- दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में उनके खिलाफ लगे तीनों आरोप सही साबित हुए.
- अब उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी है.
- संसद के शीतकालीन सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है.
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में उनके खिलाफ लगे तीनों आरोप सही साबित हुए. अब उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी है. सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संसद के शीतकालीन सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है. बताया तीन सदस्यीय जांच समिति में जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोप सही पाए गए हैं.
अब समिति ने आगे कार्रवाई की सिफारिश की है.
जस्टिस वर्मा अप्रैल में राष्ट्रपति को भेज चुके हैं इस्तीफा
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ का 1978 में दिया गया फैसला है कि जज का इस्तीफा देना ही उनका पद से हटना है, स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है. जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में इस्तीफ़ा राष्ट्रपति को भेज चुके हैं. इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की सूची में है.
ऐसे में यह बहस हो रही है कि जांच समिति की रिपोर्ट में उन्हें दोषी पाए जाने के बाद क्या उन्हें हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है. यह अपनी तरह का ऐसा पहला मामला है जब जज के इस्तीफा देने के बावजूद उनके खिलाफ जांच हुई और उनका नाम हाई कोर्ट के जजों की सूची में है.
महाभियोग प्रस्ताव के दौरान जज को मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका
- सूत्रों के मुताबिक जनता जानना चाहती है कि इतनी बड़ी संख्या में कैश उनके सरकारी घर पर कहां से आया? महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा.
- यह अपनी तरह का पहला मामला है जब इस्तीफा देने के बावजूद जज को पद पर रखा गया है और उनके खिलाफ जांच भी हुई है और अब हटाने का प्रस्ताव भी लाया जाएगा.
- सूत्रों के अनुसार जब पिछले साल मार्च में उनके घर से कैश मिला था तब उन्हें इस्तीफा देने को कहा गया था लेकिन तब उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.
जस्टिस यशवंत वर्मा पर तीन आरोप जो जांच में सही साबित हुए
पहला आरोप: राजधानी दिल्ली के 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवास के स्टोररूम से 500 रुपये के नोटों के बंडल बरामद बरामद हुए थे. कमेटी के मुताबिक, जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक सफाई नहीं दे सके. कमेटी ने इस आरोप को सही माना.
दूसरा आरोप: कमेटी ने पाया कि मामले से जुड़े सबूतों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया. कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है. बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने का भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिला. कमेटी ने इसे सबूतों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता माना. हालांकि, इससे ये साबित नहीं होता की जज ने खुद से नोट को हटाया.
तीसरा आरोप: कमेटी ने जज की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण, खासकर 22 मार्च 2025 के जवाब, को संतोषजनक नहीं माना. कमेटी के अनुसार, उनका रुख टालमटोल वाला रहा और वह संस्थागत जिम्मेदारी और अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं था. स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह आरोप भी सिद्ध पाया गया.
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