Noida Metro Extension: दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले और खासकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने एक्वा लाइन के बहुप्रतीक्षित विस्तार की तैयारी पूरी कर ली है. सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन और ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी तक बनने वाली दो नई मेट्रो लाइनों के लिए अगले एक सप्ताह के भीतर टेंडर जारी होने की उम्मीद है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा और पहली बार में ही निर्माण एजेंसी का चयन हो गया, तो इस साल दिवाली के आसपास इन रूट्स पर काम शुरू हो सकता है.

बॉटनिकल गार्डन से सेक्टर-142: दिल्ली और नोएडा के बीच खत्म होगी दूरी
एक्वा लाइन का सबसे अहम और उपयोगी विस्तार सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन के बीच होने वाला है. लगभग 11.56 किलोमीटर लंबी यह लाइन ₹2,254.35 करोड़ की लागत से तैयार की जाएगी. वर्तमान में एक्वा लाइन से ब्लू लाइन (दिल्ली मेट्रो) में जाने के लिए यात्रियों को सेक्टर-51 और 52 के बीच काफी पैदल चलना पड़ता है या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है. बॉटनिकल गार्डन स्टेशन के बनने से यात्री सीधे ब्लू लाइन और मेजेंटा लाइन (जो सीधे एयरपोर्ट और दक्षिण दिल्ली को जोड़ती है) के लिए इंटरचेंज कर सकेंगे. इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि सफर भी आरामदायक हो जाएगा. इस रूट पर कुल 8 नए स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं जो नोएडा के प्रमुख रिहाइशी और कमर्शियल हब को कवर करेंगे. ये संभावित स्टेशन सेक्टर-125, सेक्टर-94, सेक्टर-97, सेक्टर-98, सेक्टर-105, सेक्टर-108, सेक्टर-110 और सेक्टर-142 हो सकते हैं. इन स्टेशनों के बनने से नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वाली एक बड़ी आबादी को सीधे मेट्रो की सुविधा मिलेगी और सड़क पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा.

ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी: भविष्य के ट्रांसपोर्ट हब से जुड़ाव
मेट्रो विस्तार का दूसरा हिस्सा ग्रेटर नोएडा के डिपो स्टेशन से बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक होगा. हालांकि इस लाइन की लंबाई महज 2.6 किलोमीटर है, लेकिन रणनीतिक रूप से यह बेहद खास है. करीब 416 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस लाइन पर 2 नए स्टेशन बनाए जाएंगे. इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मेट्रो को सीधे 'बोड़ाकी मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब' (MMTH) से जोड़ देगा. बता दें कि बोड़ाकी को आने वाले समय में एक बड़े रेलवे टर्मिनल और अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) के रूप में विकसित किया जा रहा है. मेट्रो लाइन के यहां तक पहुंचने से ग्रेटर नोएडा के निवासियों को लंबी दूरी की ट्रेनें पकड़ने के लिए नई दिल्ली या आनंद विहार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे सीधे मेट्रो के जरिए रेलवे टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे, जिससे यह क्षेत्र भविष्य में ट्रांसपोर्ट का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा.
निवेश और समय सीमा: क्या है आगे का रोडमैप
इन दोनों परियोजनाओं के लिए फंडिंग का मॉडल तय हो चुका है, जिसमें भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी. इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी इस निवेश में अपना सहयोग देंगे.
दिवाली तक काम शुरू होने की खबर ने उन हजारों लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं जो लंबे समय से दिल्ली और नोएडा के बीच मेट्रो लिंक का इंतजार कर रहे थे.
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो: रैपिड रेल की वजह से रूट में बदलाव
जेवर एयरपोर्ट और गाजियाबाद के बीच प्रस्तावित रैपिड रेल (RRTS) परियोजना के कारण ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो के रूट में बड़ा बदलाव किया गया है. सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 तक प्रस्तावित मेट्रो लाइन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर जल्द ही मंत्रालय में प्रेजेंटेशन दिया जाएगा.पहले यह लाइन नॉलेज पार्क-5 तक जानी थी, लेकिन चूंकि गाजियाबाद से ग्रेनो वेस्ट होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक रैपिड रेल गुजरनी है, इसलिए फिलहाल मेट्रो को सेक्टर-4 तक ही सीमित रखा गया है. अधिकारियों का मानना है कि इससे दोनों परिवहन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल रहेगा और यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे.
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