उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के प्रयास से एक भी परिवार आत्मनिर्भर बन जाता है तो यह गंगा या त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने से भी बड़ा पुण्य का काम है. उन्होंने कहा कि किसी परिवार को रोजगार दिलाना, उसकी आय बढ़ाना और उसे अपने पैरों पर खड़ा करना ही सच्ची समाज सेवा है. कानपुर के चुन्नीगंज स्थित एक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान राज्यपाल ने यह बात कही. यह पांच दिवसीय प्रदर्शनी ग्रामश्री और क्राफ्टरूट्स की ओर से आयोजित की गई है.
हस्तशिल्प से मजबूत होंगे लाखों परिवार
राज्यपाल ने कहा कि हस्तनिर्मित उत्पाद सिर्फ सामान नहीं होते बल्कि उनमें कारीगरों की मेहनत, अनुभव और पीढ़ियों से चली आ रही कला छिपी होती है. ऐसे में कारीगरों को बाजार, उचित दाम, प्रशिक्षण और पहचान दिलाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.
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उन्होंने कहा कि जब कारीगरों की आय बढ़ती है तो उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलती है. परिवारों को पौष्टिक भोजन और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं. इसका सबसे अधिक लाभ महिलाओं, बच्चों और गर्भवती माताओं को मिलता है.
22 राज्यों के 90 से ज्यादा कारीगर पहुंचे
प्रदर्शनी में देश के करीब 22 राज्यों से आए 90 से अधिक कारीगर अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश की बाघ प्रिंट कला और पश्चिम बंगाल की पटचित्र कला जैसी कई प्रसिद्ध हस्तकलाएं प्रदर्शित की गई हैं.
लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50 रुपये से शुरू होने वाले उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं. साथ ही पारंपरिक कलाओं का लाइव प्रदर्शन भी किया जा रहा है ताकि लोग कारीगरों के कौशल को करीब से देख सकें.
पारंपरिक कला को बचाने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि बदलते समय के साथ कारीगरों को अपने उत्पादों और डिजाइनों में भी नवाचार करना होगा. उन्होंने चिंता जताई कि कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं. ऐसे में इन कलाओं को संरक्षित करना बेहद जरूरी है.
उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से कारीगरों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया. उनका कहना था कि अनुभवी शिल्पकार छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दे सकते हैं और कार्यशालाओं के जरिए नई पीढ़ी तक यह ज्ञान पहुंचाया जा सकता है.
कारीगरों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश
आनंदीबेन पटेल ने कानपुर जिला प्रशासन को जिले के पारंपरिक कलाकारों और कारीगरों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पात्र कारीगरों को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए. साथ ही स्थानीय कलाकारों को प्रदर्शनी आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थान और जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए.
राज्यपाल ने उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम नागरिकों से अपील की कि वे उपहार देने सहित विभिन्न अवसरों पर स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दें. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का रास्ता स्थानीय कारीगरों और उनकी कला को मजबूत करने से होकर गुजरता है.
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