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लखनऊ झुग्गी आग : बेटे की बारात से पहले उजड़ा आशियाना; राख में बदल गई खुशियां, अब बहू को रखने का भी ठिकाना नहीं

Lucknow Slum Fire: लखनऊ के विकास नगर में झुग्गी बस्ती में आग से सबकुछ राख हो गया. बेटे की शादी से पहले घर जलने से परिवार बेघर, कई जिंदगियां प्रभावित. पढ़िए पूरी खबर.

लखनऊ झुग्गी आग : बेटे की बारात से पहले उजड़ा आशियाना; राख में बदल गई खुशियां, अब बहू को रखने का भी ठिकाना नहीं
लखनऊ के विकास नगर में झुग्गी बस्ती में भीषण आग, शादी से पहले उजड़ा परिवार

Lucknow Vikas Nagar Slum Fire: शादी किसी भी परिवार के लिए खुशियों का सबसे बड़ा अवसर होती है. घर में चहल‑पहल, रिश्तेदारों की आवाजाही और भविष्य को लेकर नए सपने सजाए जाते हैं. लेकिन लखनऊ के विकास नगर की एक झुग्गी बस्ती में यह खुशी मातम में बदल गई. जिस घर से अगले दिन बेटे की बारात निकलनी थी, उसी घर को आग ने चंद मिनटों में राख बना दिया. शादी तो हो गई, लेकिन परिवार के पास अब न घर बचा है और न ही नई बहू को विदा कर लाने का साहस. यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों की पीड़ा है जिन्होंने एक ही आग में अपना सबकुछ खो दिया. राख के ढेर में दबे सपने, अधूरी खुशियां और अनगिनत सवाल आज भी झुग्गी बस्ती के कोने‑कोने में खामोशी से चीखते नज़र आते हैं.

“सब कुछ जल गया, अब बहू को कहां रखें?”

“कल बेटे की बारात निकलनी थी. शाम को घर में तैयारियां चल रही थीं. अचानक आग लग गई. जान बचाने के लिए तौलिया लपेटकर बाहर भागे. वापस आए तो सब कुछ जल चुका था.” यह शब्द हैं रेशमा के, जिनकी जिंदगी एक झटके में बदल गई. घर में रखे उधार के पैसे, बहू को देने के लिए जमा किए गहने, कपड़े और घरेलू सामान कुछ भी नहीं बचा. बेटे ने मजबूरी में चार लोगों के साथ जाकर शादी तो कर ली, लेकिन जब अपना ही घर नहीं बचा, तो बहू को विदा कर लाने की हिम्मत भी नहीं बची. इसीलिए बेटा फिलहाल अपनी पत्नी के साथ ससुराल में रह रहा है.

Lucknow Vikas Nagar Slum Fire: लखनऊ झुग्गी बस्ती आग

Lucknow Vikas Nagar Slum Fire: लखनऊ झुग्गी बस्ती आग

राख में बदल गया चार दशक पुराना ठिकाना

रेशमा लखनऊ के विकास नगर में बनी झुग्गी में रहती थीं. जिस आशियाने को बरसों की मेहनत से खड़ा किया गया था, वह चंद मिनटों में राख बन गया. नई‑नई बहू के स्वागत की जगह अब सिर्फ सवाल बचे हैं उसे कहां रखें, जिंदगी को कैसे दोबारा शुरू करें? हालत यह है कि शरीर पर जो कपड़े बचे हैं, वही सब कुछ हैं. यहां तक कि पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेज़ भी आग में जल चुके हैं.

गर्भवती पत्नी को बचाया, घर नहीं बचा

रेशमा अकेली नहीं हैं. रंजीत की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है. उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती है. जब बस्ती में आग लगी और सिलेंडरों के फटने की आवाज़ें आने लगीं, तो रंजीत पत्नी को लेकर भागे. उसे सुरक्षित जगह छोड़कर जब वे अपने घर को बचाने दौड़े, तब तक सब खत्म हो चुका था. आग उनकी झुग्गी को निगल चुकी थी. गुल्लक के पैसे, कपड़े, गहने और बर्तन सब राख बन गए.

दो मासूम बच्चियों की मौत, बस्ती में पसरा सन्नाटा

इस आग ने सिर्फ घर ही नहीं छीने, बल्कि जिंदगियां भी ले लीं. एक परिवार ने अपनी दो मासूम बेटियों को खो दिया. दोनों बच्चियों की उम्र महज़ दो साल थी. उन्हें शायद यह भी नहीं पता था कि आग क्या होती है. आज विकास नगर की झुग्गी बस्ती में हर चेहरा बुझा हुआ है. लोग राख के ढेर में अपने बचे‑खुचे सामान की तलाश में लगे हैं, जैसे किसी उम्मीद को खोज रहे हों.

कैसे लगी आग, पूरी रात जूझती रही दमकल

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के विकास नगर सेक्टर‑11 में शाम करीब 5:30 बजे अचानक आग भड़क उठी. एक खाली जमीन पर लगभग चार दशकों से बसी झुग्गी बस्ती में एक‑एक कर गैस सिलेंडर फटने लगे. फूस और तिरपाल से बनी झुग्गियां देखते ही देखते आग का गोला बन गईं. करीब 22 फायर टेंडरों ने मोर्चा संभाला, लेकिन आग पर काबू पाने में रात के 10 बज गए. पूरी रात राख में चिंगारियां सुलगती रहीं. सुबह जब आग ठंडी पड़ी, तब लोगों की तलाश शुरू हुई, अपने बीते हुए कल और बचे हुए सपनों की.

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