ दर्शन के लिए आए गुजरात के एक बुजुर्ग श्रद्धालु की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इसके बाद परिजनों को शव को गौरीकुंड ले जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा. परिजनों ने हेलीकॉप्टर व्यवस्था में देरी का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने अस्थायी हवाई सेवा निलंबन की वजह बताई.

केदारनाथ में हार्ट अटैक से बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत,  हेलीकॉप्टर के लिए 5 घंटे तक इंतजार
  • केदारनाथ में दिल का दौरा पड़ने से 69 वर्षीय गुजरात के श्रद्धालु दिलीप भाई माली का निधन हुआ
  • परिवार को शव को गौरीकुंड तक ले जाने के लिए पांच घंटे से अधिक समय तक प्रशासन से इंतजार करना पड़ा
  • हेलीकॉप्टर सेवा डीजीसीए के सुरक्षा निरीक्षण के कारण अस्थायी रूप से रुकी हुई थी, जिसके बाद सेवा शुरू हुई
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भगवान शिव के दर्शन के लिए उत्तराखंड के केदारनाथ आए गुजरात के एक बुजुर्ग श्रद्धालु का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, लेकिन दुख में डूबे उनके परिवार को शव को वहां से 10 मिनट की हवाई दूरी पर स्थित गौरीकुंड तक ले जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा. परिजनों ने दावा किया कि प्रशासन द्वारा शव को निशुल्क हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए गौरीकुंड के पास जामू हेलीपैड तक पहुंचाए जाने की व्यवस्था किए जाने से पहले उन्हें पांच घंटे से भी अधिक समय तक केदारनाथ में इंतजार करना पड़ा.

दिल का दौरा पड़ते ही पीएचसी ले जाया गया

गुजरात के वडोदरा से आए 69 वर्षीय दिलीप भाई मन्नू माली अपने बेटे हेमंत तथा अन्य परिजनों के साथ बाबा केदारनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही वह व्हाइट हाउस क्षेत्र में अचानक बेहोश हो गए. हेमंत ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि बेहोश होने के बाद उनके पिता को केदारनाथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया जहां सुबह साढ़े सात बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाने के बावजूद परिवार घंटों तक वहीं फंसा रहा.

शव ले जाने के लिए घंटों इंतजार

हेमंत ने कहा, ‘‘हमने जिलाधिकारी से पिता का शव ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जिसके लिए उन्होंने आश्वासन भी दिया, लेकिन दोपहर एक बजे हेलीकॉप्टर का इंतजाम हो पाया.'' हेमंत ने बताया कि दिलीप भाई के शव और उन्हें निशुल्क हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए जामू तक पहुंचाया गया जबकि समूह में शामिल चार अन्य लोग अपने खर्च पर घोड़ों के जरिए गौरीकुंड तक पहुंचे. हेमंत ने बताया कि रुद्रप्रयाग से वडोदरा स्थित पैतृक निवास तक शव को ले जाने के लिए उन्हें निजी एंबुलेंस को 53 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा.

हेलीकॉप्टर मिलने में देरी, परिवार ने उठाए सवाल

उधर, रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर सेवाओं के अस्थायी निलंबन के बावजूद राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए थे. प्रशासनिक उदासीनता के आरोपों का खंडन करते हुए केदारनाथ यात्रा के नोडल अधिकारी और उखीमठ के उप जिलाधिकारी अनिल सिंह रावत ने कहा कि उस समय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा सुरक्षा निरीक्षण प्रोटोकॉल के कारण हेलीकॉप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से रूकी हुई थीं. उन्होंने कहा, ‘‘उस समय कई कंपनियों के हेलीकॉप्टर की परीक्षण उड़ान संचालित हो रही थी। एनओसी मिलने के बाद केदारनाथ के लिए हवाई सेवाएं शुरू हुईं.''

DGCA जांच के चलते रुकी थीं हवाई सेवाएं

जिला प्रशासन ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है जिसमें कहा गया है कि श्रद्धालु के अचेत अवस्था में होने की सूचना मिलते ही 'सक्रियता एवं मानवीय संवेदनशीलता' से तत्काल राहत कार्य शुरू किया गया. बयान के अनुसार, ‘यात्रा प्रबंधन बल' के जवानों ने बिना समय गंवाए उक्त व्यक्ति को केदारनाथ पीएचसी पहुंचाया, जहां चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया. बयान के मुताबिक, इसके बाद बल के सहयोग से पार्थिव शरीर को केदारनाथ हेलीपैड पहुंचाया गया. हेलीकॉप्टर सेवा बहाल होते ही शव को जामू हेलीपैड ले जाया गया और वहां से शव वाहन के जरिये रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल पहुंचाया गया.

प्राथमिकता के बावजूद संसाधनों पर निर्भर व्यवस्था

पिछले साल उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी जिसमें हिमालयी तीर्थस्थल से मृत श्रद्धालुओं के हवाई परिवहन को प्राथमिकता दी गई है. रुद्रप्रयाग जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि ‘यात्रा प्रबंधन बल' योजना के तहत चिकित्सा आपात स्थितियों में हेलीकॉप्टर के उपयोग को प्राथमिकता दी जाती है और शव को ले जाना संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है. रुद्रप्रयाग प्रशासन की ओर से केदारनाथ की पैदल यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की गई है.

भारी भीड़ के बीच स्वास्थ्य जांच बेहद सीमित

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहले दिन बुधवार को जो 38,000 तीर्थयात्री भगवान केदार के दर्शनों के लिए पहुंचे, उनमें से केवल 424 ही इस जांच से गुजरे जो कुल तीर्थयात्रियों की संख्या का डेढ़ फीसदी भी नहीं है। इसके अलावा, जांच के बाद केवल पांच तीर्थयात्री ही यात्रा के लिए अयोग्य करार दिए गए. जिला प्रशासन का कहना है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष योजना बनाई गई है. हालांकि, पिता की मौत से आहत हेमंत ने कहा, ‘‘मैं अभी किसी को दोष नहीं देना चाहता, लेकिन उस भयावह घटना के दौरान हम कई घंटों तक बेसहारा महसूस करते रहे.''

रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिवार बुधवार देर रात निजी एम्बुलेंस से वडोदरा के लिए रवाना हो गया जिसके लिए बकौल हेमंत उन्हें 53,000 रुपये खर्च करने पड़े.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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