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बाराबंकी में सरयू का कहर: नदी में समाई 150 साल पुरानी मस्जिद और 35 मकान, मंदिर के मुहाने पर पहुंचा पानी- सदमे में ग्रामीण

बाराबंकी के रामनगर के हेतमापुर में सरयू नदी ने फिर कहर बरपाया है. तेज कटान से 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद और 35 मकान समा गए. जलस्तर खतरे से 40 सेमी ऊपर, 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम पर संकट मंडरा रहा है.

बाराबंकी में सरयू नदी का रौद्र रूप (Photo: NDTV)
बाराबंकी:

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में नेपाल से छोड़े गए पानी से उफनाई सरयू नदी ने एक हफ्ते तक शांत रहने के बाद फिर से रौद्र रूप धारण कर लिया है. बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर गांव में रविवार को तेज कटान के चलते करीब 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद और 35 मकान नदी में समा गए. अब करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम पर भी संकट मंडरा रहा है. धाम का भवन नदी की तेज कटान की चपेट में आने लगा है. सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. नदी का पानी और तेज कटान देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. कुछ परिवार अपने घरों की ईंटें और जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाते रहे. कई मकान कटे हुए किनारे पर खतरनाक स्थिति में लटके हुए हैं.

हेतमापुर के ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 18 दिन पहले भी नदी ने तबाही मचाई थी. उस दौरान करीब 35 मकान, दूरसंचार केंद्र और एक मंदिर नदी की धारा में समा गए थे. बाद में जलस्तर कम होने और कटान धीमा पड़ने से गांव वालों ने राहत की सांस ली, लेकिन अब दोबारा नदी का रुख बदलने से खतरा बढ़ गया है.

गांव वालों की दर्द भरी दास्तां...

मस्जिद के नदी में समाने से गांव के लोग दुखी हैं. हाफिज मोहम्मद शादाब ने कहा कि मस्जिद के नदी में समा जाने से सभी को बेहद दुख है. अब उनकी दुआ है कि प्राचीन बाबा नारायण दास धाम सुरक्षित बच जाए. 

वहीं, मोहम्मद सफीक ने बताया कि उनके परिवार में करीब 40 लोग हैं. घर और सामान नदी में समा गया. उन्होंने बताया कि वह मंदिर में प्रसाद और मिठाई बनाने का काम करते हैं और इसी से परिवार की रोजी-रोटी चलती है.

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कटान की चपेट में पशु का हॉस्पिटल भी आ गया है. उसकी बाउंड्रीवाल नदी में बह चुकी है और भवन भी कटान के मुहाने पर पहुंच गया है.
जानकारी मिलने पर एसपी अर्पित विजयवर्गीय, एडीएम निरंकार सिंह, एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता और बाढ़ खंड के अधिकारी शशिकांत सिंह सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा. बाबा नारायण दास धाम को बचाने की कोशिश की जा रही है. प्रशासन नदी के जलस्तर और कटान पर लगातार निगरानी कर रहा है. वहीं, नदी में करीब पौने पांच लाख क्यूसेक पानी और ज्यादा आने की जानकारी मिलने से आने वाले वक्त में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है.

कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी करीब डेढ़ सौ साल पुरानी मस्जिद आखिरकार तेज धारा की चपेट में आकर नदी में समा गई. वहीं, अब कटान करीब ग्यारह सौ पुराने बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है.

लगातार बारिश के चलते नदी का बहाव तेज हो गया है और किनारे की जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है. कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं.

ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटान की यही रफ्तार जारी रही तो बचे हुए घरों के साथ बाबा नारायण दास मंदिर को भी नुकसान पहुंच सकता है. कहा जाता है कि सरयू नदी कितनी भी बढ़ जाए लेकिन इसकी लहरें मंदिर को छूकर वापस चली जाती हैं लेकिन इस बार स्थित काी भयावह हो गयी है.

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