- प्रयागराज में सबसे बड़े अस्पताल का नाम बदलने को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है.
- स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का नाम ठाकुर रोशन सिंह करने की मांग तेज होती जा रही है.
- मंत्री ओमप्रकाश राजभर और बीजेपी उपाध्यक्ष पूजा पाल ने भी इस मांग का समर्थन किया है.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के सबसे बड़े अस्पताल स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का नाम बदलने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया है. आंदोलन करने वाले इस अस्पताल का नाम महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने को लेकर अनिश्चितकालीन धरना कर रहे हैं. इस आंदोलन को अब राजनैतिक समर्थन भी मिलने लगा है. यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर और प्रयागराज से आने वाली विधायक और बीजेपी की उपाध्यक्ष पूजा पाल ने नाम बदलने की मांग का समर्थन दिया है. उनका भी कहना है कि अस्पताल का नाम ठाकुर रौशन सिंह के नाम पर ही होना चाहिए.
9 अगस्त का दिन अहम
प्रयागराज के चले रहे इस अनशन का आयोजन महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में हो रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 9 अगस्त को काकोरी आंदोलन के सौ साल पूरे हो रहे हैं. ऐसे में ये सबसे सही वक्त है जब इस ऐतिहासिक इमारत जा नाम स्वरूपरानी के नाम से बदलकर आजादी के आंदोलनकारी ठाकुर रौशन सिंह के नाम से किया जाये. उनका कहना है कि काकोरी आंदोलन की 100वीं वर्षगांठ से पहले राष्ट्रीय सम्मान देते हुए इस अस्पताल का नाम बदला जाये. इसलिए यह मांग अब प्रयागराज में तेज होती जा रही है.
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ब्रिटिश कॉल में यह स्थान जेल था
प्रयागराज में स्थित स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल मोतीलाल नेहरू की पत्नी के नाम पर रखा गया था. जिस इमारत में ये अस्पताल बना है, वो आजादी से पहले एक जेल थी. इस जेल का नाम मलाका जेल था. इसकी स्थापना अंग्रेजों ने साल 1819 में की थी और इसका नाम मलाका जेल रखा गया था. यहां क्रांतिकारियों को कैद करने के अलावा उन्हें फांसी भी दी जाती थी. आज इस अस्पताल में जहां पोस्टमार्टम हाउस है वो अंग्रेजों के ज़माने में वह फांसी घर हुआ करता था.
काकोरी आंदोलन में शामिल थे ठाकुर रौशन सिंह
बात करें ठाकुर रौशन सिंह की तो शाहजहांपुर में जन्मे क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह लखनऊ के काकोरी आंदोलन में शामिल थे. ठाकुर रौशन सिंह को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें प्रयागराज की इसी मलाका जेल के फांसी घर में फांसी दी गई थी. आज भी स्वरूपरानी अस्पताल के मुख्य द्वार पर शहीद रोशन सिंह की एक प्रतिमा स्थापित है, जिसे साल 1972 में लगवाया गया था. आजादी के बाद मलाका जेल को सरकार ने सुधारगृह बना दिया. साल 1950 में मलाका जेल को प्रयागराज की नैनी में शिफ्ट कर दिया गया.
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