नीट पेपर लीक को लेकर सीबीआई ने बड़े खुलासे किए हैं. एजेंसी की जांच में पता चलता है कि NTA के केमिस्ट्री एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी की इसमें बड़ी भूमिका थी. उन्होंने गोपनीयता की शपथ लेने के बाद भी छात्रों की स्पेशल क्लास ली और इस दौरान उन्हें पेपर के बारे में बताया. सीबीआई जांच में पता चला है कि कुलकर्णी ने परीक्षा से ठीक पहले 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे और लातूर में स्पेशल क्लास ली. जांच के मुताबिक पुणे में 9 और लातूर में 3 छात्रों को पढ़ाया गया. CBI का दावा है कि इन्हीं छात्रों तक लीक हुआ केमिस्ट्री पेपर पहुंचाया गया. सीबीआई ने MyGate ऐप के एंट्री रिकॉर्ड और मोबाइल CDR का मिलान किया है.
दोनों से छात्रों के कुलकर्णी के घर आने-जाने और स्पेशल क्लास में शामिल होने की पुष्टि होने का दावा किया गया है. इसके अलावा छात्रों के हाथ से लिखे नोट्स लीक हुए प्रश्नपत्र से मेल खाते मिले. जांच एजेंसी का कहना है कि ये नोट्स कुलकर्णी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किए गए थे. कुलकर्णी के मोबाइल से केमिस्ट्री प्रश्नपत्र और आंसर स्लिप की 9 तस्वीरें मिलीं, जो NEET-UG 2026 के पेपर से मेल खाती हैं. मोबाइल में अभ्यर्थियों, उनके माता-पिता और अन्य आरोपियों से बातचीत के सबूत भी मिले हैं. परीक्षा के बाद एक अभ्यर्थी की मां ने खुश होकर कुलकर्णी को घड़ी गिफ्ट करने की बात भी कही थी.
जांच के मुताबिक कुलकर्णी ने 25 अप्रैल को स्पेशल क्लास नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था. इसमें छात्रों के नाम और उनसे ली गई रकम का भी रिकॉर्ड मिला. पैसे सीधे कुलकर्णी या मनीषा वाघमारे के जरिए लिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि कुलकर्णी ने फिजिक्स का पेपर हासिल करने की भी कोशिश की थी. सीबीआई का दावा है कि NTA की फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा हवलदार ने गोपनीयता की शपथ के बावजूद 25,000 रुपये लेकर एक अभ्यर्थी की मां को फिजिक्स के सवाल लीक किए. परीक्षा से 8 दिन पहले मनीषा हवलदार के मोबाइल में हाथ से लिखे लीक प्रश्न मिले.
उन्होंने ये सवाल आरोपी तेजस शाह को डिक्टेट किए थे. RCC कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने छात्रों में यही लीक पेपर मोस्ट एक्सपेक्टेड बताकर बांटा. फिर परीक्षा के बाद छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि RCC का मॉक टेस्ट ही असली NEET पेपर निकला. सीबीआई के अनुसार परीक्षा से एक रात पहले 40-50 हॉस्टल छात्रों के बीच लीक प्रश्नपत्र की PDF भी शेयर की गई. CBI के अनुसार पेपर लीक की तैयारी 2025 के आखिर से ही शुरू हो गई थी. अक्टूबर 2025 से कुछ अभिभावकों से संपर्क किया गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि मोटी रकम देने पर NEET-UG के सवाल पहले ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे. इस मामले में शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये नकद लिए गए. इसके बाद अप्रैल 2026 में फिर अलग-अलग किस्तों में नकद और ऑनलाइन भुगतान कराया गया. जांच में कई बैंक ट्रांजैक्शन और कैश भुगतान के सबूत मिलने का दावा किया गया है.
वॉट्सऐप पर बना स्पेशल क्लास ग्रुप
जांच में सामने आया कि 25 अप्रैल को कुलकर्णी ने स्पेशल क्लास नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था. इसमें छात्रों के नाम, फीस और क्लास का पूरा रिकॉर्ड था. छात्रों से पैसे सीधे कुलकर्णी या उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के जरिए लिए गए. सीबीआई का यह भी दावा है कि कुलकर्णी फिजिक्स का पेपर हासिल करने की कोशिश भी कर रहे थे. सीबीआई के मुताबिक NTA की फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार पर भी पेपर लीक का आरोप है. जांच में दावा किया गया है कि उन्होंने फिजिक्स के सवाल हाथ से लिखकर मनीषा गुरुनाथ मंडहरे को वॉट्सऐप पर भेजे। कुछ सवाल तेजस शाह से भी लिखवाए गए. 14 अप्रैल को तेजस शाह ने मनीषा हवलदार के बताए सवाल अपनी नोटबुक में लिखे. परीक्षा से आठ दिन पहले तक हवलदार के मोबाइल में हाथ से लिखे हुए प्रश्न मौजूद थे. CBI के अनुसार जैसे ही मीडिया में पेपर लीक की खबरें आईं, मनीषा हवलदार ने अपनी रसोई में वह नोटबुक जला दी. जिसमें सवाल और हिंट्स लिखे थे. तेजस शाह ने भी पूछताछ में माना कि उसने अपने नोट्स नष्ट कर दिए थे.
बायोलॉजी के सवाल किताबों में छिपाए गए
जांच के अनुसार आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंडहरे ने छात्रों को सीधे प्रश्नपत्र देने के बजाय नई NCERT किताबों में खास पैराग्राफ मार्क करवाए. उन्होंने छात्रों से किताबों के किनारों पर सवाल लिखवाए. इसके बाद में उन्हीं नोटबुक की जांच की. जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने फिजिक्स के हस्तलिखित सवालों के प्रिंट भी निकलवाए. CBI के अनुसार मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी थीं. उन्होंने अभिभावकों से संपर्क किया, उन्हें ऑफलाइन पेपर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया और प्रति छात्र लगभग 4 लाख रुपये की डील की. उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासें आयोजित कराईं. कैश और बैंक ट्रांसफर से पैसे लिए और परीक्षा से पहले फिजिक्स के सवाल वॉट्सऐप पर भेजे. यहां तक कि छात्रों की नोटबुक भी अपने पास रख ली गईं.
तीन दिन पहले शुरू हुआ डिजिटल पेपर लीक
CBI के मुताबिक 29 अप्रैल यानी परीक्षा से तीन दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी सबसे पहले टेलीग्राम पर शेयर हुई. आरोपी ऋषि बिवाल ने इसे अपने रूममेट आदित्य मीणा को भेजा. जांच में आरोप है कि वह प्रति छात्र 10 से 12 लाख रुपये मांग रहा था. जो ज्यादा छात्र लाता, उसे मुफ्त में पेपर दिया जाता. इसके बाद 13 मई को गिरफ्तार किए गए मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल के मोबाइल की फोरेंसिक जांच में यही फाइलें बरामद हुईं. 2 मई को सीकर स्थित आर.के. एजुकेशनल कंसल्टेंसी में ब्लूटूथ से लीक PDF ट्रांसफर करने की कोशिश की गई लेकिन वह असफल रही. इसके बाद ऑफिस के डेस्कटॉप में वॉट्सऐप वेब लॉगिन किया गया। PDF वहां डाउनलोड की गई और फिर अलग-अलग लोगों को भेजी गई. ऑफिस कर्मचारी अभिषेक सैनी ने फाइल डिलीट करने के बजाय अपने मोबाइल में सेव कर ली और अपने दोस्त सचिन ढांगर को भेज दी.
कैसे फैलती चली गई हल प्रश्न पत्र की पीडीएफ
इसके बाद यही PDF अलग-अलग लोगों के जरिए कई राज्यों में फैल गई. लक्षय राज ने इसे अपने हॉस्टल रूममेट हितेश कुमार को भेजा. हितेश ने अपने पिता राकेश स्वामी को भेजा. इसी दौरान राजत चौधरी ने 30 हजार रुपये फोन पे से ट्रांसफर किए और बदले में लगभग 450 हल किए हुए सवालों की पीडीएफ हासिल की. उसने यह पीडीएफ अपने भाई, जो NEET अभ्यर्थी था, को परीक्षा से एक रात पहले भेज दी. CBI का दावा है कि RCC कोचिंग सेंटर के 40 से 50 हॉस्टल छात्रों तक भी यही पीडीएफ पहुंची. जांच के मुताबिक RCC कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने छात्रों से कहा कि यही मोस्ट एक्सपेक्टेड सवाल हैं. फिर 3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि RCC का मॉक टेस्ट ही असली NEET प्रश्नपत्र निकला.
पेपर तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स की नहीं होती थी सही से जांच
सीबीआई जांच में सामने आया कि NTA ने अपने मास्टर सेट को कैलाश और शिवालिक जैसे कोडनेम दिए थे. वहीं आरोपियों ने NEET 2026 और FIFA World Cup 2026 नाम से वॉट्सऐप ग्रुप बनाए. एक आरोपी का नंबर AP Broker नाम से सेव किया गया था. बाद में उसने दावा किया कि उसका मोबाइल बाइक चलाते समय गिरकर खो गया. CBI का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की न तो ठीक से तलाशी ली जाती थी और न ही उनके आने-जाने की कड़ी निगरानी होती थी. कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में CCTV की लाइव मॉनिटरिंग नहीं थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी लापरवाही का फायदा उठाकर सवाल बाहर निकाले गए. CBI के मुताबिक दिल्ली यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने लीक दस्तावेजों और असली प्रश्नपत्रों का मिलान किया. बायोलॉजी के कई सेट में 80 से 93 प्रतिशत तक सवाल एक जैसे पाए गए. केमिस्ट्री में कई मास्टर सेट के 45 में से 45 सवाल हूबहू मिले. एक आरोपी के मोबाइल से मिले 132 हस्तलिखित केमिस्ट्री सवालों में से 111 सवाल NTA के आधिकारिक प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए.
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