लखनऊ के भीषण अग्निकांड ने सीतापुर के बिसवां निवासी 21 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव समेत कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं. देर रात जब आदित्य का शव उसके पैतृक आवास पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। घर के बाहर लोगों की भीड़ थी, लेकिन भीतर सिर्फ चीखें, आंसू और अपनों को खोने का दर्द था. आदित्य की मां कल्पना श्रीवास्तव, बहन निष्ठा और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है. बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता आलोक श्रीवास्तव सदमे में हैं और कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं. जैसे ही आदित्य का शव घर पहुंचा, छोटी बहन निष्ठा अपने भाई से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं.
निष्ठा ने बताया कि आग लगने के दौरान उसी बिल्डिंग में उनके रिश्तेदार भवन श्रीवास्तव भी मौजूद थे. उन्होंने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई और आदित्य से भी कूदने को कहा, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया. जान बचाने की कोशिश में आदित्य समेत कई युवाओं ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था. निष्ठा के अनुसार, दोपहर करीब ढाई बजे आदित्य का फोन आया था, लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं. शाम करीब पांच बजे उसका शव बाहर निकाला गया. परिवार का आरोप है कि अगर दमकल और राहत टीम समय पर पहुंचती, तो शायद आदित्य की जान बचाई जा सकती थी. आदित्य एक 3D कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में काम करता था और हादसे वाले दिन सुबह वह बेहद खुश होकर घर से निकला था.
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मां ने कहा- सहायता राशि उनके बेटे को वापस नहीं ला सकती
मां कल्पना श्रीवास्तव ने भावुक होकर कहा कि सहायता राशि उनके बेटे को वापस नहीं ला सकती. उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समय रहते बचाव कार्य शुरू होता, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता. बताया जा रहा है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वह वर्षों से विवादों और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच संचालित हो रही थी. अब इस दर्दनाक घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन मासूम जिंदगियों का जिम्मेदार आखिर कौन है?

जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई. मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. इसमें अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और एडीजी, लखनऊ जोन, प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है. एसआईटी को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
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