- गर्भधारण नहीं हुआ तो क्या डॉक्टर पर 420 लगेगी? इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला
- IVF की सफलता की गारंटी नहीं, डॉक्टर के खिलाफ केस रद्द
- केवल इलाज असफल होने से आपराधिक मामला नहीं बनता: इलाहाबाद HC
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IVF उपचार और डॉक्टरों की आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि IVF प्रक्रिया के असफल होने को अपने आप धोखाधड़ी या चीटिंग का अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा विज्ञान कोई सटीक विज्ञान नहीं है और किसी भी डॉक्टर से इलाज की शत-प्रतिशत सफलता की अपेक्षा नहीं की जा सकती. इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने बुलंदशहर की एक फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉक्टर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द कर दिया.
क्या था मामला?
लाइव लॉ के मुताबिक ये मामला बुलंदशहर के टियोटिया हॉस्पिटल एंड फर्टिलिटी सेंटर से जुड़ा हुआ है. शिकायतकर्ता जयवीर सिंह ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उनकी पत्नी गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं. इसके बाद वह अपनी पत्नी को IVF ट्रीटमेंब् के लिए हॉस्पिटल लेकर गए. शिकायत के अनुसार डॉक्टर ने IVF के जरिए गर्भधारण कराने का भरोसा दिया और इलाज के लिए 3.5 लाख रुपये मांगे. शिकायतकर्ता ने यह रकम किस्तों में जमा कराई, लेकिन आरोप लगाया कि केवल 1.6 लाख रुपये की रसीद दी गई.
गर्भधारण नहीं हुआ तो लगाया धोखाधड़ी का आरोप
शिकायत में कहा गया कि उपचार के बावजूद उनकी पत्नी गर्भवती नहीं हुईं. जब पैसे वापस मांगे गए तो डॉक्टर ने कथित रूप से राशि लौटाने से इनकार कर दिया. स्थानीय पुलिस से कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता, उसकी पत्नी और एक अन्य गवाह के बयान दर्ज करने के बाद डॉक्टर को आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत तलब कर लिया.
हाईकोर्ट में पहुंचीं डॉक्टर
समन आदेश को चुनौती देते हुए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. उनका कहना था कि IVF सहित कोई भी चिकित्सा प्रक्रिया 100 प्रतिशत सफलता की गारंटी नहीं दे सकती. इसलिए IVF की असफलता को धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता. राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया था.
अदालत ने क्या कहा?
जस्टिस चवन प्रकाश की पीठ ने कहा कि धारा 420 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा रखते हुए किसी व्यक्ति को संपत्ति देने के लिए प्रेरित किया हो. अदालत ने कहा कि किसी मेडिकल प्रक्रिया के अपेक्षित परिणाम न देने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि डॉक्टर की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी. कोर्ट ने कहा कि IVF उपचार को गर्भधारण की कानूनी गारंटी नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसकी सफलता और असफलता कई शारीरिक एवं चिकित्सकीय कारकों पर निर्भर करती है.
इलाज की असफलता को नहीं माना जा सकता अपराध
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के "जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य" फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान कोई सटीक विज्ञान नहीं है और किसी डॉक्टर द्वारा इलाज की सफलता की गारंटी नहीं दी जा सकती. अदालत ने कहा, 'उपचार या प्रक्रिया का असफल होना अपने आप में न तो लापरवाही साबित करता है और न ही भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक धोखाधड़ी.' कोर्ट के अनुसार डॉक्टर को दी गई रकम चिकित्सा सेवाओं और उपचार प्रक्रिया के लिए ली गई पेशेवर फीस थी.
मजिस्ट्रेट की कार्यवाही पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट ने समन आदेश 'बहुत ही सामान्य तरीके' से पारित किया था. अदालत ने कहा कि किसी आरोपी को आपराधिक मुकदमे में तलब करना गंभीर मामला है और केवल आरोपों के सपोर्ट में गवाह पेश कर देना पर्याप्त नहीं होता. कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी है कि वह मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों की सावधानीपूर्वक जांच करे और यह संतुष्ट हो कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है.
एक्शन लेंगे तो खतरनाक उदाहरण बनेगा
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता. इसलिए समन आदेश, पुनरीक्षण अदालत के आदेश तथा पूरी शिकायत कार्यवाही को रद्द कर दिया गया. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि असफल चिकित्सा उपचार के हर मामले में डॉक्टरों के खिलाफ धारा 420 के तहत कार्रवाई होने लगे, तो यह एक खतरनाक उदाहरण बनेगा और चिकित्सा पेशेवरों को अनावश्यक आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ेगा.
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