Ghaziabad Child Girl Rape Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में 4 साल की बच्ची से रेप और हत्या मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआटी (SIT) को सौंप दी है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police DGP) के डीजीपी को एक SIT (विशेष जांच टीम) गठित करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की कार्यवाही एसआईटी की रिपोर्ट आने तक रोकने के लिए भी कहा है. इस दौरान कोर्ट ने मामले में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT में IG रैंक की एक महिला पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया जाएगा. साथ में SP और डिप्टी एसपी रैंक की एक महिला अधिकारी भी शामिल होंगी. कोर्ट के आदेश पर यह टीम गठन के अगले दिन से ही मामले की फिर जांच शुरू करेगी. यह टीम पीड़िता के माता-पिता की शिकायतों, गवाहों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करेगी.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि ट्रायल शुरू हो चुका है, लेकिन पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने जांच और अभियोजन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. इस दौरान कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट आने तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी.
सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणियां
- याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज पेश कर यह आरोप लगाया कि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आचरण संतोषजनक नहीं है.
- पीड़िता के माता-पिता लगातार डर में हैं और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है.
- अदालत ने कहा कि वह इन आरोपों (जिसमें निजी अस्पतालों की भूमिका भी शामिल है) पर कोई राय नहीं दे रही, लेकिन माता-पिता को पुलिस व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए.
- कोर्ट ने अपराध की प्रकृति को "बेहद क्रूर" बताया.
- ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि SIT की पूरक रिपोर्ट आने तक कार्यवाही रोक दी जाए.
- SIT को दो हफ्तों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी.
16 मार्च को हुई थी बच्ची से दरिंदगी, चॉकलेट के बहाने ले गया आरोपी
बता दें कि 16 मार्च को बच्ची के साथ दरिंदगी हुई थी और आरोपी कोई और नहीं पड़ोसी ही है. वह उसे कथित तौर पर चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था. काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश की तो पिता को बच्ची बेहोशी हालत में खून से लथपथ मिली. उसे गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था.
निर्भया जैसी दरिंदगी, इलाज भी नहीं मिला
बच्ची के मजदूर पिता की ओर से सीनियर एडवोकेट हरिहरन ने ये मुद्दा अदालत में उठाया. हरिहरन ने कहा कि खून से लथपथ बच्ची का वीडियो देखकर मेरा दिल कांप गया था. सीजेआई ने कहा कि इस घटना का सबसे शॉकिंग पहलू ये है कि दो प्राइवेट अस्पतालों ने बच्ची का इलाज करने से मना कर दिया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बताती है कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में कोई वस्तु डाली गई थी.
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