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200 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद, कब्जा हटाओ अभियान पर भड़के रहवासी 

वाराणसी के अस्सी घाट स्थित 200 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया है. मंदिर ट्रस्ट के सौंदर्यकरण अभियान के तहत अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होने पर दशकों से रह रहे परिवारों ने विरोध प्रदर्शन किया.

200 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद, कब्जा हटाओ अभियान पर भड़के रहवासी 

वाराणसी के अस्सी घाट के पास स्थित करीब 200 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर इन दिनों विवादों के केंद्र में आ गया है. जहां एक ओर मंदिर ट्रस्ट इसे भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सौंदर्यकरण की योजना पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वहां दशकों से रह रहे लोग इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. ट्रस्ट द्वारा अवैध कब्जा हटाने के नाम पर चलाए जा रहे अभियान ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है.

सौंदर्यकरण के नाम पर शुरू हुआ अभियान

जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर परिसर को पहले की तुलना में बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए सौंदर्यकरण जरूरी है. इसी योजना के तहत वहां वर्षों से रह रहे लोगों को हटाया जा रहा है. ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा हो गया था, जिसे खाली कराना जरूरी है ताकि धार्मिक स्थल का विकास किया जा सके.

दशकों से रह रहे परिवारों का विरोध

वहीं दूसरी ओर, करीब दो दर्जन परिवार इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं और कई लोग मंदिर से जुड़े कार्य भी करते रहे हैं. अचानक बेदखल किए जाने से उनका आशियाना और रोजी-रोटी दोनों खतरे में पड़ गए हैं. इसी वजह से उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया.

मंदिर की जमीन पर बढ़ते गए कब्जे

बताया जाता है कि अस्सी घाट के किनारे स्थित होने के कारण यह इलाका पहले उपेक्षित था. धीरे-धीरे यहां लोगों ने कब्जा करना शुरू किया और समय के साथ मकान और कुछ छोटे होटल भी बन गए. वर्षों तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह समस्या और बढ़ती चली गई.

बृजेश सिंह की नियुक्ति के बाद तेज हुई कार्रवाई

अवैध कब्जों को हटाने के लिए ट्रस्ट ने बाहुबली नेता बृजेश सिंह को अध्यक्ष बनाया. इसके बाद मंदिर के सौंदर्यकरण का काम तेजी से शुरू हुआ और कब्जा हटाने की कार्रवाई भी तेज कर दी गई. इसी के बाद से विवाद और गहरा गया है.

ब्राह्मणों और सेवायतों ने उठाए सवाल

मंदिर से जुड़े ब्राह्मणों और सेवायतों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है. उनका आरोप है कि बृजेश सिंह के नाम पर उन्हें जबरन बेदखल किया जा रहा है. उन्होंने मंदिर को उनके प्रभाव से मुक्त करने की मांग भी उठाई है और प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है.

ट्रस्ट का पक्ष- आरोप बेबुनियाद

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि असली पुजारियों और सेवायतों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है. उन्हें पुनर्स्थापित करने, आर्थिक मदद देने और उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है. ट्रस्ट का दावा है कि कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा किए हुए हैं और वे ही झूठे आरोप लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. 

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