दिल्ली में बारिश भले ही न हो रही हो लेकिन इससे सटा उत्तर प्रदेश बाढ़ से जूझ रहा है. उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ की चपेट में है. अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ से करीब 13 हजार हेक्टेयर से ज्यादा का इलाका प्रभावित है. साथ ही बाढ़ से 84,352 लोग प्रभावित हैं.
बाढ़ प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं.
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. वाराणसी में गंगा उफान पर हैं और कई घाट डूब चुके हैं. पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण बिजनौर के मैदानी इलाकों पर बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. वहीं, बाराबंकी में भी घाघरा नदी में पानी लगातार बढ़ रहा है.
लगातार बारिश और बाढ़ ने हालातों को मुश्किल बना दिया है. गंगा-यमुना जैसी नदियां उफान पर हैं और इनमें जलस्तर बढ़ रहा है. प्रयागराज, वाराणसी, बिजनौर और बाराबंकी में कैसे हैं हालात? पढ़ें ये ग्राउंड रिपोर्ट.
प्रयागराज में हनुमान मंदिर तक पानी पहुंचा
संगम नगरी प्रयागराज में एक बार फिर गंगा और यमुना नदी का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है. पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है जिससे संगम के आसपास के इलाकों में पानी पहुंचना शुरू हो गया है.
कई तंबू, दुकानें और रास्ते डूब गए है और नाविकों और दुकानदारों को सुरक्षित स्थानों पर सामान शिफ्ट करना पड़ रहा है. जलस्तर बढ़ने से संगम स्थित लेटे बड़े हनुमान मंदिर के कॉरिडोर तक पानी पहुंच गया है. मान्यता है कि हर साल मां गंगा अपने पुत्र हनुमान जी को स्नान कराने जरूर आती है. हालांकि राहत की बात यह है कि अभी गंगा और यमुना दोनों ही नदियां खतरे के निशान यानी 84.734 मीटर से काफी नीचे बह रही हैं लेकिन जलस्तर में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी ने संगम के आसपास और तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें बढ़ा दी है.

पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है. सिंचाई विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में नदियों का जलस्तर तेजी से चढ़ा है जिसमें नैनी के यमुना नदी में जलस्तर 79.68 मीटर दर्ज किया गया है. पिछले 24 घंटों में इसमें 59 सेंटीमीटर की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है. क्षेत्र में 56.8 मिमी बारिश भी दर्ज की गई है. फाफामऊ में गंगा नदी का जलस्तर 80.31 मीटर तक पहुंच गया है जहां पिछले 24 घंटों में 36 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. इस इलाके में रिकॉर्ड 103.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है. इसके अलावा छतनाग के गंगा नदी में जलस्तर 79.31 मीटर रिकॉर्ड किया गया जहां बीते 24 घंटों में 57 सेंटीमीटर का उछाल आया है. यहां 73.6 मिमी बारिश हुई है.
प्रयागराज में बाढ़ के लिहाज से खतरे का निशान 84.734 मीटर तय किया गया है. वर्तमान स्थिति देखें तो नदियां अभी खतरे के बिंदु से लगभग चार से पांच मीटर नीचे बह रही हैं. प्रशासन की ओर से राहत की खबर यह भी है कि शहर के सभी बांध पूरी तरह सुरक्षित है और उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
निचले इलाकों में मुश्किलें बढ़ना तय!
भले ही नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हों लेकिन जलस्तर बढ़ने का असर संगम तट पर दिखने लगा है. संगम के आसपास स्थित अस्थायी दुकानें, तीर्थ पुरोहितों की तख्त-चौकी और छोटे-छोटे घाट पानी में समाने लगे है. पानी का बहाव जिस रफ्तार से हो रहा है उससे साफ है कि आने वाले दिनों में निचले और तटीय इलाकों जैसे बघाड़ा, दारागंज, सलोरी, और राजापुर के तटीय हिस्से में रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ना तय है.
यदि ऊपरी इलाकों से और पानी छोड़ा जाता है या बारिश इसी तरह जारी रहती है तो पानी रिहायशी निचले इलाकों में आ सकता है जिससे लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और तटवर्ती क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है. प्रशासन की तरफ से करीब सौ बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को अलर्ट मोड पर रखा गया है.

वहीं, प्रयागराज में शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बारिश और बांध से पानी छोड़े जाने से कहर बरपा हुआ है. कई जगह एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाल लिया है. एनडीआरएफ जहां बाढ़ प्रभावित घरों में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल रही है. शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर यमुनानगर जोन के कोरांव इलाके के कई गांव भी मध्य प्रदेश से पानी छोड़े जाने से बाढ़ की चपेट में आ गए है जिससे इन गांवों का सड़क मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है. कोरांव इलाके में भोगन और बेलन नदी के उफनाने से गांव का संपर्क कट गया है.
एनडीआरएफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के घरों में रह रहे लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील भी कर रही है. फिलहाल बाढ़ से अभी जनहानि की कोई खबर नहीं है.
वाराणसी: घाट डूबे, छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार
वाराणसी में गंगा लगातार उफान पर है. बढ़ते जलस्तर का असर अब घाटों पर साफ दिखाई दे रहा है. काशी के सारे घाटों की सीढ़ियां गंगा में समा चुकी हैं और घाटों का आपसी संपर्क भी प्रभावित हुआ है. शमशान घाट पूरी तरह डूब चुका है इसलिए अब शव दाह मणिकर्निका महाशमशान घाट की छत पर हो रहा है शव दाह और अंतिम संस्कार के लिए बने सभी प्लेटफार्म बाढ़ के पानी में डूब चुके है सुरक्षा को देखते हुए छोटी-बड़ी नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है.
वाराणसी का अस्सी घाट दूसरा बड़ा घाट है. यहां गंगा में नाव और क्रूज की सवारी काशी आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है. ऐसे में दूर-दराज से वाराणसी पहुंचे पर्यटक गंगा की सैर और घाटों का नजारा नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि अस्सी घाट की चंद सीढ़िया ही बची हैं बाढ़ के पानी से. इससे पर्यटको में मायूसी तो है लेकिन मां गंगा के प्रति आस्था के कारण लोग बाढ़ के पानी में ही स्नान कर रहे हैं.

वहीं, गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं. जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें गंगा में निगरानी कर रही हैं और लोगों को गहरे पानी में जाने से बचने की सलाह दी जा रही है. गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के साथ ही घाटों पर हालात लगातार बदल रहे हैं. ऐसे में काशी में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है.
बिजनौर में नदियां उफान पर
पहाड़ पर हो रही लगातार बारिश के चलते बिजनौर में नदियां उफान पर हैं खो नदी में लगभग इस साल का सबसे अधिक पानी बह रहा है जो कि लगभग 73000 क्यूसेक है. वहीं गंगा भी खतरे के निशान के आसपास बह रही है. पानी ज्यादा आने की वजह से कई गांव और फसलें भी प्रभावित हुई है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं