- नोएडा के सेक्टर 123 में मिलीभगत का ऐसे खेल का खुलासा हुआ है जिसे सुन दंग हो जाएंगे
- राधा कुंज कॉलोनी में यहां अवैध ट्रांसफॉर्मर के जरिए लोगों को दी जा रही थी बिजली
- सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाज बिजली विभाग ने लिया एक्शन, आरोपी फरार
नोएडा के सेक्टर 123 में बनी आलीशान इमारतों से होते हुए राधा कुंज कॉलोनी की ओर आप बढ़ेंगे तो आपको यहां अंधेरा ही अंधेरा दिखने को मिलेगा. दरअसल, यहां के हजारों मकानों में बिजली के कनेक्शन कटे हैं. किसी के घर के बाहर जनरेटर तो कहीं सोलर पैनल लगाकर पानी भर रहे हैं. पूरे इलाके की बिजली गुल है और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक परेशान. हालांकि पहली नजर में आपको यहां कुछ भी असामान्य नहीं लगेगा. हर मकान के बाहर स्मार्ट मीटर, बिजली के तार, कनेक्शन. यहां तक कि बिजली का ट्रांसफार्मर भी रखा मिलेग. लेकिन सब अवैध. यही नहीं NDTV आपको अवैध बिजली का बिल भी दिखाएगा कि कैसे बढ़ी यूनिट और मेंटेनेंस चार्ज भी बिजली माफिया यहां के लोगों से एक दो सालों से नहीं बल्कि बीते 10 साल से वसूल रहे थे.
हिंडन के डूब क्षेत्र का इलाका
दरअसल राधाकुंज कॉलोनी परतापुर खिजरपुर गांव की जमीन पर बसा है. हिंडन के डूब क्षेत्र में होने की वजह से बिजली का सरकारी कनेक्शन नहीं लग सकता था लिहाजा इसी का फायदा यहां के भू माफियाओं ने उठाया. हरेंद्र, रामफल नाम के लोगों ने पहले कॉलोनी बसाई फिर बिजली विभाग के अधिकारियों से मिलकर करीब 3000 मकानों में प्राइवेट बिजली का कनेक्शन देकर उगाही शुरू कर दी. रामफल और हरेंद्र ने अपने नाम से कनेक्शन लिया फिर आगे उसे दूसरे घरों में सप्लाई करने लगे. हर घर से 200 रुपए मेंटेंनेस चार्ज, और बिजली लॉस के नाम पर बढ़ी यूनिट का पैसा. यही नहीं, सरकारी बिजली का दर 7.50 पैसे यूनिट है लेकिन ये माफिया बिजली विभाग की मिलीभगत से लोगों से 11.50 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली का बिल लेते थे. मजेदार बात ये है कि ये किसान के नाम पर कनेक्शन लिए थे और कॉलोनी में बिजली की अवैध सप्लाई से हर महीना डेढ़ करोड़ रुपए की कमाई कर रहे थे. यहां तक कि खेती में भी ट्रांसफॉर्मर का इस्तेमाल होता था.
जमकर करते थे कमाई
स्थानीय निवासी विमला ने अपना बिजली का बिल दिखाते बताया कि प्राइवेट कनेक्शन लगाने के नाम पर दस से पंद्रह हजार रुपए पहले ले लेते थे. फिर हर महीने 30-50 यूनिट अतिरिक्त बिजली के बिल में लॉसेस के नाम पर जोड़ते थे. जानकार बताते हैं कि इस इलाके से हर महीने औसतन 1 से 1.5 करोड़ रुपए लोगों से बिजली के नाम पर वसूलते थे लेकिन बिजली का बिल 8-10 लाख रुपए देते थे बाकी के पैसे इन बिजली माफियाओं और अधिकारियों की जेब में जाते थे.
योगी के फटकार के बाद हुई बड़ी कार्रवाई
एक बैठक के दौरान उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जानकारी में जब ये पूरा मामला आया तब उन्होंने बिजली विभाग को फटकार लगाई. फटकार के बाद सोमवार से इस इलाके में बिजली के छापे पड़े. हरेंद्र और रामफल नाम के माफिया फिलहाल आफिस बंद करके फरार हो चुके हैं. NDTV की टीम जब हरेंद्र नाम के बिजली माफिया के आफिस पहुंची तो वहां ताला लगा मिला. पड़ोसियों ने बताया कि कल रात से वो भूमिगत हो गया है. राधाकुंज कॉलोनी के स्थानीय निवासी विनय राय ने बताया कि कई बार बिजली का कनेक्शन देने के प्रदर्शन तक कर चुके हैं लेकिन उसके बावजूद जब समस्या नहीं हल हुई तब प्राइवेट माफिया की बिजली पर निर्भर रहना पड़ा.
तीन हजार की आबादी के पास बीते दो दिनों से बिजली नहीं है
सरकारी अधिकारी और अवैध माफिया की इस लड़ाई का खामियाज़ा राधा कुंज कॉलोनी के लोग भुगत रहे हैं. सालों साल ज्यादा बिजली का बिल भुगतान करते रहे अब दो दिन से बिजली गायब है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. यहां स्थानीय निवासी बीना बताती हैं कि जब दिल्ली के झुग्गी झोपड़ी में कनेक्शन लग सकता है तो आखिर हमारी कॉलोनी में जहां बड़े बड़े मकान बने हैं बिजली का कमेक्शन क्यों सरकार नहीं दे रही है?
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