कानपुर के सजेती थाना क्षेत्र के टिकवांपुर गांव में बुधवार की रात एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी. रात के 11 बजे, पुलिस की गाड़ियां, टॉर्च की रोशनी और फावड़े चलने की आवाज सुनाई दी. पुलिस की मौजूदगी में जब गांव के टावर के पास की जमीन खोदी गई, तो 7 फीट की गहराई पर एक महिला का कंकाल मिला. यह कंकाल 45 वर्षीय रेशमा का था, जो 7 बच्चों की मां थी और पिछले 10 महीने से लापता थी.
यह मामला है एक अवैध संबंध, धोखे और एक बेटे की जिद की, जिसने अपनी मां के हत्यारे को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.
पति की मौत के बाद प्रेमी संग रहने लगीं रेशमा
इस मामले की शुरुआत 3 साल पहले हुई, जब टिकवांपुर निवासी रेशमा के पति रामबाबू संखवार की मौत हो गई. रेशमा के 7 बच्चे (4 बेटे और 3 बेटियां) थे. पति की मौत के बाद रेशमा का दिल गांव के ही गोरेलाल पर आ गया. गोरेलाल का घर रेशमा के घर से महज 300 मीटर दूर था. बच्चों और समाज की परवाह किए बिना रेशमा अपना घर छोड़कर गोरेलाल के साथ लिव-इन में रहने लगीं. मां के इस कदम से नाराज बच्चों ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया था.
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'तुम्हारी मां कभी नहीं आएगी'
10 महीने तक रेशमा का कोई अता-पता नहीं था, लेकिन राज तब खुला जब 29 नवंबर को परिवार में एक शादी थी. रेशमा के बेटे बबलू ने पुरानी कड़वाहट भुलाकर मां को शादी का न्योता भेजा. लेकिन, जब मां शादी में नहीं पहुंची, तो बबलू का माथा ठनका. बबलू सीधे गोरेलाल के घर पहुंचा. वहां मां नहीं मिली. जब उसने गोरेलाल से पूछा, तो उसने बेहद ठंडे दिमाग से जवाब दिया कि तुम्हारी मां अब कभी नहीं आएगी.
यह सुनकर बबलू को लगा कि गोरेलाल मजाक कर रहा है या मां कहीं चली गई हैं. लेकिन बार-बार पूछने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो बबलू को अनहोनी का शक हुआ. उसने 29 दिसंबर को सजेती थाने में गोरेलाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.
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पुलिस के डंडे के आगे टूटा गोरेलाल
पुलिस ने बबलू की तहरीर पर गोरेलाल को हिरासत में लिया. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन जब खाकी ने सख्ती दिखाई, तो वह टूट गया. उसने जो कहानी सुनाई, वह बेहद खौफनाक थी. गोरेलाल ने पुलिस पूछताछ में बताया कि अप्रैल 2025 में वह और रेशमा गेहूं की कटाई के लिए इटावा गए थे. वहां से लौटने के बाद रेशमा ने दोबारा काम पर जाने से मना कर दिया. गोरेलाल अब रेशमा से छुटकारा पाना चाहता था. उसने रेशमा पर दबाव बनाया कि वह अब उसके भाई के साथ रहे.
ऐसे हुई रेशमा की हत्या
रेशमा ने इसका कड़ा विरोध किया. इसी बात पर दोनों के बीच रोज झगड़े होने लगे. गुस्से में आकर गोरेलाल ने रेशमा का गला घोंटकर उसे मार डाला.
हत्या के बाद गोरेलाल दो दिन तक लाश को घर में छिपाकर बैठा रहा। वह सोचता रहा कि लाश को कैसे ठिकाने लगाए. पहले उसने सोचा कि शव को नहर में फेंक दे, लेकिन उसे डर था कि शव पानी में ऊपर आ जाएगा और वह पकड़ा जाएगा. फिर उसने तय किया कि शव को ऐसी जगह दफनाएगा जहां कोई सोच भी न सके.
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7 फीट गहरे गड्ढे में मिला कंकाल
उसने गांव में टावर के पास एक सुनसान जगह चुनी और वहां 7 फीट गहरा गड्ढा खोदा. उसने रेशमा के शव को उसमें दफना दिया और ऊपर से मिट्टी डालकर जमीन समतल कर दी. उसे लगा कि उसका राज हमेशा के लिए दफन हो गया है.
आरोपी की निशानदेही पर ACP कृष्णकांत यादव और पुलिस फोर्स बुधवार रात गांव पहुंची. आरोपी द्वारा बताई गई जगह पर खुदाई शुरू हुई. करीब 7 फीट नीचे रेशमा का कंकाल मिला. फॉरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए और कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
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