- UP विधानसभा चुनाव में पांच महीने बाकी रह गए हैं, जिसके लिए राजनीतिक दल जमीन पर तैयारियां तेज कर रहे हैं.
- बीजेपी ने 2027 मिशन के तहत चार मंडलों पर विशेष फोकस करते हुए रणनीति बनाकर कार्य शुरू किया है.
- आजमगढ़, अयोध्या, सहारनपुर और मुरादाबाद में पार्टी ने हार वाले इलाकों में सुधार पर ध्यान दिया है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग 5 महीने बचे हैं. 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा के चुनाव के लिहाज से ये वक़्त बहुत कम है. ऐसे में राजनीतिक दलों ने जमीन पर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. सत्ता में बैठी बीजेपी के सामने ना सिर्फ सत्ता बचाने की चुनौती है, बल्कि 2017 के प्रदर्शन को दोहरा कर ये संदेश देने की चुनौती भी है कि 10 सालों की सत्ता के बावजूद आम जनता में बीजेपी को लेकर नाराजगी नहीं है. इसी वजह से पार्टी आंकड़ों के आधार पर जमीन पर तैयारी के जुटी है.
चार मंडलों पर बीजेपी का फोकस
बीजेपी ने मिशन 2027 के लिए उन जिलों की सूची बनाकर प्लानिंग शुरू की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. पार्टी ने ऐसे चार मंडल पर ज़्यादा फोकस शुरू किया है, जहां उसे अपेक्षित जीत हासिल नहीं हुई थी. ये चार मंडल आजमगढ़, अयोध्या, सहारनपुर और मुरादाबाद हैं. बीजेपी नेतृत्व ने तय किया है कि इन चार मंडलों में आने वाली विधानसभा सीटों पर खास रणनीति के तहत काम किया जाएगा.
बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी ने इन चार मंडलों में आने वाले 16 जिलों की उन सीटों पर ख़ास रणनीति के तहत काम शुरू किया है, जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. पार्टी ने मंत्रियों, बड़े नेताओं, चर्चित चेहरों और संगठन से जुड़े लोगों के विशेष दौरे और प्रवास लगाने का फैसला किया है. पार्टी स्थानीय संगठन से वहां के मुद्दों, समस्याओं और पार्टी को लेकर उनके मत से जुड़ी जानकारी ले रही है. वर्तमान में चल रहे मुद्दों को लेकर जनता का रुख़ समझने की भी कोशिश की जा रही है.
अयोध्या मंडल में कुल पांच जिले हैं. इनके अयोध्या, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अमेठी ज़िले शामिल है. आज़मगढ़ मंडल में आज़मगढ़, बलिया और मऊ ज़िले आते हैं. मुरादाबाद मंडल में आने वाले ज़िलों में मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर और संभल हैं. इसी तरह सहारनपुर मंडल में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली ज़िले आते हैं. बीजेपी इन चार मंडलों में आने वाले 16 ज़िलों की स्थिति का आंकलन कर अपनी स्थिति ठीक करने पर फोकस कर रही है.
सपा गठबंधन ने 52 सीटों पर जीत हासिल की थी
साल 2022 में इन 16 ज़िलों पर अलग अलग सीटों की स्थिति पर नज़र डालें तो इन 16 ज़िलों के कुल 89 सीटें हैं. साल 2022 के आंकड़ें देखें तो तत्कालीन बीजेपी गठबंधन को 89 में से 36 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं, तब के सपा गठबंधन ने 52 सीटों पर जीत हासिल की थी. एक सीट पर बीएसपी को जीत मिली थी. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इन 16 जिलों में बिजनौर और अमरोहा को छोड़कर बाक़ी सभी सीटों पर सपा-कांग्रेस के गठबंधन ने जीत हासिल की थी.
बात करें गठबंधन की तो 2022 के विधानसभा चुनाव और अब के गठबंधन के स्वरूप में बहुत बदलाव आ चुका है. साल 2022 के सपा ने राष्ट्रीय लोकदल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था. अब ये दोनों दल बीजेपी के साथ सहयोगी दल के तौर पर सरकार में शामिल हैं. तब कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान बने इंडिया अलायन्स में सपा और कांग्रेस साथ आकर लोकसभा चुनाव लड़े और 80 में से 43 सीटों पर जीत गए.
कहां किसे कितनी सीटें मिली थी?
बीजेपी और सपा गठबंधन के प्रदर्शन को ज़िलों के आधार पर देखें तो पिछले विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की 10 में से सभी 10 सीटें सपा के खाते में गई थीं. बलिया में 7 में चार पर सपा, दो पर बीजेपी और एक पर बीएसपी को जीत मिली थी. मऊ की 4 में से एक पर बीजेपी और तीन पर सपा जीती. अयोध्या की पांच में सभी बीजेपी के खाते में गईं. अंबेडकरनगर में सभी पांच पर सपा ने बाज़ी मारी. बाराबंकी में लड़ाई बराबर की रही और सपा-बीजेपी ने तीन तीन सीटों पर विजय हासिल की. सुल्तानपुर में 5 में चार पर बीजेपी और एक सपा को मिली. अमेठी में 4 में लड़ाई बराबरी की रही. सपा-बीजेपी को दो दो सीटें मिलीं.
बिजनौर की 8 में भी सपा और बीजेपी में लड़ाई चार-चार सीटों के साथ बराबरी पर दिखी. अमरोहा में चार में दोनों दल दो दो पर जीते. मुरादाबाद में छह के से बीजेपी को दो और सपा को चार पर जीत मिली. रामपुर की 5 के सपा तीन और बीजेपी दो पर जीती. संभल की चार में से तीन पर सपा और एक पर बीजेपी को जीत मिली. मुजफ्फरनगर में छह के 2 पर बीजेपी और चार पर सपा रही. शामली में तीन की तीन सीटें सपा के खाते में गईं. सहारनपुर में 7 में बीजेपी 5 और सपा दो पर जीत पाई.
विधानसभा चुनाव में जिन जिलों में बीजेपी ने 2022 में बेहतर प्रदर्शन किया, उन जिलों में लोकसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा. अयोध्या की फैजाबाद लोकसभा जैसी सीट पर बीजेपी हार गई. इसी वजह से बीजेपी ने फोकस करके उन जिलों को चुना है जहां विधानसभा और लोकसभा चुनाव के उसका प्रदर्शन औसत से नीचे चला गया. फ़िलहाल बीजेपी की ये रणनीति कितनी कारगर साबित होगी ये वक़्त बताएगा लेकिन आंकड़े जुटाकर अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश में लगी बीजेपी अगले साल के विधानसभा चुनाव में हैट्रिक बनाने की जुगत में लग गई है.
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