यमुना एक्सप्रेसवे के गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मथुरा जैसे जिलों के किसानों को जमीन अधिग्रहण पर बड़ी राहत मिली है. किसानों को 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए गांवों में कैंप लगाने का फैसला हुआ है.जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड का अधिग्रहण कर वाली सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड ने किसानों को मुआवजे के लिए यमुना अथॉरिटी (YEIDA) को 53 करोड़ की धनराशि सौंपी है. छह गांवों के 340 प्रभावित किसानों को ये मुआवजा मिलेगा. दूसरे जिलों को मिलाकर भूमि अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त मुआवजे की राशि 500 करोड़ रुपये के पार जाने की संभावना है.
ग्रेटर नोएडा के छह गांवों को फायदा
ग्रेटर नोएडा से जेवर टोल के बीच छह गांवों जगनपुर अफजलपुर, दनकौर, निलौनी शाहपुर, मिर्जापुर, सलारपुर, अच्छेजा बुजुर्ग के किसानों के बीच ये मुआवजा बांटा जाएगा. यीडा ने लाभार्थी किसानों की लिस्ट जारी की है. आपत्तियों का निपटारा होते ही गांवों में शिविर लगाकर भुगतान किया जाएगा.यह मामला ग्रेटर नोएडा से आगरा तक बने 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे के लिए 2012 में अधिग्रहीत भूमि से जुड़ा है. सपा सरकार ने किसानों को दो तिहाई अतिरिक्त मुआवजा देने का फैसला किया था.
आबादी के 7 फीसदी भूखंड की मांग
एक्सप्रेसवे से प्रभावित किसान भी अलग मुआवजे और 7 फीसदी विकसित भूखंड की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे.यमुना अथॉरिटी और जेपी इन्फ्राटेक के बीच मुआवजे को लेकर लंबे समय तक कानूनी विवाद हुआ था. एनसीएलटी ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेपी का टेकओवर करने वाली कंपनी सुरक्षा रियल्टी को किसानों को मुआवजे देने की जिम्मेदारी दी गई थी. एक्सप्रेसवे की जमीन के बदले किसानों को 591 करोड़ का एडिशनल मुआवजा दिया जाना है. यमुना अथॉरिटी को इसकी पहली किस्त मिली है.यह मुआवजा करीब 4500 किसानों को दिया जाएगा.
अलीगढ़, मथुरा-हाथरस तक असर
यमुना अथॉरिटी के सीईओ आरके सिंह ने अधिकारियों को इस बाबत दिशानिर्देश दिए हैं. नोएडा के गांवों के बाद अलीगढ़, मथुरा, हाथरस और आगरा जिलों के किसानों को अतिरिक्त मुआवजा बांटा जाएगा. कैंपों में रियल एस्टेट कंपनी और अथॉरिटी दोनों के अफसर मौजूद रहेंगे ताकि कागजी कार्रवाई में देरी न हो. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है. यमुना प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में योजित गजराज एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के केस का उल्लेख करते हुए अतिरिक्त मुआवजा देने की बात कही थी.
यमुना एक्सप्रेसवे टोल प्लाजा फ्री करने की मांग मानी
यमुना एक्सप्रेसवे टोल प्लाजा खासतौर पर जेवर, मांट और खंदौली टोल प्लाजा को लेकर भी आंदोलनरत रहे हैं. स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के लिए टोल टैक्स फ्री होने की मांग सबसे बड़ी है. एक्सप्रेसवे के लिए 70 से अधिक गांवों की 1600 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी. किसान संगठनों का कहना है कि NHAI नियमों के अनुसार, हर टोल प्लाजा की 15 किलोमीटर के दायरे में गांवों के लोगों को आईडी कार्ड के आधार पर एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री रास्ता मिलना चाहिए.
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सर्विस रोड बनाने की आवाज बुलंद की
यमुना विकास प्राधिकरण ने 17 सितंबर को ये मांग भी मान ली. हालांकि इसके लिए आधार कार्ड और आरसी जमा कर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. किसानों की यमुना एक्सप्रेसवे के समानांतर 60 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाने की मांग की है. सर्विस रोड न होने से किसानों को खेतों या दूसरे गांवों में जाने के लिए भी जबरन एक्सप्रेसवे पर चढ़कर टोल टैक्स चुकाना पड़ता है. नोएडा एयरपोर्ट के आसपास 50 किलोमीटर के दायरे को टोल टैक्स फ्री रखने की मांग भी शामिल है.
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