ललितपुर में तेजी से बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों ने पुलिस और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडीजी कानपुर जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने साफ कहा है कि अब सिर्फ आंकड़ों से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर केस का गहराई से एनालिसिस कर इसकी जड़ों तक पहुंचना होगा. इसके लिए पुलिस, सरकारी विभागों और एनजीओ के साथ मिलकर युवाओं को मोटिवेट करने और काउंसलिंग के जरिए इस बढ़ती समस्या को रोकने की रणनीति तैयार की जा रही है.
हर दिन 2 से 4 आत्महत्या के मामले
ललितपुर में हालात इस तरह बन चुके हैं कि औसतन हर दिन 2 से 4 लोग, जिनमें युवक-युवतियां और बुजुर्ग शामिल हैं, आत्महत्या कर रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें 14 साल के नाबालिग से लेकर 45 साल तक के युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं. धीरे-धीरे यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है और कई परिवार पूरी तरह से टूट रहे हैं. ऐसी घटनाओं से यह संकेत मिल रहा है कि युवा अब संघर्ष से ज्यादा आसान रास्ता चुनने लगे हैं.
पिछले साल करीब 300 लोगों ने की आत्महत्या
अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो ललितपुर जिले में करीब 300 लोगों ने आत्महत्या की. इन मामलों में 14 साल के किशोर से लेकर 65 साल तक के लोग शामिल थे. पुलिस रिकॉर्ड में अक्सर इसके पीछे पारिवारिक कलह और अत्यधिक शराब सेवन को वजह बताया गया है. हालांकि कई ऐसे मामले भी हैं जिनकी असली वजह सामने नहीं आ पाती. आर्थिक तंगी, फसल खराब होना या कर्ज के दबाव में आकर भी लोग यह कदम उठा रहे हैं.
कानून व्यवस्था के साथ आत्महत्या के मामलों पर भी फोकस
एडीजी बनने के बाद जब अनुपम कुलश्रेष्ठ पहली बार ललितपुर पहुंचीं तो उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों को महिला अपराध, फर्जी शिकायतों, अवैध खनन और कच्ची शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. साथ ही गिरोह बनाकर गैरकानूनी काम करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही. इसी दौरान जब बढ़ती आत्महत्याओं का मुद्दा सामने आया, तो उन्होंने इसे प्राथमिकता में लेते हुए इसके समाधान पर काम शुरू करने के निर्देश दिए.
हर केस का होगा गहराई से एनालिसिस
एडीजी ने साफ कहा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लोग आत्महत्या क्यों कर रहे हैं. इसके लिए एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक टीम बनाकर सभी मामलों का विस्तृत विश्लेषण करें. इसमें यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में लोग यह कदम उठा रहे हैं और किस तरह की समस्याएं ज्यादा सामने आ रही हैं.
एनजीओ और सरकारी विभाग मिलकर करेंगे काउंसलिंग
प्रशासन ने यह भी तय किया है कि इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ पुलिस काम नहीं करेगी, बल्कि इसमें एनजीओ और अन्य सरकारी विभागों को भी जोड़ा जाएगा. इन संस्थाओं के माध्यम से युवाओं की काउंसलिंग की जाएगी और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश की जाएगी. खासतौर पर मेन्टल हेल्थ पर फोकस कर ऐसे लोगों को सपोर्ट दिया जाएगा जो तनाव या दबाव में हैं. प्रशासन का मानना है कि अगर सही समय पर मार्गदर्शन और मानसिक सहारा मिल जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.
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