विज्ञापन

क्यों दलितों की लामबंदी करने वाले चंद्रशेखर लेने लगे वीपी सिंह और बीपी मंडल का नाम?

सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भले ही मंडल के नाम पर पिछड़ों को साथ लाने की जुगत में लगे हों, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं.

क्यों दलितों की लामबंदी करने वाले चंद्रशेखर लेने लगे वीपी सिंह और बीपी मंडल का नाम?
लखनऊ:

यूपी विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी दलितों और ओबीसी को एक साथ लाकर एक नया समीकरण साधने की कोशिश में है. आसपा ने मंडल आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने की मांग करके पिछड़ी जातियों को साथ लाने का फार्मूला शुरू किया है. पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के साथ साथ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को भारत रत्न देने की मांग उठाई है.लखनऊ के इको गार्डन में मंडल दिवस के आयोजन के मौके पर आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि बीपी मंडल के नेतृत्व वाले आयोग की सिफारिशों को सिर्फ़ 27 प्रतिशत आरक्षण तक सीमित कर दिया गया जबकि आयोग ने कुल 40 सिफ़ारिशें दी थीं। 

चंद्रशेखर ने न्यायपालिका में भी एससी-एसटी और ओबीसी को आरक्षण देने की मांग की है. इसके साथ ही प्राइवेट सेक्टर में मिलने वाली नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था लागू करने की बात कही. मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद यूपी की राजनीति में जिस तरह का बदलाव देखा गया, चंद्रशेखर कहीं ना कहीं मंडल के नाम से एक नया समीकरण साधने की कोशिश में लगे हैं. चंद्रशेखर की राजनीति का दायरा पश्चिमी यूपी के दलित वोट बैंक तक सीमित माना जाता है. अब वो ना सिर्फ बीएसपी के दलित वोटों में सेंधमारी कर बीएसपी का विकल्प बनने का प्रयास कर रहे हैं बल्कि पिछड़ों को साथ लाकर एक ऐसा वोट बैंक लाना चाहते हैं, जिसे हराना संभव ना लगे. 

दलित और पिछड़ों की राजनीति की बात करें तो इसे एक साथ लाना लगभग नामुमकिन सा है. दलितों के बीच मौजूद कई जातियां ही पहले से बंटी हुई हैं और अगर पिछड़ों में देखा जाए तो पिछड़ों की जातियां तो क्षेत्र के हिसाब से बंटी हुई हैं. पिछड़ों को भी तीन हिस्सों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें पिछड़े, अति पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोग हैं. ऐसे में पूरी तरह तो सबको साथ लाना असंभव सा है, लेकिन अगर मंडल के नाम पर पिछड़ों का एक हिस्सा भी जुड़ जाए तो आसपा की क़िस्मत बदल सकती है.

बात करें मंडल आयोग की सिफारिशों की तो मोरारजी सरकार में गठित बीपी मंडल आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रिपोर्ट सौंपी थी. इंदिरा गांधी ने इस रिपोर्ट को लागू नहीं कियाय इसके बाद साल 1990 में जब यूपी में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था, तभी तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने इस रिपोर्ट की दो सिफारिशों को लागू कर दिया. इन दो सिफारिशों में सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के प्रावधान शामिल थे. इस रिपोर्ट के लागू होने के बाद पिछड़ों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिला. मंडल आयोग ने कुल 40 सिफारिशें अपनी रिपोर्ट में पेश की थीं. 

मंडल आयोग की सिफारिशों में क्या-क्या था

इनमें प्रमुख तौर पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण के अलावा सरकार से वित्तीय सहायता पाने वाले निजी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था, पिछड़ों के लिए भूमि सुधार कानून लागू कर उन्हें ज़मीन का टुकड़ा दिलाना, एससी-एसटी की तरह रोस्टर के आधार पर सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देना शामिल है. इसके अतिरिक्त ओबीसी की पढ़ाई के लिए पैसों की व्यवस्था, पिछड़ों के लिए हॉस्टल, तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षण संस्थानों में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण, कौशल आधारित जातियों को व्यापार बढ़ाने के लिए लाभ देना आदि प्रमुख है.

ओबीसी कोटा लागू कर खुद हार गए थे वीपी सिंह

पिछड़ों को आरक्षण देने की सिफारिश करने वाली मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह क्षत्रिय थे. उन्होंने पिछड़ो को आरक्षण का फ़ायदा दिया. 1990 के दशक में उनकी ख़ुद की जाति ने उनका विरोध किया था. उनकी सरकार जाने के पीछे भी मंडल आयोग की रिपोर्ट को माना जाता है. पिछड़े जरूर वीपी सिंह की तारीफ़ करते हैं, लेकिन मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने का खामियाजा भी सबसे अधिक वीपी सिंह को ही उठाना पड़ा. ऐसे में मंडल आयोग की अन्य सिफारिशों को कोई सरकार लागू, करेगी, ये बड़ा सवाल है.

क्यों मंडल के नाम पर पिछड़ों को साध पाना आसान नहीं

आसपा के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भले ही मंडल के नाम पर पिछड़ों को साथ लाने की जुगत में लगे हों, लेकिन यूपी की राजनीति में मंडल के नाम पर पिछड़ो को साध पाना आसान नहीं है. वर्तमान में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी, अपना दल और राष्ट्रीय लोकदल जैसे दलों को जाति विशेष की पार्टी माना जाता है. ऐसे में सिर्फ मंडल का नाम पिछड़ों को एक साथ ला सकता है, ये कहना जल्दबाजी होगी. फ़िलहाल चंद्रशेखर इस अभेद्य को भेदने की कोशिश में जुटे दिखाई दे रहे हैं, देखना होगा इसका नतीजा क्या होता है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Chandrashekhar Azad, Chandrashekhar Azad News, Chandrashekhar Azad News In Hindi, Chandrashekhar Azad News Today, India News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com