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This Article is From Apr 30, 2026

25 लाख की आबादी, 350 से ज्यादा हाईराइज इमारत और आग बुझाने को 2 हाइड्रोलिक लैडर, गौर ग्रीन की आग ने खोली पोल

गाजियाबाद में 25 लाख की आबादी और सैकड़ों हाईराइज सोसायटी के बीच आग से बचाव के लिए सिर्फ दो हाइड्रोलिक लैडर हैं. गौर ग्रीन आग ने फायर सेफ्टी की गंभीर कमी उजागर कर दी है.

25 लाख की आबादी, 350 से ज्यादा हाईराइज इमारत और आग बुझाने को 2 हाइड्रोलिक लैडर, गौर ग्रीन की आग ने खोली पोल
ऊंची इमारतों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल
  • गाजियाबाद में करीब 25 लाख आबादी और 350 से अधिक हाईराइज सोसायटियों के बावजूद केवल दो हाइड्रोलिक लैडर
  • शहर में 101 मीटर ऊंचाई वाले हाइड्रोलिक लैडर की खरीद को मंजूरी मिली है लेकिन यह मशीन अभी तक गाजियाबाद में नहीं
  • 130 से अधिक सोसायटी के फायर ऑडिट में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम सही नहीं पाए गए हैं, जो सुरक्षा पर गंभीर सवाल
गाजियाबाद:

दिल्ली-एनसीआर में घनी आबादी के बीच तेजी से बढ़ते शहर में ऊंची इमारतें और हाईराइज सोसायटी अब आम बात हो चुकी हैं, लेकिन इनके साथ जुड़ी सुरक्षा तैयारियां अब भी बड़े सवालों के घेरे में हैं. हाल ही में गाजियाबाद की गौर ग्रीन सोसायटी में लगी आग ने यह साफ कर दिया है कि आबादी और इमारतें तो तेजी से बढ़ीं, लेकिन आग से बचाव के इंतज़ाम उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाए. गाजियाबाद में करीब 25 लाख की आबादी, 3 लाख फ्लैट्स और 350 से ज्यादा हाईराइज सोसायटी हैं, लेकिन आग से बचाव के लिए शहर के पास केवल 2 हाइड्रोलिक लैडर हैं. ये हाइड्रोलिक लैडर भी 42 मीटर, यानी महज 10–12 मंजिल तक ही पहुंचने में सक्षम हैं. जबकि शहर में ऐसी कई सोसायटी हैं, जिनमें 15 से 20 मंज़िल तक फ्लैट्स बने हुए हैं.

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350 सोसायटी, 25 लाख आबादी और सिर्फ 2 हाइड्रोलिक लैडर

नियमों के मुताबिक शहर में 101 मीटर वाला हाइड्रोलिक लैडर करीब 2 महीने पहले ही आ जाना चाहिए था, लेकिन अब तक यह मशीन सिर्फ मुंबई के पास ही मौजूद है. गौर ग्रीन सोसायटी में लगी आग ने मल्टी‑स्टोरी सोसायटी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आमतौर पर फ्लैट खरीदते वक्त लोग फॉल्स सीलिंग, वुडन फ्लोरिंग और साज‑सज्जा पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह नहीं देखते कि अगर 10वीं, 11वीं या 20वीं मंज़िल पर आग लग जाए तो बचाव के क्या पुख़्ता इंतेजाम हैं. अकेले गाजियाबाद में इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, क्रॉसिंग रिपब्लिक, सिद्धार्थ विहार और गोविंदपुरम जैसे इलाकों में 350 से ज्यादा सुपर हाईराइज सोसायटी हैं. जब इनका फायर ऑडिट कराया गया तो 130 से ज्यादा सोसायटियों में फायर सेफ्टी के इंतज़ाम सही नहीं पाए गए.

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फायर ऑडिट में 130 से ज्यादा सोसायटियां फेल

क्रॉसिंग रिपब्लिक की अजनारा जेनिंक्स सोसायटी की 20वीं मंज़िल पर 21 अप्रैल को आग लगी थी. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड टीम को वहां फायर सेफ्टी का कोई इंतेजाम तक नहीं मिला, जबकि इस सोसायटी को फायर डिपार्टमेंट पहले ही नोटिस जारी कर जरूरी इंतज़ाम करने के निर्देश दे चुका था. मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल बताते हैं कि शहर में कई ऐसी सोसायटी हैं, जिन्हें नोटिस पर भी फायर सेफ्टी के इंतेजाम नहीं किए जा रहे. नियमों के अनुसार, अगर इमारत 45 मीटर से ऊपर है तो हर फ्लैट में फायर स्प्रिंकलर लगाना जरूरी है. वहीं, अगर फ्लैट 60 मीटर से ऊपर है तो स्प्रिंकलर के साथ‑साथ फायर डिटेक्शन सिस्टम भी जरूरी है. इसके अलावा, हर बड़ी सोसायटी में खुद का पानी का स्टोरेज और हर फ्लोर पर आग बुझाने के लिए पाइप लाइन होना जरूरी है.

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42 मीटर की लैडर, लेकिन 20 मंज़िल तक फ्लैट्स

गाजियाबाद जैसे करीब 25 लाख की आबादी वाले शहर को फिलहाल केवल 2 हाइड्रोलिक लैडर के सहारे आग से बचाव करना पड़ रहा है. ये स्वचालित सीढ़ियां भी सिर्फ 42 मीटर तक ही पहुंच पाती हैं. गौर ग्रीन की आग में हाइड्रोलिक लैडर आई जरूर, लेकिन सोसायटी के भीतर निर्माण और अन्य ढांचों की वजह से यह आठवीं से दसवीं मंजिल के फ्लैट्स तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी. ऐसे में सवाल यह है कि जिन सोसायटियों में 10 से 20 मंज़िल तक फ्लैट्स हैं, वहां आग लगने की स्थिति में बचाव कैसे होगा. NDTV की टीम ने गौर ग्रीन में आग की कवरेज के दौरान देखा कि हाइड्रोलिक लैडर मौके पर मौजूद थी, लेकिन नौवीं मंजिल के फ्लैट में लगी आग पर सीधे पानी डालने में नाकाम रही. इस पर चीफ फायर ऑफिसर राहुल पाल बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में फिलहाल 42 मीटर से ज्यादा ऊंची हाइड्रोलिक लैडर उपलब्ध नहीं हैं.

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ऊंची इमारतों में शुरुआती बचाव की जिम्मेदारी सोसायटी की

इस तरह की ऊंची सोसायटियों में आग से बचाव के प्राथमिक इंतेजामम खुद सोसायटी को ही करने होते हैं. उन्होंने बताया कि इतनी ऊंचाई पर लगी आग को हाइड्रोलिक लैडर से बुझाना आसान नहीं होता, क्योंकि ज्यादा ऊंचाई पर पानी की तेज धार पहुंचाना मुश्किल होता है और हवा में लैडर को स्थिर रखना भी खतरे से खाली नहीं है. इसी वजह से सोसायटी में पानी का पर्याप्त भंडारण और हर फ्लोर पर फायर पाइप होना बेहद जरूरी है. गाजियाबाद में 101 मीटर वाले हाइड्रोलिक लैडर की खरीद को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन यह मशीन अब तक शहर नहीं पहुंची है. अगर यह लैडर आ जाती है तो इससे 20वीं मंज़िल तक बचाव संभव हो सकेगा. हालांकि, आग से बचाव से जुड़े जानकार बताते हैं कि इतनी बड़ी हाइड्रोलिक मशीन को तैनात करने के लिए खुली जगह की भी जरूरत होती है.

101 मीटर लैडर की देरी और सुरक्षा पर बड़ा सवाल

गौर ग्रीन जैसे मामलों में, जहां खाली जगह पर स्विमिंग पूल और गार्डन बना दिए गए हैं, वहां इतनी बड़ी मशीन भी प्रभावी नहीं रह पाती. फिलहाल भारत में मुंबई के पास ही 101 मीटर की हाइड्रोलिक लैडर मौजूद है. कुल मिलाकर, हाईराइज फ्लैट खरीदते वक्त सजावट के साथ‑साथ यह देखना भी जरूरी है कि आग से बचाव के लिए बिल्डर और सोसायटी ने क्या इंतेजाम किए हैं, क्योंकि आपात हालात में वही इंतज़ाम आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा बनते हैं.

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