NEET पेपर लीक से लेकर सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के चलते एजुकेशन सेक्टर पिछले कुछ हफ्ते खूब चर्चा में रहा. इसी बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी कई सवाल उठे, जिनका उन्होंने पेपर लीक के बाद जवाब भी दिया. सरकार और प्रधान के सामने NEET री-एग्जाम को अच्छी तरह से करवाने की चुनौती सबसे बड़ी थी, जिसके बाद 21 जून को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नीट का एग्जाम देशभर में हुआ और सरकार ने राहत की सांस ली. इस बड़ी चुनौती को पार करने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत की, जिसमें उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी से लेकर नीट छात्रों के सुसाइड और बाकी तमाम सवालों का जवाब दिया.
1. सवाल - NEET पेपर लीक पर आप क्या कहना चाहते हैं?
जवाब - एनटीए ने जिन टीचर्स पर भरोसा किया था, उन्होंने ही धोखा दिया. कुछ शिक्षकों ने अपना दायित्व नहीं निभाया, नीट पेपर में रक्षक ही भक्षक बन गए.
2. सवाल - नीट पेपर लीक के बाद तैयारी कैसी थी, कैसे परीक्षा को लीकप्रूफ बनाया गया?
जवाब - इस बार जो टीचर्स पेपर बनाने के काम में थे, वो सभी आइसोलेशन में रहे. बिना इंटरनेट के कई दिनों तक इन टीचर्स को रखा गया. यही वजह है कि अच्छे क्वेश्चन तैयार हुए और सब कुछ अच्छी तरह हुआ. मल्टीलेयर मॉनिटरिंग हुई, राज्यों और केंद्रीय बलों की भी मदद ली गई. हमने बारिश और बाकी चीजों के चलते ट्रांसपोर्टेशन के लिए एयरफोर्स की मदद ली.
3. सवाल - पेपर लीक आगे न हो, इसके लिए अब सरकार क्या कर रही है?
जवाब - इस बार एनटीए ने एक करोड़ छात्रों का एंट्रेंस एग्जाम किया, जिसमें नीट समेत तमाम परीक्षाएं शामिल हैं. एनटीए की सभी परीक्षाएं लगभग सीबीटी मोड में हो चुकी हैं. राधाकृष्णन कमेटी ने भी ये सुझाव दिया था कि पेन-पेपर बड़ी चुनौती है. इसमें पेपर लीक की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. सीबीटी मोड में कई चुनौतियां हैं, इसे लेकर हम काम कर रहे हैं. हमें ये सुनिश्चित करना है कि कैसे ये लीकेज प्रूफ हो.
4. सवाल- राहुल गांधी छात्रों की आवाज उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि कांग्रेस और छात्र संगठन NSUI देशभर में प्रदर्शन करेगा. वो ये भी कह रहे हैं कि शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है.
जवाब - देखिए मैं राहुल गांधी जी के रवैये से दुखी हूं. मैं खुद राजनीतिक शास्त्र का छात्र रहा हूं, जब मैं कॉलेज में था तब मैं यही देखता था कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है. हालांकि सबकी एक मर्यादा है, आपका भी कुछ दायित्व है. राहुल गांधी ने सभी हदों को पार कर दिया, वो तीन दिन पहले कोटा में जाते हैं और बच्चों के मन में डर पैदा करते हैं. इसके बाद नागपुर के एक छात्र ने अपने ही फोन से तीन बार कहा कि मेरा सेंटर अबू धाबी दिया जाए, इस पर एनटीए ने तुरंत एक्शन लिया और फिर छात्र ने नागपुर में एग्जाम दिया.
5. सवाल - कुछ बच्चों को एग्जाम सेंटर में कुछ मिनट की देरी से आने पर एंट्री नहीं मिली, कई वीडियो सामने आ रहे हैं. इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब - देखिए सब कुछ सीसीटीवी में कैद है, मैं सुबह से ही इसकी मॉनिटरिंग कर रहा था. हर विषय का एक डिसिप्लिन रहता है. पहले ही कह दिया गया था कि 1:30 तक जो बच्चे पहुंचेंगे उसे ही एंट्री दी जाएगी, समय काफी पर्याप्त था. कई बच्चे तीन से चार घंटे पहले ही एग्जाम सेंटर पर पहुंच गए थे.
6. सवाल - नीट पेपर लीक में सीबीआई की जांच कहां तक पहुंची है?
जवाब - नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच पूरी हो चुकी है, एजेंसी अपना काम करेगी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ सिविल केस भी लगाया जाएगा. समाज में दहशतगर्दों के मन में डर पैदा होना जरूरी है. इनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी. सीबीआई इस मामले के तार देशभर में ढूंढ़ रही है. इस बार किसी को बख्शा नहीं जाएगा.
7. सवाल - कांग्रेस इस मामले को लेकर कह रही है कि वो लगातार बच्चों की लड़ाई लड़ती रहेगी, आप इसका कैसे मुकाबला करेंगे?
जवाब - ये कोई राजनीतिक विषय नहीं है, परीक्षा ठीक हो, बच्चे अच्छे मन से परीक्षा दें, प्रश्नपत्र बच्चों की मेधावी शक्ति को परखने के लिए हों, उन्हें बाधा देने के नहीं हो... हमारे सामने ये सब सवाल हैं. कांग्रेस पार्टी के पास कोई सकारात्मक सुझाव देने के लिए हैं ही नहीं.
8. सवाल - क्या आपको लगता है कि बच्चों को राजनीतिक हथियार बनाया गया?
जवाब - कोशिश तो हुई, लेकिन बच्चे हथियार बने ही नहीं. देशभर में इतने लाख बच्चे हैं. मैंने कांग्रेस के कुछ नेताओं के इंटरव्यू देखे, जो बोल रहे थे कि एक दो दिन में परीक्षा का असली चेहरा आएगा, यानी ये चाहते थे कि परीक्षा में गड़बड़ी हो.
9. सवाल - कुछ बच्चों ने सुसाइड किए हैं, इन्हें लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब - इसके लिए हम भी जिम्मेदार हैं. पिछले पांच साल में मैं शिक्षा विभाग का दायित्व संभाल रहा हूं, जब भी किसी बच्चे की जान चली जाती है तो मैं खुद को कोसता हूं कि ये क्या व्यवस्था हम चला रहे हैं कि बच्चे को जान देनी पड़ रही है. इस तरह की घटना ना हो, इसका दायित्व समाज को, परिवार को और शिक्षकों को लेना पड़ेगा.
10. सवाल - इसी बीच एक कॉकरोच जनता पार्टी भी बनकर आई है, जो इस मुद्दे को उठा रही है. इस पर आप क्या कहेंगे?
जवाब - ये दहशतगर्दों की बी टीम है. जिन लोगों को जनता ने सिरे से अस्वीकार किया, वो छद्म रूप में आकर इस तरह की व्यवस्था के पीछे पड़े हैं. जो लोग देश को तोड़ने का नारा लगाते हैं, इन सभी की पहचान हो चुकी है. मुद्दा क्या है, ये सब क्यों कर रहे हैं? कुछ लोगों को देश की प्रगति में भरोसा ही नहीं है.
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