दिल्ली के पंडारा रोड का सीएम श्री स्कूल…बाहर NEET परीक्षा देने आए छात्र और अभिभावकों का जमावड़ा…NEET परीक्षा शुरु होने में महज 40 मिनट बचे थे..लिहाजा परीक्षा देने से पहले कोई अपने माता-पिता के पैर छू रहा था तो कोई गले मिलकर आशीर्वाद ले रहा था. इसी बीच एक साधारण कपड़ों में पसीने से लथपथ एक महिला ने पुकारा.सर मेरी भी बेटी NEET का इम्तहान देने अंदर गई है. उसे अभी भेजकर जब लौटी तो आपको देखा.उस महिला की आंखें एकाएक छलक उठी थी.
''सिलाई का काम करती हूं, लोन लेकर पढ़ा रही हूं''
दुपट्टे से अपनी नम आंखों को पोंछती बोली-साहब अपनी बेटी को मैं सिलाई करके पढ़ा रही हूं.मेरे पास कुछ नहीं है मेरे बच्चों के सिवा.NEET की परीक्षा रद्द होने से बेटी बहुत दुखी हो गई थी क्योंकि, उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ था. सर अब क्या बताऊं बजाज फाइनेंस से लोन लेकर मैं अपनी बेटी को एलन कोचिंग करवा रही हूं.
एक सांस में ये सब बोलकर फिर वो महिला अपनी आंखों को दुपट्टे से पोंछने लगी. भावुकता में उसके गले से आवाज नहीं निकल रही थी.
बगल में खड़े उसके पति ने मुझसे कहा कि बेटी बहुत नर्वस थी सर. ऊपर से आए दिन आत्महत्या की खबरें आती थी.हम लोग एक कमरे वाले झुग्गी में रहते हैं. सो अनहोनी की आशंका में मैंने अंदर वाले कमरे की कुंडी तक हटा दी है.फिर अपनी पत्नी को डपटते बोला, रो क्यों रही हो ?? मेरी बेटी का नाम NEET में आ जाएगा. शांत रहो..ये कहकर वो महिला को दिलासा देने लगे.
''पंखा ऐसा बनाया लटकने की कोशिश करेगा तो टूट ही जाएगा''
दुपट्टे से बार बार आंख पोंछने के चलते महिला की आंखें लाल हो गई थी. फिर हाथों से पति की ओर इशारा करते बोली कि ये मैकेनिक है तो इन्होंने आत्महत्या के ख़्याल से पंखे को भी ऐसा बना दिया कि अगर अगर कोई लटकने की कोशिश करेगा तो पंखा ही टूट जाएगा. पति पत्नी दोनों की इन बातों को सुनकर मेरे बगल में खड़ा कैमरामैन रित्विक बोला, सर इंटरव्यू कर लेते हैं ये तो अच्छी केस स्टडी है.
वो महिला कैमरामैन की ओर देखते बोली नहीं मुझे टीवी पर नहीं आना है. मेरी ओर इशारा करके बोली मैं तो बस मिलने आई थी. इनकी खबरें देखती हूं आज मिलकर बड़ा अच्छा लगा.
''बच्चा दोबारा परीक्षा से इतना परेशान हो गया, सीकर का नाम सुन लगा रोने''
NEET परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े कई अभिभावक बच्चों की वजह से तनाव में हैं. ऐसे ही एक दूसरे अभिभावक मनदीप सिंह मिले. बोले परीक्षा रद्द होने के बाद किसी तरह से बच्चे को सीकर छोड़कर आया था. बच्चा दोबारा परीक्षा से इतना परेशान हो गया कि सीकर का नाम सुनकर रोने लगा.किसी तरह समझा कर उसे भेजा था कल ही वो सीकर से दिल्ली परीक्षा देने के लिए आया. हालांकि मैंने बच्चे से बोला है NEET होगा या नहीं तनाव मत लेना.
सरकार से लेकर शिक्षा मंत्री तक के बयानों में छात्रों को मजबूत बनने की सलाह दी जाती है लेकिन अभिभावकों और छात्रों का तनाव शायद ही इस तरह के बयान और सुविधाएं कम कर पाती होंगी..सबसे जरुरी समय पर पारदरिशी परीक्षा होना और वक्त से बिना विवाद परीक्षा का परिणाम आना है…इससे परीक्षा की प्रक्रिया पर छात्रों का भरोसा बढ़ेगा.
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