इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक बार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से वैलिड ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट जारी हो जाने के बाद पासपोर्ट अथॉरिटी पासपोर्ट में बदलाव के लिए नए मेडिकल टेस्ट या एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट नहीं मांग सकती. हाईकोर्ट ने पासपोर्ट ऑफिस को ट्रांसजेंडर एप्लिकेंट से एक्स्ट्रा मेडिकल टेस्ट की मांग करने से रोक दिया और कहा कि पासपोर्ट में संशोधन के लिए ट्रांसजेंडरों से मेडिकल टेस्ट कराने की मांग संबंधित प्राधिकारी नहीं कर सकते. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही उनकी पहचान का निर्णायक प्रमाण है.
कोर्ट ने कहा कि स्पेशल एक्ट ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था जो अपने कंट्रोल से बाहर के हालात की वजह से ऐसे शरीर में पैदा हुए थे जो उनकी पहचान से मेल नहीं खाता था. ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार की वजह से पार्लियामेंट को स्पेशल कानून बनाना पड़ा. इस कानून के लागू होने से ट्रांसजेंडर लोग भी अब इज्ज़त और बराबरी के हकदार है. उन्हें अब अपनी पहचान छिपाने की ज़रूरत नहीं है जो उनकी पैदाइशी पर्सनैलिटी के खिलाफ है. इस बारे में सेक्शन 5 और 6 में बताया गया है कि वो किस तरह से ट्रांसजेंडर के तौर पर अपने स्टेटस को सही ठहरा सकते है.
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता एक लड़की के तौर पर पैदा हुआ हुई थी और बाद में उसके माता-पिता को पता चला कि बच्चा एक ट्रांसजेंडर है. याची ने ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स) एक्ट, 2019 के तहत अथॉरिटीज़ से संपर्क किया. इस एक्ट के जरूरी प्रोविज़न सेक्शन 5, 6 और 7 है. सेक्शन 5 में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को ट्रांसजेंडर व्यक्ति के तौर पर पहचान का सर्टिफिकेट जारी करने के लिए एक एप्लीकेशन देने का प्रोविज़न है. सेक्शन 6 में प्रोविज़न है कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ऐसे एप्लीकेंट को ट्रांसजेंडर व्यक्ति के तौर पर पहचान का सर्टिफिकेट जारी करेगा जिसके लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और ऐसे फॉर्म और तरीके से तय समय के अंदर जिसमें ऐसे व्यक्ति का ट्रांसजेंडर के तौर पर जेंडर बताया जाएगा. इन सेक्शन के दोनों प्रोविज़न पूरे हुए और उसके बाद बालिग होने पर याचिकाकर्ता ने जेंडर चेंज सर्जरी करवाई और पुरुष बन गया.
सुनवाई के दौरान कहा गया कि जिस ऑर्डर पर सवाल उठाया गया है वह स्पेशल एक्ट और स्पेशल एक्ट के तहत जारी सर्टिफिकेशन का उल्लंघन है. इस बारे में ट्रांसजेंडर स्पेशल एक्ट के मकसद और कारणों के स्टेटमेंट से क्लॉज (F) में पता चलता है कि कोई भी कंपनी नौकरी, भर्ती, प्रमोशन और दूसरे संबंधित मामलों में ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव नहीं करेगी. याची के वकील ने कहा है कि जिस ऑर्डर पर सवाल उठाया गया है वह स्पेशल कानून का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. इसके विपरीत प्रतिवादी के वकील ने कोर्ट में कहा कि पासपोर्ट अधिकारियों की मांग गलत नहीं है और याची को बर्थ सर्टिफिकेट में अपना नाम और जेंडर बदलना होगा ताकि पासपोर्ट में ज़रूरी बदलाव किया जा सके.
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कोर्ट प्रतिवादियों के वकील की आपत्तियों का कोई पक्का कानूनी आधार नहीं है. स्पेशल एक्ट ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था जो अपने कंट्रोल से बाहर के हालात की वजह से ऐसे शरीर में पैदा हुए थे जो उनकी पहचान से मेल नहीं खाता था. ऐसे लोगों के सामाजिक बहिष्कार की वजह से पार्लियामेंट को स्पेशल कानून बनाना पड़ा. इस कानून के लागू होने से ट्रांसजेंडर लोग भी अब इज्ज़त और बराबरी के हकदार हैं. उन्हें अब अपनी पहचान छिपाने की ज़रूरत नहीं है जो उनकी पैदाइशी पर्सनैलिटी के खिलाफ है. कोर्ट ने आधिकारिक दस्तावेज का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें राज्य अथवा राज्य की किसी इकाई के समक्ष पहचान के उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेज शामिल है. पासपोर्ट जारी करना भी राज्य का एक सार्वभौमिक कृत्य है.
कोर्ट ने आगे कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को मेडिकल सुपरिटेंडेंट या चीफ मेडिकल ऑफिसर से जारी सर्टिफिकेट के साथ एप्लीकेशन मिलने पर और यह पक्का होने के बाद कि उसमें दी गई डिटेल्स सही है जेंडर में बदलाव को बताने वाला सर्टिफिकेट ऐसे तरीके से और तय समय के अंदर जारी करना होता है. जेंडर में किया गया वह बदलाव याचिका के पेज पर है जो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का जारी किया गया पहचान पत्र है जिसमें याचिकाकर्ता का जेंडर 'पुरुष' दिखाया गया है. कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए आदेश दिया कि याची को पासपोर्ट प्राधिकारी के समक्ष कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने पासपोर्ट अथॉरिटी को याचिका में दिए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर कार्रवाई करने या पासपोर्ट जारी करने को कहा है. जहाँ तक याची की पहचान और जेंडर के प्रूफ़ की बात है किसी और डॉक्यूमेंट की ज़रूरत नहीं है.
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