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This Article is From Jan 28, 2026

UGC-शंकराचार्य विवाद के बीच GST कमिश्नर का इस्तीफा, दिव्यांग सर्टिफिकेट मामले में भाई पर आरोप से घमासान

मऊ में जीएसटी अधिकारी प्रशांत सिंह के इस्तीफे और उनके भाई से जुड़े दिव्यांग सर्टिफिकेट विवाद ने प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है.

UGC-शंकराचार्य विवाद के बीच GST कमिश्नर का इस्तीफा, दिव्यांग सर्टिफिकेट मामले में भाई पर आरोप से घमासान
  • मऊ के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत सिंह के इस्तीफे और उनके भाई पर दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाने का आरोप
  • शिकायतकर्ता ने 2009 में जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच की मांग की थी, जिससे विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी
  • आरोपी को 2 बार चिकित्सा बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उसने दोनों बार हाजिरी नहीं दी
मऊ:

मऊ यूजीसी और शंकराचार्य से जुड़े विवाद के बीच जिले के निवासी और GST विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत सिंह के इस्तीफे ने प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है. इस पूरे प्रकरण को और गंभीर तब माना जाने लगा जब उनके सगे भाई पर दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप सामने आया. मामले पर बढ़ते सवालों के बीच मऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय गुप्ता ने मीडिया के सामने स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष रखा.

दिव्यांग प्रमाण पत्र की पुनः जांच से जुड़ा पुराना विवाद

सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि पूरा मामला साल 2021 से विभाग के संज्ञान में है, हालांकि शिकायत की जड़ वर्ष 2009 में जारी दिव्यांग सर्टिफिकेट से जुड़ी हुई है. शिकायतकर्ता ने प्रमाण पत्र की दोबारा जांच की मांग की थी, जिसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई. उन्होंने बताया कि 19 दिसंबर को इस संबंध में एक औपचारिक पत्र जारी किया गया था. इसमें मामले पर मार्गदर्शन के लिए महानिदेशक से निर्देश मांगे गए. शिकायतकर्ता विश्वजीत को भी पत्र भेजा गया और दिव्यांगजन आयुक्त और संबंधित बेंच को जानकारी दी गई.

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मंडलीय मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए आरोपी

सीएमओ के अनुसार, आरोपित व्यक्ति को दो बार मंडलीय चिकित्सा बोर्ड/दिव्यांगजन बोर्ड के सामने परीक्षण के लिए बुलाया गया, लेकिन दोनों ही मौकों पर वह नहीं गए. डॉ. गुप्ता ने साफ किया कि संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी सगे भाई बताए जा रहे हैं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी करना सही नहीं होगा.

आंख की बीमारी पर एक्सपर्ट की राय जरूरी

जब मीडिया ने पूछा कि क्या 50 साल की उम्र में बताई जा रही आंख की बीमारी संभव है, तो सीएमओ ने कहा कि मैं इस मामले का एक्सपर्ट नहीं हूं. इस पर सिर्फ स्पेशलिस्ट मेडिकल बोर्ड ही प्रमाणिक राय दे सकता है.

अब तक की जांच और विभाग का रुख

सीएमओ ने बताया कि फिलहाल की स्थिति यही है कि संबंधित व्यक्ति बोर्ड के सामने पेश नहीं हुआ है. आखिरी खत में साफ जिक्र है कि दो बार तलब किए जाने के बावजूद वह नहीं आया. हालांकि विभाग अपनी ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर चुका है. मामले से जुड़ी पूरी जानकारी न्यायालय, दिव्यांगजन आयुक्त और उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है. अगली कार्रवाई उच्चाधिकारियों से मिलने वाले निर्देशों के मुताबिक ही होगी. 

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किसी भी दबाव या संपर्क से इनकार

सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने साफ कहा कि न इस मामले में प्रशांत सिंह ने कभी फोन किया, न किसी प्रतिनिधि ने संपर्क किया. न ही कोई दबाव डाला गया है. मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी नहीं जानता. 

प्रदेश में बढ़ी प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी

एक ओर जीएसटी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा और दूसरी ओर उनके भाई से जुड़े दिव्यांग सर्टिफिकेट विवाद ने प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है. अब पूरा मामला विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड और उच्चाधिकारियों के अगले निर्णय पर टिका है.

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