उत्तर प्रदेश की राजनीति में रायबरेली हमेशा चर्चा का केंद्र रही है. लेकिन चुनावी बहसों और नेताओं के भाषणों से दूर जब डिडौली गांव के लोगों से बात की गई तो यहां मुद्दे कुछ और ही नजर आए. लोगों ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में गांव की तस्वीर बदली है और इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देता है.
डिडौली गांव के पास से गुजरने वाला गंगा एक्सप्रेसवे स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिन जगहों तक पहुंचने में कई घंटे लगते थे, अब वहां कम समय में पहुंचा जा सकता है. लोगों के मुताबिक सफर आसान होने से कारोबार और आवाजाही दोनों को फायदा मिला है. गांव के एक मतदाता शिवलाल कहते हैं कि पहले यहां का इलाका काफी पिछड़ा माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. उनका कहना है कि किसानों के लिए भी कई सुविधाएं बढ़ी हैं और विकास का असर गांव तक पहुंचा है.
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महिलाओं ने गिनाईं बदली हुई सुविधाएं
गांव की महिलाओं ने भी खुलकर अपनी राय रखी. उनका कहना है कि सड़कों की हालत पहले की तुलना में बेहतर हुई है. बिजली और पानी की सुविधाओं में सुधार हुआ है. कई महिलाओं ने बताया कि पहले लड़कियों को स्कूल जाने में दिक्कत होती थी, लेकिन अब रास्ते बेहतर होने से पढ़ाई आसान हुई है.
महिलाओं ने यह भी कहा कि शौचालय बनने से सबसे ज्यादा राहत मिली है. पहले खुले में जाना मजबूरी थी, जबकि अब घर में ही सुविधा उपलब्ध है. उनका मानना है कि ऐसी योजनाओं ने ग्रामीण जीवन को काफी बदल दिया है. ग्रामीणों का एक वर्ग कानून-व्यवस्था को लेकर भी संतुष्ट नजर आया. महिलाओं ने कहा कि पहले बाहर निकलने में डर लगता था, लेकिन अब स्थिति बेहतर महसूस होती है. लोगों का मानना है कि सुरक्षा का माहौल बनने से महिलाओं और बच्चों को ज्यादा सुविधा मिली है.
2022 के चुनाव में भी दिखा था असर
डिडौली गांव रायबरेली सदर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अदिति सिंह ने जीत दर्ज की थी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला मतदाताओं का समर्थन उस चुनाव में अहम रहा था. राशन, शौचालय, सड़क और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों ने चुनावी रुझान प्रभावित किए थे.
चुनाव से पहले गांव का मूड क्या कहता है?
डिडौली गांव की बातचीत से साफ संकेत मिलता है कि यहां के लोग बड़ी राजनीतिक बहसों से ज्यादा अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को महत्व देते हैं. सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी, सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकता में हैं. गंगा एक्सप्रेसवे ने जहां दूरी कम की है, वहीं लोगों के मुताबिक विकास की चर्चा को भी गांव तक पहुंचाया है. आगामी चुनावों में यही मुद्दे मतदाताओं के फैसले पर कितना असर डालेंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.
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