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Noida Protest: दिहाड़ी मजदूर से कम वेतन, टॉयलेट भी नहीं जाने देते-नोएडा में प्रदर्शनकारी मजदूर कैमरे पर फट पड़ा

Noida Protest News: इस बीच एनडीटीवी हिंदी ने प्रदर्शन कर रहे मजदूरों से बात की.हिंसक हुए इस प्रदर्शन पर मजदूरों ने कैमरे पर कुछ और ही कहानी बताई. पूछने पर पता चला कि कर्मचारी सैलरी और ओवरटाइम के लिए प्रदर्शन कर रहे थे पर पुलिस ने महिला मजदूरों पर लाठी चला दी.

Noida Protest: दिहाड़ी मजदूर से कम वेतन, टॉयलेट भी नहीं जाने देते-नोएडा में प्रदर्शनकारी मजदूर कैमरे पर फट पड़ा
Noida Workers Protest
  • नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के गुस्से के कारण कई इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम लग गया है
  • प्रदर्शन का मुख्य कारण कर्मचारियों की सैलरी और ओवरटाइम भुगतान से जुड़ी मांगें थीं
  • एनडीटीवी हिंदी ने प्रदर्शनकारी मजदूरों से बातचीत कर उनकी शिकायतें और पुलिस कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की है
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नोएडा:

 Noida Workers Salary Hike Protest News: प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के गुस्से ने नोएडा को आग में झोंक दिया है. कई इलाकों में जाम के चलते लोग परेशान हैं तो कर्मचारियों ने सड़क पर आगजनी, तोड़फोड़ कर मामले को और बिगाड़ दिया है. इस बीच एनडीटीवी हिंदी ने प्रदर्शन कर रहे मजदूरों से बात की.हिंसक हुए इस प्रदर्शन पर मजदूरों ने कैमरे पर कुछ और ही कहानी बताई. पूछने पर पता चला कि कर्मचारी सैलरी और ओवरटाइम के लिए प्रदर्शन कर रहे थे पर पुलिस ने महिला मजदूरों पर लाठी चला दी.  

पुलिस के लाठीचार्ज से बदला माहौल

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने एनडीटीवी को बताया कि हम तो अपनी मांगों को लेकर शांति से प्रदर्शन कर रहे थे पर पुलिस ने ही हम पर लाठीचार्ज कर दिया जिसके बाद कई मजदूर आक्रोशित हो गए और मामला बिगड़ गया. गुस्साए मजदूरों ने पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया और पूरा प्रोटेस्ट आगजनी-तोड़फोड़ में बदल गया. एक मजदूर का दर्द कैमरे पर देखते ही फूट पड़ा. उसने कहा कि महिलाओं को उठना मुश्किल है, महिलाओं का टॉयलेट जाना मुश्किल हो जाता है. कंपनी के लोग तो गुस्सा होकर गंदी-गंदी गालियां दी जाती हैं. एक और प्रदर्शनकारी ने बताया कि हमें दिहाड़ी मजदूर से भी कम मिलता है.  


 

हम प्रदर्शन कर रहे थे तभी हो गया हमला....

नोएडा में आक्रोशित कर्मचारियों से एनडीटीवी ने बात की. प्रदर्शन में महिला कर्मचारी भी शामिल थीं. एक महिला ने हमारे रिपोर्टर से बातचीत में बताया कि हम सुबह से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे,तभी हमपर हमला हो गया.मेरे साथ और भी महिलाएं थीं जिनपर हमला हुआ. हम चाह रहेथे कि हमारे लोग कंपनी के अंदर फंसे थे,उन्हें निकाला जाए पर उन्होंने इसकी जगह बल का इस्तेमाल कर हम पर हमला कर दिया. 


हमारा शोषण होता है, समय पर भोजन नहीं मिलता 

लक्ष्मी 26 साल की महिला कर्मचारी ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि हम बस दो चीजें मांग रहे हैं.पहली जो हम ओवरटाइम (अतिरिक्त समय) काम करते हैं उसका पैसा मिले और दूसरी मांग यह है कि हमारी कम से कम 20,000 रुपये सैलरी हो. हमारी अपनी ही कंपनी में हमारा शोषण किया जा रहा है.हमें समय पर खाना नहीं दिया जाता और यहां महिलाओं की सुरक्षा का भी कोई ध्यान नहीं रखा जाता.

औरैया के अक्षय ने बताया कि गुरुग्राम की कई निजी कंपनियों ने अब हर महीने 20,000 रुपये सैलरी देना शुरू कर दिया है.हमें सिर्फ 10,000 रुपये मिल रहे हैं और कभी-कभी तो उसमें से भी 1000 रुपये काट लिए जाते हैं. शाहजहांपुर के अंकुर कुमार ने बताया कि अगर वेतन में इतनी असमानता है, तो बड़े शहरों में काम करने का क्या फायदा? सिस्टम हमारा शोषण कर रहा है.जब हमने अपनी आवाज उठानी शुरू की, तो हमारे साथ हिंसा की गई. हम चाहते हैं कि सरकार हमारे फायदे के लिए कदम उठाए.

संभल के सुरेंद्र ने बताया कि मजदूरों को कम से कम 20,000 रुपये सैलरी मिलनी चाहिए. जब हम अंदर काम करते हैं, तो लोग हमारे साथ बदतमीजी करते हैं. हम शांति से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि बाकी मजदूरों को भी हमारे साथ जुड़ने दिया जाए, लेकिन उन्होंने इजाजत नहीं दी.

दिहाड़ी बढ़ाइए, लेबर कानून का पालन हो 

नोएडा फेस 2 में चल रहे प्रदर्शन को लेकर कंपनी में काम करने वाले राजू कर्मचारी का कहना है जो हमारा हक है वह हमें मिलना चाहिए, उनका कहना है कहीं 11000 तो कहीं 12000 वेतन मिल रहा है, इतनी महंगाई में इससे क्या हो रहा है.उनका यह भी कहना है कि एक दिन की जो दिहाड़ी है वह 800 से 900 रुपये मिलना चाहिए जबकि अभी हमें मात्र 300 से 400 रुपये मिल रहे हैं. 

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उधर सीनू राय कहना है कि जो केंद्र सरकार की ओर से सैलरी लागू की गई है वही राज्य सरकार भी लागू करे. उनका यह भी कहना कि अभी हमें ₹14000 वेतन के रूप में मिल रहा है. जो केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया है वह यहां भी लागू हो जबकि कई ऐसी कंपनी हैं जो लागू कर चुकी हैं, लेकिन नोएडा फेस टू में ज्यादातर कंपनियों ने कोई भी नियम लागू नहीं किया है.

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