- ग्रेटर नोएडा में युवराज की कार गड्ढे में गिरने से पहले ऐसे ही भरत भाटी की भी मौत हो चुकी है
- 10 महीने पहले परी चौक के पास खुले नाले में गाड़ी गिरने से स्टेशन मास्टर भरत भाटी की भी मृत्यु हो गई थी
- दोनों हादसों के पीछे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी प्रमुख कारण मानी गई है
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुए हादसे से हर कोई गमगीन है. मॉल के बेसमेंट के लिए खुदे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के युवराज की मौत हो गई थी. जिसके बाद प्रशासन की लापरवाही पर हर कोई सवाल उठा रहा है. अब पता चला है कि ग्रेटर नोएडा में ऐसी ये कोई पहली घटना नहीं है. 10 महीने पहले यानी कि 1 मार्च को भी कुछ ऐसा ही हुआ था. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही के चलते युवराज से पहले परी चौक के पास खुले नाले में गिरने से स्टेशन मास्टर भरत भाटी की भी मौत हो गई थी.
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युवराज से पहले गई थी भरत भाटी की जान
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ही लापरवाही की वजह से स्टेशन मास्टर भरत भाटी की गाड़ी भी ऐसे ही ब्लॉक स्पॉट पर नाले में जा गिरी थी, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई थी. फिर भी प्राधिकरण के लापरवाह अधिकारियों की नींद नहीं खुली. जैसे वे कोई दूसरा हादसा होने के इंतजार में बैठे हों.
खुले नाले में गिर गई थी भरत भाटी की कार
बता दें कि स्टेशन मास्टर भरत भाटी दिल्ली के मंडावली के रहने वाले थे. वह 1 मार्च 2025 को दिन में करीब 3 बजे वह ग्रेटर नोएडा के रामपुर अपने पैतृक गांव किसी शादी में जा रहे थे. जब वह सेक्टर पी 4 में पहुंचे तभी सामने जाकर एक यू टर्न आया, जहां आगे रास्ता बंद था. बिल्कुल समाने एक नाला था. वहां पर न तो कोई वैरिकेडिंग थी न ही कोई रिफ्लेक्टर था. जिसकी वजह से उनकी गाड़ी सीधा नाले में जा गिरी और वह गाड़ी सहित उसी में डूब गए. वहां पर मौजूद लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और मौके पर मौजूद लोगों की मदद से भारत भाटी को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी.

Photo Credit: नरेंद्र ठाकुर
न बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर
इस हादसे के लिए सीधे तौर पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण जिम्मेदार था. अगर वहां पर खुला नाला था तो प्राधिकरण को उस जगह पर वैरिकेडिंग या कोई दिशा निर्देश लगाना चाहिए था कि यह रास्ता आगे बंद है. ग्रेटर नोएडा की बीटा 2 पुलिस की तरफ से ही वहां पर वैरिकेडिंग की गई थी. लेकिन प्राधिकरण ने फिर भी उस पर कोई ध्यान नहीं दिया. इस घटना के बाद में अथॉरिटी ने उस रास्ते को बंद कराया. अब युवराज की मौत के बाद भी गड्ढे वाली जगह के पास दिशा सूचक लगाए हैं कि यहां रास्ता बंद है.
सवाल यही उठता है कि दोनों ही बार हादसे के बाद ही प्राधिकरण क्यों जागा. पहले उसने ध्यान क्यों नहीं दिया. अगर पहले ध्यान दिया होता तो भरत पाटी और युवराज दोनों ही आज जिंदा होते.
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