- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव समय पर न कराने पर जवाब मांगा है.
- संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्षों का होता है जो बढ़ाया नहीं जा सकता.
- यूपी सरकार पंचायत चुनाव की तारीखों की अधिसूचना जारी करने की अंतिम जिम्मेदार है, आयोग केवल परामर्श देता है.
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा कि पंचायत चुनाव समय सीमा के भीतर क्यों नहीं करवाए जा रहे हैं और क्या आयोग संविधान द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करा सकेगा या नहीं.
याचिका पर सुनवाई, समय सीमा को लेकर सवाल
मामला याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि संविधान का अनुच्छेद 243E पंचायतों के अधिकतम पांच साल के कार्यकाल का प्रावधान करता है. यह अवधि उनकी पहली बैठक की तारीख से शुरू होती है और इससे आगे नहीं बढ़ाई जा सकती. ऐसे में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना अनिवार्य है.
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निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार की भूमिका बताई
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12BB के अनुसार, पंचायत चुनाव की तारीखों की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. यह अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग से परामर्श लेने के बाद जारी की जाती है. यानी चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का अंतिम निर्णय यूपी सरकार के पास है.
हाईकोर्ट का सख्त रुख, 26 मई से पहले चुनाव कराना जरूरी
सभी पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 19 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार क्या राज्य निर्वाचन आयोग समय पर चुनाव कराने की स्थिति में है. यह स्पष्ट करना होगा. कोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले संपन्न कराना अनिवार्य है. इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 25 मार्च 2026 तय की गई है.
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क्यों जरूरी है समय पर चुनाव?
ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. इसी आधार पर पंचायत चुनावों को अप्रैल से जून 2026 के बीच कराने का प्रस्ताव रखा गया है.
क्या मई-जून में मतदान संभव?
हाईकोर्ट की टिप्पणी और पंचायतों के कार्यकाल की समय सीमा को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यूपी में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया मई-जून में ही पूरी करानी पड़ेगी. अब नजर 25 मार्च की अगली सुनवाई पर है, जब सरकार और निर्वाचन आयोग को अपनी स्थिति साफ करनी होगी.
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