- स्वामी प्रसाद मौर्य ने राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद इंडिया गठबंधन में शामिल होने की बात कही थी.
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य इंडिया अलायन्स का हिस्सा नहीं होंगे.
- अखिलेश के बाद अब कांग्रेस ने स्वामी प्रसाद से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है.
यूपी में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य की राजनीतिक तस्वीर फिर उलझती नजर आ रही है. कुछ दिनों पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी. जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी का इंडिया गठबंधन में शामिल होने का बयान दिया था. लेकिन अब कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव के समझाने के बाद स्वामी प्रसाद को लेकर कांग्रेस के रूख नरम पड़े है.
अखिलेश के सख्त रूख के बाद कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला
दरअसल यूपी में इंडिया अलायन्स में शामिल होने के लिए छटपटा रहे राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सपा के सख्त रुख के बाद कांग्रेस ने भी स्वामी से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है. सपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी.
दिल्ली में हुई स्वामी की इस मुलाकात के बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि आरएसएसपी इंडिया अलायन्स में आ सकती है. उन्होंने एक नवंबर को दिल्ली में इंडिया अलायन्स के प्रोटेस्ट मार्च में भी शामिल होने की घोषणा की.

अखिलेश ने साफ कहा- स्वामी इंडिया अलायन्स में नहीं होंगे
इस बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव से जब स्वामी प्रसाद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर इसकी संभावनाओं को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद इंडिया अलायन्स का हिस्सा नहीं होंगे. अखिलेश यादव ने शुक्रवार को लखनऊ में पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही.उन्होंने कहा,''स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे गठबंधन में शामिल नहीं हैं.इग्नोर करो, अवाइड करो. साइलेंस इज गोल्ड. वो हमारी सीटों की गिनती में शामिल नहीं हो सकते.''
देवी-देवताओं पर कई विवादित टिप्पणी कर चुके हैं स्वामी
सपा के इस रूख के बाद कांग्रेस को स्वामी प्रसाद के पुराने बयान याद आ गए. कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि जब अलायन्स की बात होगी तो स्वामी का इतिहास खंगाला जाएगा. इस इतिहास में उन्होंने जो देवी देवताओं पर टिप्पणी की है, उसका भी मूल्यांकन होगा.

विधान परिषद से इस्तीफा देकर एक सीट खराब की
सपा ने भी दोहराया है कि स्वामी प्रसाद को सपा के लेने के बाद पद भी दिया गया और उन्हें एमएलसी भी बनाया गया लेकिन अचानक एमएलसी की सीट से इस्तीफा देकर उन्होंने सपा की विधान परिषद में एक सीट ख़राब करने का काम किया था. ऐसे में उन्हें पार्टी में लेने का सवाल ही नहीं है.
जाहिर है लंबे समय से राजनीति में जगह बनाने की जद्दोजहद में लगे स्वामी को एक बार फिर इंडिया अलायन्स से बड़ा झटका लगा है. अब देखना होगा कि स्वामी आगे क्या करते हैं?
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