उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उस अवैध इमारत के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है, जो आग लगने के बाद मासूम जिंदगियों के लिए एक 'लाक्षागृह' साबित हुई थी. एलडीए के इस कड़े रुख से साफ है कि नियमों को ताक पर रखकर इंसानी जान से खिलवाड़ करने वाले रसूखदारों पर अब 'बाबा का बुलडोजर' गरजने के लिए तैयार है.
इस सिलसिले में एलडीए के प्रवर्तन जोन 4 ने अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित भूखंड संख्या एमएस 102 के मालिकों वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और दूसरे के खिलाफ आधिकारिक तौर पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है.
आवासीय नक्शा पर बना डाला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स!
जांच में जो बात सामने आई है, वह सरकारी तंत्र की आंखों में धूल झोंकने का एक और बड़ा और जीता जागता उदाहरण है. एलडीए के मुताबिक, इस पूरी बिल्डिंग का जो नक्शा पास कराया गया था, वह पूरी तरह से 'आवासीय' उपयोग के लिए स्वीकृत था. यानी नियमों के मुताबिक वहां सिर्फ रहा जा सकता था, लेकिन जमीन पर मकान मालिकों ने सारे कायदे कानूनों को मटियामेट करते हुए इस आवासीय बिल्डिंग का धड़ल्ले से 'व्यावसायिक' इस्तेमाल शुरू कर दिया. स्वीकृत मानचित्र के विपरीत जाकर बिल्डिंग में कई तरह के अवैध निर्माण और विचलन भी पाए गए हैं. इसी को आधार बनाकर एलडीए ने 'उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973' की धारा 27(1) के तहत ध्वस्तीकरण की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.इसके साथ ही एलडीए ने भवन मालिकों को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि वे अगले 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर अपना पक्ष रखें. अगर तय समय सीमा में मकान मालिकों की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब या पुख्ता सबूत नहीं मिला, तो बिना कोई अतिरिक्त मौका दिए इस बहुमंजिला अवैध इमारत को जमींदोज कर दिया जाएगा.
शहर भर के कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, होटल और नर्सिंग होम रडार पर
अलीगंज की इस दुखद घटना से सबक लेते हुए एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मंगलवार देर शाम सभी जोनल अधिकारियों के साथ एक हाई प्रोफाइल आपातकालीन बैठक की. इस बैठक में उन्होंने जनसुरक्षा के मद्देनजर पूरे लखनऊ में अग्नि सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के लिए एक मेगा चेकिंग अभियान चलाने का हुक्म दिया है. उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने साफ निर्देश दिए हैं कि बुधवार से ही शहर के सभी जोनों में एक साथ सघन चेकिंग अभियान शुरू किया जाए. इसके तहत निम्नलिखित संस्थानों की कुंडली खंगाली जाएगी.
- कोचिंग इंस्टीट्यूट्स और लाइब्रेरी: जहां रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई के लिए आते हैं, वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?
- निजी नर्सिंग होम और हॉस्पिटल्स: क्या मरीजों की सुरक्षा के लिए फायर एनओसी ली गई है?
- होटल्स और कमर्शियल हब: क्या इन भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक हुआ है या नहीं?
'मानक के विपरीत मिला निर्माण, तो तुरंत होगी सीलिंग'
लखनऊ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने फील्ड में तैनात अपने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इस विशेष अभियान में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अगर फील्ड विजिट के दौरान किसी भी आवासीय क्षेत्र में बिना अनुमति के चल रहा कमर्शियल प्रतिष्ठान या तय मानक से हटकर किया गया अवैध निर्माण पाया जाता है, तो उस बिल्डिंग को तत्काल प्रभाव से 'सील' कर दिया जाए. उन्होंने साफ कह दिया है कि जनता की सुरक्षा से जुड़े मामलों में एलडीए किसी भी प्रकार की ढिलाई या 'सॉफ्ट कॉर्नर' नहीं रखेगा. जिन संस्थानों में प्रतिदिन भारी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, विशेषकर कोचिंग सेंटर्स, वहां आपातकालीन निकास की व्यवस्था, बिल्डिंग का अप्रूव्ड मैप और अग्निशमन उपकरण होना अनिवार्य है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब कठोरतम कार्रवाई ही एक मात्र रास्ता है.
कोचिंग और नर्सिंग होम संचालकों को दी जाएगी आखिरी चेतावनी
कार्रवाई के डंडे के साथ-साथ एलडीए प्रशासन ने जागरूकता और संवाद का रास्ता भी खुला रखा है. उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शहर के तमाम कोचिंग, नर्सिंग होम और होटल संचालकों के साथ तुरंत एक साझा बैठक आयोजित की जाए.
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इस बैठक में सभी संचालकों को स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही भवन का उपयोग करने, पर्याप्त संख्या में काम करने वाले अग्निशमन उपकरण लगाने, चौड़े आपातकालीन निकास द्वार बनाने, बिजली की सुरक्षित वायरिंग रखने और सुचारू पार्किंग प्रबंधन जैसे आवश्यक बिंदुओं पर विस्तार से समझाया जाएगा. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह बैठक सिर्फ समझाने के लिए होगी, इसके बाद भी अगर कमियां पाई गईं तो सीधे कानूनी गाज गिरना तय है.
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