- IAS दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया और इसे सोशल मीडिया पर साझा किया
- मिर्जापुर में DM रहते हुए उन्होंने गांव लहुरिया दह में पेयजल संकट को दूर करने का प्रयास किया
- गांव के कठिन भौगोलिक हालात के बावजूद दिव्या मित्तल ने हार नहीं मानी थी
IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़ दी. उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की और उसी की आखिरी लाइनों में यूपी के गांव लहुरिया दह की एक महिला का जिक्र करते हुए लिखा-"वो वृद्ध मां कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा."
मिर्जापुर की कमान संभालते ही लहुरिया दह पहुंची थीं दिव्या मित्तल
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्या मित्तल को 17 सितंबर 2022 को संत कबीर नगर डीएम पद से स्थानांतरित करके मिर्जापुर डीएम की जिम्मेदारी सौंपी थी. बतौर डीएम दिव्या मित्तल की यह दूसरी पोस्टिंग थी. मिर्जापुर जिला कलेक्टर बनने के बाद दिव्या मित्तल पहली बार गांव लहुरिया दह पहुंचीं. मध्य प्रदेश सीमा के पास एक पहाड़ी की चोटी पर बसा हलिया ब्लॉक का गांव लहुरिया दह, मिर्जापुर जिला मुख्यालय से महज 49 किलोमीटर दूर था.
आजादी के 75 साल बाद मिर्जापुर के लहुरिया दह में पानी पहुंचाने वाली जिला अधिकारी दिव्या मित्तल ने आज इस्तीफा दे दिया(2026)
— KAPIL (@kapilkumarjmc2) August 30, 2026
पानी पहुंचाने की घटना के बाद उनका अगले एक-दो दिन में ट्रांसफर कर दिया गया था स्थानीय भाजपा नेता ने प्रोटोकॉल एमएलए एमपी को ना बुलाने की शिकायत की थी 2023 pic.twitter.com/HAT0lEm8Fn
आजादी के 75 साल बाद भी पानी को तरसता था गांव
गांव लहुरिया दह के हालात देखकर मिर्जापुर कलेक्टर दिव्या मित्तल दंग रह गई थीं. तकरीबन 1500 की आबादी वाले इस दलित बहुल गांव में आजादी के 75 साल बाद भी पेयजल नहीं पहुंचा था. यहां लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे थे. कोई भी यहां अपनी बेटी को दुल्हन बनाकर भेजने को तैयार नहीं था और गांव के हर दूसरे घर में लड़कों की शादी नहीं हो पा रही थी. लोग टैंकरों के भरोसे प्यास बुझाने को मजबूर थे. गांव लहुरिया दह में पानी के टैंकर पहुंचाने का हाल भी यह था कि एक तो पहाड़ी का दुर्गम रास्ता और दूसरा टैंकरों का बिल भरते-भरते ग्राम पंचायत कर्ज में डूब चुकी थी.
सर्वे की पुरानी रिपोर्टों को खारिज कर नए सिरे से बनाया प्लान
जब दिव्या मित्तल ने गांव लहुरिया दह में पेयजल पहुंचाने की ठानी और सरकारी फाइलें खंगालीं, तो हर एक फाइल में रिपोर्ट का नतीजा यही लिखा मिला कि विपरीत भौगोलिक स्थिति की वजह से लहुरिया दह में नल से पेयजल पहुंचाना मुमकिन नहीं है. मतलब सरकारी योजनाएं बनती तो थीं, मगर सर्वे के बाद दम तोड़ देती थीं.


पानी पहुंचते ही रो पड़ी थीं बुजुर्ग महिला, दिया था आशीर्वाद
करीब 9 माह की मशक्कत के बाद लहुरिया दह में पानी पहुंचा. दिव्या मित्तल दोबारा गांव में पहुंचीं, तब वहां के 125 घरों के नलों में पानी आ रहा था. लोग बहुत खुश थे और वे दिव्या मित्तल को लहुरिया दह की 'भागीरथी' तक कह रहे थे. उसी दौरान एक बुजुर्ग महिला ने उनका हाथ पकड़कर रोना शुरू कर दिया. खुद दिव्या मित्तल भी अपने आंसू नहीं रोक पाई थीं. उस बुजुर्ग महिला ने सिर पर हाथ रखकर दिव्या मित्तल को आशीर्वाद भी दिया, जिसे वे इस्तीफा देते समय भी नहीं भूल सकीं. पानी वाली यह पूरी भावुक कहानी दिव्या मित्तल ने पूर्व में भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी.
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